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किस्सा-ए कलमाडी: इतना हंगामा क्यों है भाई ?

पूरे दिन खेल और राजनीतिक गलियारों में रही हलचल

Updated On: Dec 29, 2016 01:26 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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किस्सा-ए कलमाडी: इतना हंगामा क्यों है भाई ?

एक दिन पहले चेन्नई में आए तूफान का असर दिल्ली के गलियारों में बुधवार को दिखाई दिया. चेन्नई में भारतीय ओलिंपिक संघ यानी आईओए के एजीएम में सुरेश कलमाडी और अभय चौटाला को आजीवन अध्यक्ष बनाने का फैसला किया था. ये जानते हुए भी इस कदम से कलमाडी की ताकत में कोई कमी या इजाफा नहीं होगा, बुधवार को राजनीतिक और खेल गलियारों में हलचल मची रही. आखिर शाम के वक्त सुरेश कलमाडी का बयान आया कि जब तक उनका नाम घोटालों से बरी नहीं होता, तब तक वह कोई पद स्वीकार नहीं करेंगे.

सबसे पहले खेल मंत्री विजय गोयल का बयान आया. गोयल ने कहा कि वो इसका विरोध करते हैं. उन्होंने आईओए के साथ सारे संबंध खत्म कर देने की धमकी तक दे दी. दिलचस्प है कि आईओए के साथ खेल मंत्रालय के संबंधों का बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला, ये बात खेल मंत्री को भी पता होगी.

गोयल और कलमाडी के बीच पहले भी रही है तनातनी

विजय गोयल और सुरेश कलमाडी के रिश्तों को दिलचस्प इतिहास है. 2009 में सुरेश कलमाडी कॉमनवेल्थ खेल आयोजन कमेटी के अध्यक्ष थे. उस वक्त दोनों के बीच तनातनी हुई थी. उन्हें कलमाडी ने कमेटी से हटा दिया था. इतिहास के इस आईने के साथ विजय गोयल का बयान देखें, तो अक्स अलग नजर आता है. खेल मंत्रालय ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया.

DELHI, INDIA - OCTOBER 03: Suresh Kalmadi the Chairman of the Delhi 2010 CWG Organising Committee takes his seat prior to the Opening Ceremony for the Delhi 2010 Commonwealth Games at Jawaharlal Nehru Stadium on October 3, 2010 in Delhi, India. (Photo by Ian Walton/Getty Images)

विजय गोयल के बाद बारी कांग्रेस के अजय माकन की थी. सुरेश कलमाडी कांग्रेस के ही अहम सदस्य थे. गांधी परिवार की नाराजगी के बाद कलमाडी की परेशानियां बढ़ी थीं. अजय माकन ने भी उन पर निशाना साधा. लेकिन माकन ने भी कांग्रेस में शामिल ऐसे लोगों पर कोई बात नहीं की, जिन पर आरोप हैं.

कलमाडी ने किया पद लेने से इनकार

इसी दौरान सुरेश कलमाडी का बयान आया कि वह आईओए में कोई पद नहीं लेने जा रहे. उनके वकील हितेश जैन ने एक टीवी चैनल से कहा कि कलमाडी को मंगलवार को हुई घटनाओं के बारे में कुछ पता नहीं था. वो तब तक कोई पद स्वीकार नहीं करने वाले, जब तक उनका नाम क्लीयर नहीं हो जाता.

उनका नाम भी आया, जो आईओए में वापसी करना जरूर चाहते होंगे. अभय सिंह चौटाला. उन्होंने विजय गोयल पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि गोयल की बातों ने हैरान किया है. उन्हें खेल मंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, जिसमें वो फेल हुए हैं. इसी बीच आईओए के पदाधिकारी और अंतरराष्ट्रीय हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष बने नरिंदर बत्रा ने साफ किया कि इन लोगों को अपना नाम साफ होने तक कोई पद नहीं लेना चाहिए.

आजीवन अध्यक्ष के नहीं होते कोई अधिकार

दिलचस्प है कि आजीवन अध्यक्ष के पास किसी भी तरह के अधिकार नहीं होते. ऐसे में पूरे दिन हुई हलचल काफी हैरान करने वाली थीं. बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लोगों ने विरोध किया. लेकिन इस पर कोई बात नहीं की कि अगर आरोप लगने के बाद किसी को बड़े पद पर नहीं होना चाहिए, तो इस तरह का नियम राजनीति में लागू क्यों नहीं किया जाता. वहां हमेशा इसकी बात की जाती है कि अदालत ने अभी तक कोई सजा नहीं दी है.

कलमाडी 1996 से 2011 के बीच आईओए अध्यक्ष थे. कॉमनवेल्थ खेल घोटालों के चलते वह दस महीने जेल में थे. उन्हें जमानत पर रिहा किया गया. उनके बारे में कहा यही जाता है कि गांधी परिवार की नाराजगी के बाद से उनके खराब दिन शुरू हुए हैं. दूसरी तरफ चौटाला दिसंबर 2012 में अध्यक्ष बने थे. लेकिन इससे पहले ही इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी ने आईओए को निलंबित करने का फैसला किया था.

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