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69 मेडल@69 कहानियां: पिता की मौत और सिस्टम की भी नहीं रोक पाई इन लड़कियों का हौंसला

कहानी 50 और 51: भारतीय ओलिंपिक संघ ने पिंकी और मालाप्रभा की किट का भुगतान करने से इंकार कर दिया था क्योंकि वे भारतीय कुराश संघ से जुड़े हैं जो मान्यता प्राप्त नहीं है

Updated On: Sep 15, 2018 03:31 PM IST

FP Staff

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69 मेडल@69 कहानियां: पिता की मौत और सिस्टम की  भी नहीं रोक पाई इन लड़कियों का हौंसला

एशियन गेम्स में पहली बार शामिल किए गए कुराश खेल में उनका चयन होने के कुछ वक्त बाद ही उनके पिताजी की मौत हो गई थी. वह पिंकी के चयन पर काफी खुश थे.

19 साल की पिंकी बलहारा दिल्ली के नेब सराय इलाके में रहती हैं. हाल में उनके परिवार में तीन मौत हुई थीं, जिनमें से एक उनके पिता भी थे. वह खेलों के शुरू होने से सिर्फ तीन महीने पहले दुनिया छोड़कर चले गए थे. बावजूद इसके पिंकी ने खुद को लक्ष्य से भटकने नहीं दिया और महिलाओं की प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता.

पिता की मृत्यु के बाद टीम को 20 दिन के अभ्यास शिविर के लिए उज्बेकिस्तान जाना था और इसके लिए उनके गांव वालों ने मदद की. उन्हें अभ्यास शिविर में भेजने के लिए उनके गांव वालों ने 1.75 लाख रूपये जुटाए.

मालाप्रभा के प्रदर्शन से बदलेगी परिस्थिति

इसी प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली मालाप्रभा के लिए भी यह ऐतिहासिक मौका था. इन लड़कियों का यह प्रदर्शन उल्लेखनीय है क्योंकि एशियाई खेलों में टीम की भागीदारी पर ही सवाल उठाए जा रहे थे तथा भारतीय ओलिंपिक संघ ने उनकी किट का भुगतान करने से इंकार कर दिया था क्योंकि वे भारतीय कुराश संघ से जुड़े हैं जिसे भारत में मान्यता हासिल नहीं है. कुराश संघ को खेल मंत्रालय से मान्यता हासिल नहीं है लेकिन अब शायद स्थिति में बदलाव आ जाए.

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