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गांव में लकड़ी बीनने वाली मीराबाई को मिलेगा देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान!

अप्रैल में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई ने गोल्ड मेडल हासिल किया था

Updated On: Sep 17, 2018 05:39 PM IST

FP Staff

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गांव में लकड़ी बीनने वाली मीराबाई को मिलेगा देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान!

मीराबाई चानू आज किसी के लिए भी कोई अनसुना नाम नहीं हैं. देश को लगातार मेडल दिलाने वाली चानू ने अपनी मेहनत से देश के लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई हैं. उनके प्रदर्शन का ही असर है कि इस साल मीराबाई उन दो लोगों में शामिल हैं जिन्हें इस साल देश का सबसे बड़ा खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड दिया जाएगा.

मणिपुर की राजधानी इम्फाल से 20 किमी दूर नोंगपोक काकचिंग गांव के गरीब परिवार में जन्मी मीराबाई छह भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं. बचपन में मीराबाई अपने से चार साल बड़े भाई सैखोम सांतोम्बा मीतेई के साथ पास की पहाड़ी पर लकड़ी बीनने जाती थी.

सांतोम्बा ने बताते हैं कि ‘एक दिन मैं लकड़ी का गठ्ठर नहीं उठा पाया, लेकिन मीरा ने उसे आसानी से उठा दिया और वह उसे लगभग दो किमी दूर हमारे घर तक ले आई. तब वह सिर्फ 12 साल की थी.’सके बाद वो वेटलिफ्टिंग के खेल में ही आगे बढ़ीं.

मीराबाई चानू ने गोल्डकोस्ट में देश को पहला गोल्ड मेजल दिलाया था. हालांकि चोट के कराण उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया है.

मीराबाई चानू ने गोल्डकोस्ट में देश को पहला गोल्ड मेडल दिलाया था. 

बचपन में चानू के गांव में वेटलिफ्टिंग सेंटर नहीं था और इसलिए उन्हें रोज़ ट्रेन से 60 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था. चानू ने 2007 में खेलों में अपना सफर शुरू किया. शुरुआत उन्होंने इंफाल के खुमन लंपक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से की थी.

मीराबाई चानू 11 साल की उम्र में अंडर-15 चैंपियन बनीं थीं और 17 साल की उम्र में जूनियर चैंपियन का खिताब अपने नाम किया था. लोहे की बार खरीदना परिवार के लिए भारी था तो उन्होंने बांस से ही बार बनाकर अपनी मेहनत जारी रखी. पिछले साल 2017 वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड हासिल कर सुर्खियां बटोरी थी. इसके बाद इस साल अप्रैल में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया था. हालांकि चोट के चलते वो एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाई थीं.

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