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जसपाल राणा का सनसनीखेज खुलासा, सेलेक्शन पॉलिसी में 'खेल' कर एशियाड गोल्ड मेडलिस्ट सौरव को कर दिया था बाहर

'दूसरे खिलाड़ी को फायदा पहुंचाने’ के लिए सेलेक्शन पॉलिसी (चयन नीति) में किए गए बदलाव के कारण सौरव चौधरी को राष्ट्रीय टीम से एक साल तक बाहर रहना पड़ा

Updated On: Sep 22, 2018 08:20 AM IST

Bhasha

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जसपाल राणा का सनसनीखेज खुलासा, सेलेक्शन पॉलिसी में 'खेल' कर एशियाड गोल्ड मेडलिस्ट सौरव को कर दिया था बाहर

भारतीय जूनियर निशानेबाजी टीम के कोच जसपाल राणा ने दावा किया कि ‘दूसरे खिलाड़ी को फायदा पहुंचाने’ के लिए सेलेक्शन पॉलिसी (चयन नीति) में किए गए बदलाव के कारण 16 साल के एशियन गेम्स गोल्ड मेडल विनर सौरव चौधरी को राष्ट्रीय टीम से एक साल तक बाहर रहना पड़ा. जसपाल भारत के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों में से एक रहे है और उन्होंने मनु भाकर, अनीश भानवाला और सौरव को विश्वस्तरीय निशानेबाज बनाने में अहम भूमिका निभाई है.

सौरव मेरठ के कलिना गांव के किसान परिवार से हैं, जिन्होंने हाल ही में इंडोनेशिया में हुए एशियन गेम्स में कई बार के विश्व और ओलंपिक चैंपियन निशानेबाजों को पछाड़कर गोल्ड मेडल हासिल किया था. एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले वह देश के सबसे युवा निशानेबाज हैं.

एशियन गेम्स में चार बार गोल्ड मेडल जीतने वाले निशानेबाज जसपाल ने कहा, ‘वह एक साल तक राष्ट्रीय टीम से बाहर रहा, क्योंकि एनआरएआई (भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ) के अंदर और बाहर कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा चयन नीति में बदलाव कर दिया गया था. सीनियर वर्ग में भी सौरव देश का शीर्ष निशानेबाज था. वह जीतू राय से भी आगे था, जिसका समर्थन एक एनजीओ कर रहा था. सौरव को एक ट्रायल से यह कहते हुए डिस्क्वालीफाइ कर दिया गया था कि उनका ‘ग्रिप ठीक नहीं हैं.’ इस मामले में मुझे दखल देना पड़ा और कुछ कोचों से बात करने के बाद उसका डिस्क्वालीफिकेशन रद किया गया.’

एशियन गेम्स से पहले ट्रायल्स में सौरव ने जीतू से बेहतर स्कोर किया था. विश्व चैंपियन में सिल्वर मेडल जीतने वाले जीतू राय ने लय खोने से पहले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक हासिल किए हैं. ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट उनका प्रायोजक है. जसपाल यह नहीं चाहते हैं कि सफलता के बाद पैसे और शोहरत से उसके खेल पर कोई असर पड़े.

उन्होंने कहा, ‘मैं निराश नहीं हूं, लेकिन इस बारे में सोचकर परेशानी और चिंता होती है. उन्हें (युवा निशानेबाजों को) अभी लंबा सफर तय करना है और असफलता जैसे जीवन के कड़वे अनुभवों से गुजरना है. इससे वे और मजबूत होंगे. इन सभी निशानेबाजों और उनके हित धारकों को यह सुनिश्चित करना होगा की उनका ध्यान नहीं भटके.’

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