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Indian Badminton : ख्वाब थे चीन जैसा दबदबा बनाने के, लेकिन क्या दरकने लगा है ये सपना!

पीवी सिंधु ने इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीते. लेकिन पूरे साल एक भी सुपर सीरीज और सुपर सीरीज प्रीमियर खिताब नहीं जीत सकीं

Updated On: Oct 23, 2018 04:05 PM IST

Manoj Chaturvedi

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Indian Badminton : ख्वाब थे चीन जैसा दबदबा बनाने के, लेकिन क्या दरकने लगा है ये सपना!
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भारतीय बैडमिंटन में कुछ वक्त पहले ऐसा समय आया था, जब लगने लगा था कि बैडमिंटन में चीन की तरह ही भारतीय दबदबा बन सकता है. यह उम्मीदें पुलेला गोपीचंद अकादमी के प्रयासों से सायना नेहवाल, पीवी सिंधु और किदांबी श्रीकांत जैसे चैंपियन खिलाड़ियों के निकलने से बनी थीं. इस तिकड़ी से प्रेरणा लेकर अन्य युवाओं के सामने आने पर एक बार तो लगने लगा था कि विश्व बैडमिंटन पर भारतीय दबदबा बनना अब ज्यादा दूर नहीं है. लेकिन इन दिग्गज खिलाड़ियों के साल 2018 के प्रदर्शन को देखने से लगता है कि यह सपना शायद ही साकार हो सके.

इस तिकड़ी ने साल 2017 में शानदार प्रदर्शन से दबदबे की उम्मीद बंधाई थी. लेकिन 2018 में खिताबों से बनी दूरी ने इस उम्मीद को तगड़ा झटका जरूर दे दिया है. यह सही है कि देश की नंबर एक और विश्व की नंबर तीन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीते. लेकिन पूरे साल एक भी सुपर सीरीज और सुपर सीरीज प्रीमियर खिताब नहीं जीत पाने से उनसे लगाई गई उम्मीदें टूटी हैं. सायना नेहवाल और किदांबी श्रीकांत भी इस साल कोई बड़ा खिताब नहीं जीत सके हैं. इससे कहीं न कहीं लगता है कि हमारी बैडमिंटन कहीं बैक ट्रैक पर तो नहीं जा रही.

उम्मीद बंधातीं सायना

Jakarta: Indian shuttler Saina Nehwal plays against Tai Tzu Ying of Chinese Taipei in the first women's singles semifinal match at the 18th Asian Games in Jakarta, Indonesia on Monday, Aug 27, 2018. Saina lost the match, 17-21, 14-21. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI8_27_2018_000057B)

इसमें कोई दो राय नहीं कि पिछले दिनों डेनमार्क ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर टूर्नामेंट के फाइनल में विश्व की नंबर एक खिलाड़ी ताई जु यिंग से हारने के दौरान सायना नेहवाल जिस तरह से खेलती नजर आईं, उससे लगा कि अप्रैल 2015 में विश्व की नंबर एक रहने वाली इस खिलाड़ी में फिर से छा जाने का माद्दा है. वह पीछे अच्छे टॉस कर रहीं थीं. उन्होंने नेट पर भी पुरानी रंगत वाले खेल का प्रदर्शन किया. यही नहीं उन्होंने कुछ मौकों पर अपने दमदार स्मैशों से भी प्रभाव जमाया. सायना ने पहला गेम हारने के बाद जिस तरह से शटल को बैक कोर्ट में ऊंचा रखकर ताई को नेट पर आने से रोके रखा और इससे वह खेल को धीमा करने में भी सफल रहीं. इस तरह से वह ताई के कमजोर रिटर्न पर अंक जुटाने में कामयाब रहीं. चीनी ताइपे की खिलाड़ी बहुत तेजी से रणनीति बदलने वाली खिलाड़ी मानी जाती हैं. उन्होंने तीसरे गेम में रणनीति बदलकर तेज रिटर्न करके खेल की गति बढ़ाकर मैच की रफ्तार तेज करके सायना के पैर उखाड़ दिए. सायना सहित भारतीय शटलरों में एक कमी अक्सर दिखती है कि वह अपसेट होने पर हताशा में तेजी से अंक खोकर मैच गंवा देते हैं. यह कमजोरी सायना ने भी तीसरे गेम में दिखाई.

सिंधु का दिखा दम पर कम

2016 Rio Olympics - Badminton - Women's Singles - Gold Medal Match - Riocentro - Pavilion 4 - Rio de Janeiro, Brazil - 19/08/2016. P.V. Sindhu (IND) of India reacts during play against Carolina Marin (ESP) of Spain. REUTERS/Marcelo del Pozo FOR EDITORIAL USE ONLY. NOT FOR SALE FOR MARKETING OR ADVERTISING CAMPAIGNS. - RIOEC8J13WFJ0

पीवी सिंधु की हम बात करें तो उन्होंने 2017 में सैयद मोदी इंटरनेशनल ग्रां प्री गोल्ड, इंडियन ओपन सुपर सीरीज और कोरियाई ओपन सुपर सीरीज खिताब जीते. इससे पहले 2016 में चाइना ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर और मलयेशियाई ओपन ग्रां प्री गोल्ड के खिताब जीते थे. यह सही है कि सिंधु ने इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स, विश्व चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में रजत पदक जीते और इस प्रदर्शन को खराब नहीं माना जा सकता है. पर वह फाइनल मैचों में दबदबा बनाने के बाद जिस तरह से हारीं, वह किसी खिलाड़ी को चैंपियन तो नहीं बना सकता है. इन हारों से उनके ऊपर यह टैग लग गया कि वह फाइनल खेलने का दवाब नहीं झेल पाती हैं. अब आप खुद सोचें कि तीनों प्रमुख चैंपियनशिपों के खिताब सिंधु के नाम होते तो उनकी क्या स्थिति होती. यही वजह है कि अप्रैल 2017 में दूसरी रैंकिंग पर पहुंचने के बाद यह उम्मीद की जाने लगी थी कि वह जल्द ही सायना नेहवाल के बाद विश्व की नंबर एक खिलाड़ी बनने वाली भारत की दूसरी खिलाड़ी बन सकती हैं. लेकिन 2018 में  खिताबों से दूरी बने रहने पर वह तीसरी रैंकिंग पर पिछड़ चुकी हैं और खेलने का अंदाज यही रहा तो वह और नीचे भी जा सकती हैं.

हालात बदलने का माद्दा वाली खिलाड़ी

सायना नेहवाल सुपर सीरीज और सुपर सीरीज प्रीमियर के सबसे ज्यादा खिताब जीतने वालीं भारतीय खिलाड़ी हैं. वह विश्व की नंबर एक खिलाड़ी रहने वाली भी इकलौती हैं. पर 2016 के रियो ओलिंपिक के दौरान घुटने की उभरी चोट की सर्जरी कराने के बाद लौटने पर वह कभी रंगत में खेलती नहीं दिखीं. सायना खुद बताती हैं कि 2017 में वापसी करने पर पहले हाफ में टूर्नामेंटों में पहले-दूसरे राउंड में बाहर होने पर उन्हें अहसास हुआ कि वह चेन यूफेई, यामागुची, सुन यू और ताई जु यिंग से कमजोर फिटनेस होने के कारण हारीं. इसलिए उन्होंने इसके बाद पूर्ण फिटनेस पाना ही अपना लक्ष्य बना लिया. इसका असर अब उनके खेल में नजर आने लगे है. वह ताई का तोड़ अपने करियर में कभी नहीं निकाल सकी हैं. लेकिन पिछले तीन सालों में पहली बार ताई के खिलाफ तीन गेमों तक संघर्ष कर सकीं. यही नहीं उन्होंने फाइनल तक की राह में भी दिग्गज खिलाड़ियों को धूल चटाई. सायना की कोर्ट में यह चपलता लंबे समय बाद देखने को मिली. वह यदि इसी तरह खेलती रहीं तो साल 2019 भारतीय बैडमिंटन के लिए सफलताओं से भरा साबित हो सकता है.

श्रीकांत भी नहीं दिखे रंगत में

KIDAMBI SRIKANTH

भारतीय बैडमिंटन के तीसरे दिग्गज किदांबी श्रीकांत हैं. उन्होंने 2017 में ऐसा शानदार प्रदर्शन किया कि सभी अचंभित रह गए. उस साल उन्होंने सुपर सीरीज प्रीमियर के रूप में डेनमार्क और इंडोनेशियाई ओपन, सुपर सीरीज के तौर पर फ्रेंच ओपन और ऑस्ट्रेलियाई ओपन के खिताब जीते. इन प्रदर्शनों से ही वह अप्रैल 2018 में विश्व में पहली रैंकिंग पर पहुंच गए थे. लेकिन खराब प्रदर्शनों की वजह से वह इस समय छठी रैंकिंग पर पिछड़ चुके हैं. वह इस साल उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके हैं. लेकिन उन्होंने पिछले कुछ टूर्नामेंटों में पुरानी झलक दिखाई है. उससे उनसे भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है.

युवा प्रतिभाओं का आगे आना जरूरी

श्रीकांत, पीवी सिंधु, सायना नेहवाल जैसे प्‍लेयर को दुनिया के शीर्ष खिलाडि़यों तक शामिल करने वाले पुलेला गोपीचंद की 15 वर्षीय बेटी गायत्री गोपीचंद अब इस बार सबसे ज्‍यादा नजरें होंगी. फोटो साभार- ट्वीटर

हम यदि बैडमिंटन में चीन जैसा दबदबा बनाना चाहते हैं तो युवा प्रतिभाओं को तराशने में तेजी लानी होगी. देश में बैडमिंटन में प्रतिभाएं तो निकल रही हैं. लेकिन इनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेरने में अंतर ज्यादा होता जा रहा है. सायना के बाद सिंधु के आगे आने में काफी समय लगा. अब सिंधु के बाद हम कोई अंतरराष्ट्रीय स्टार नहीं दे सके हैं. रुत्विका शिवानी गेड ने 2016 में उबर कप में थाई खिलाड़ी निचोन जिंदापोल को हराकर सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा था. वह इस साल गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में मिक्सड टीम को गोल्ड जीतने वाली टीम में थीं. लेकिन वह अभी सायना और सिंधु जैसी चमक नहीं बिखेर सकी हैं. इस लाइन में गोपीचंद की बेटी गायत्री भी शामिल हैं. हम यदि युवा प्रतिभाओं को आगे लाने में तेजी दिखा सकें तो हालात बदल सकते हैं.

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