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मिताली भी उस परंपरा की बलि चढ़ीं, जहां महान खिलाड़ियों का सम्मान नहीं होता!

मिताली ने टीम के कोच रमेश पोवार और सीईओ की सदस्य डायना एडुलजी पर आरोप लगाए हैं कि दोनों का रवैया उनके प्रति पक्षपातपूर्ण है और वे उन्हें बर्बाद करने पर तुले हुए हैं

Updated On: Nov 28, 2018 03:42 PM IST

Manoj Chaturvedi

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मिताली भी उस परंपरा की बलि चढ़ीं, जहां महान खिलाड़ियों का सम्मान नहीं होता!

मिताली राज का भारत की ही नहीं दुनिया की सबसे सफल महिला क्रिकेटरों में शुमार है. इसलिए वह जब कुछ कहती हैं तो उसके मायने होते हैं. अभी पिछले दिनों हुए महिला टी-20 विश्व कप के दौरान अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर लगाए आरोप कष्ट पहुंचाने वाले हैं. उन्होंने टीम के कोच रमेश पोवार और बीसीसीआई की प्रशासकों की समिति (सीईओ) की सदस्य डायना एडुलजी पर आरोप लगाए हैं कि दोनों का रवैया उनके प्रति पक्षपातपूर्ण है और वे उन्हें बर्बाद करने पर तुले हुए हैं. मिताली के आरोपों के बाद एक बार फिर यह सवाल सामने आ रहा है कि क्या हम लोग देश के स्टारों का सम्मान करना नहीं जानते हैं? अगर ऐसा होता तो सौरव गांगुली, वीरेंद्र सहवाग और लिएंडर पेस के बाद भारतीय महिला टेस्ट और वनडे टीम की कप्तान मिताली राज के साथ ऐसा व्यवहार कतई नहीं किया जाता.

सबसे सफल महिला क्रिकेटर के साथ ऐसा व्यवहार क्यों?

इसमें शायद ही दो राय हों कि मिताली राज देश की सबसे सफल महिला क्रिकेटर हैं. उन्होंने 10 टेस्ट में 51.00 के औसत से 663 रन, 197 वनडे मैचों में 51.17 के औसत से 6550 रन और 85 टी-20 मैचों में 37.42 के औसत से 2283 रन बनाए हैं. इन तीनों प्रारूपों में उनके नाम आठ शतक और 72 अर्धशतक भी दर्ज हैं. यह सही है कि वह 35 साल की हैं पर उनका प्रदर्शन ढलान पर नहीं है. वह टी-20 विश्व कप के दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बाहर बैठाए जाने से पहले आयरलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ अर्धशतक (51 और 57 रन) बना चुकी थीं. वहीं इस विश्व कप में खेले एक अन्य मैच में उनकी बल्लेबाजी ही नहीं आई थी. ऐसी बल्लेबाज को पहले ऑस्ट्रेलिया और फिर इंग्लैंड के खिलाफ बाहर बैठाने का तुक किसी के भी पल्ले नहीं पड़ा. हद तो तब हो गई कप्तान हरमनप्रीत ने इंग्लैंड से बुरी तरह से हारने के बाद कहा कि उन्हें टीम प्रबंधन के फैसले पर कोई अफसोस नहीं है. यह दर्शाता है कि इन लोगों को मिताली राज बर्दाश्त ही नहीं हैं.

मिताली ने क्या कहा है

मिताली ने कहा कि मेरे साथ अपमानित करने वाला व्यवहार किया जा रहा था. कोच रमेश पोवार के व्यवहार से लग रहा था कि उनके लिए मैं शायद टीम की सदस्य हूं ही नहीं. मैं  जब भी गलतफहमियों को दूर करने के लिए कोच पोवार के पास गई तो वह बात करने के बजाय मोबाइल को देखकर मेरी अनदेखी करने लगते थे. वह जब नेट्स पर आते और मैं बल्लेबाजी कर रही होती तो वहां रुकने के बजाय दूसरी किसी खिलाड़ी की बल्लेबाजी देखने लगते थे. मिताली ने कहा कि मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि डायना एडुलजी मेरे खिलाफ अपने पद का दुरूपयोग करेंगी. कप्तान हरमनप्रीत के कोच के फैसले का समर्थन करने पर अफसोस हुआ.

सौरव गांगुली भी हो चुके हैं शिकार

LONDON, ENGLAND - JULY 21: Former Indian batsman Sourav Ganguly rings the five minute bell ahead of day five of 2nd Investec Test match between England and India at Lord's Cricket Ground on July 21, 2014 in London, United Kingdom. (Photo by Gareth Copley/Getty Images)

भारत के सफलतम कप्तानों में गिने जाने वाले सौरव गांगुली और टेस्ट क्रिकेट में देश के लिए दो तिहरे शतक जमाने वाले वीरेंद्र सहवाग भी कोच और अधिकारियों की ज्यादतियों का शिकार बन चुके हैं. सौरव गांगुली के साथ चैपल की पहली ज्यादती की घटना 14 दिसंबर 2005 को नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर श्रीलंका पर जीत पाकर लौटने के दौरान घटी. सौरव बस में गंभीर के साथ बैठे हुए थे. कोच ग्रेग चैपल ने गंभीर को बस आगे भेजा और खुद गांगुली के साथ बैठ गए और उनसे कहा कि आपको अगले टेस्ट की टीम में नहीं रखा गया है. इसके बाद इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ सीरीज की टीम में भी उन्हें नहीं चुना गया. यही नहीं इससे पहले जिम्बाब्वे दौरे के बाद चैपल ने बीसीसीआई को ईमेल लिखकर कहा कि सौरव मानसिक और शारीरिक रूप से कप्तान बनने में सक्षम नहीं हैं. इस विवाद की वजह से चैपल तो गए ही पर सौरव गांगुली का करियर बर्बाद कर गए.

वीरेंद्र सहवाग को नहीं मिला विदाई टेस्ट

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देश के एक अन्य स्टार क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग को भी प्रबंधन की बेरुखी का सामना करना पड़ा. सहवाग स्टेडियम तक दर्शनों को खींचने में सक्षम थे. उनकी इस खूबी से डीडीसीए और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की खूब जेबें भरी हैं. वैसे भी उन्होंने तमाम बड़ी पारियां खेलकर टीम इंडिया को जीत दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया है. लेकिन इस क्षमता वाले खिलाड़ी को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने विदाई टेस्ट तक खेलने की अनुमति नहीं दी. सहवाग ने आखिरी टेस्ट 2013 में खेला था. बीसीसीआई को चाहिए था कि वह सहवाग के साथ उनकी भविष्य की योजना पर विचार करता और एक विदाई टेस्ट आयोजित कराकर सम्मान के साथ उनकी विदाई की जाती तो सहवाग को भी लगता कि उसने देश की खातिर जो कुछ किया उसका सही सिला नहीं मिला.

एजलेस वंडर भी हो चुके हैं अपमानित

Leander-Paes

लिएंडर पेस को एजलेस वंडर कहा जाता है और उनकी महानता से देश में कौन वाकिफ नहीं होगा. उन्होंने 27 सालों तक भारत का डेविस कप में प्रतिनिधित्व  किया. वह जब भी देश के लिए खेले तो राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत नजर आए और इस भावना में बहकर उन्होंने ना जाने कितने अप्रत्याशित परिणाम निकालकर देश की प्रतिष्ठा को चार चांद लगाए. पर 2017 में  उज्बेकिस्तान के साथ हुए एशिया-ओसेनिया ग्रुप एक के दूसरे राउंड के मुकाबले के दौरान उनके साथ जिस तरह का बर्ताव किया गया, उसे कतई उचित नहीं कहा जा सकता है. इस पूरे मामले में अखिल भारतीय टेनिस एसोसिएशन (एआईटीए) की गलती भी नजर आई. असल में टेनिस में लिएंडर पेस का वही स्थान है, जैसा क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर का हुआ करता था. जिस तरह सचिन से बीसीसीआई कोई बात करने में परहेज करता था, उसी तरह टेनिस एसोसिएशन ने पेस से बात करने के बजाय छह सदस्यीय टीम में चुनकर अपना पल्ला झाड़ लिया. इसकी वजह से ही जब गैर खिलाड़ी कप्तान महेश भूपति ने पेस को नहीं खिलाया तो उन्हें अपमानित होना पड़ा.

हमें सीखना होगा हीरोज का सम्मान करना

यह सही है कि किसी भी टीम में खिलाड़ी के चयन का आधार उसकी प्रतिभा और प्रदर्शन होता है. यह भी सच है कि कोई भी खिलाड़ी उम्र बढ़ने पर अपना बेस्ट पीछे छोड़ता जाता है. पर लिएंडर पेस, एमसी मैरी कॉम और मिताली राज जैसे भी खिलाड़ी होते हैं, जो उम्र को पीछे छोड़ते हुए शानदार प्रदर्शन करते रहते हैं. इस तरह के खिलाड़ी राष्ट्र का सम्मान बढ़ाने में भी आगे रहते हैं. इसलिए इस तरह के खिलाड़ी आपकी योजना का हिस्सा नहीं हैं, तो उन्हें पूरे सम्मान के साथ इस सच से अवगत कराना चाहिए. ऐसा करने से देश के हीरोज अपमानित होने से बच सकेंगे. यह तब ही संभव है, जब हम हीरोज का सम्मान करना सीख लेंगे. ऐसा होने पर ही मिताली राज जैसी क्रिकेटर को इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.

 

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