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इंडिया ओपन बैडमिंटन: सिंधु बनीं चैंपियन, मरीन को हराया

कैरोलिना मरीन के खिलाफ सीधे गेम में 21-19, 21-16 से जीतीं पीवी सिंधु

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi Updated On: Apr 02, 2017 10:37 PM IST

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इंडिया ओपन बैडमिंटन: सिंधु बनीं चैंपियन, मरीन को हराया

क्या ये बदला था? ओलिंपिक फाइनल में हार का बदला? कहानी तो ऐसी ही बनती है. जिसने आपको कुछ महीने पहले हराया हो, उसे एक फाइनल में आप हराएं. शायद गोपीचंद इस तरह न सोचते हों. उनके लिए शिष्या के कुछ पायदान ऊपर जाने का दिन था. शायद उनकी शिष्या पीवी सिंधु भी इस तरह नहीं सोचती हों. उनके लिए भी ये कामयाबी कम से कम बदला तो नहीं होगी. लेकिन दिल्ली के सीरी फोर्ट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में मौजूद आम भारतीय बैडमिंटन फैन्स के लिए ये बदला था.

ओलिंपिक में हार का बदला इंडिया ओपन सुपर सीरीज इवेंट में. सिंधु जीतीं. सीधे गेम में जीतीं. अच्छी बात ये कि 47 मिनट चले इस मैच में कभी नहीं लगा कि उनसे ऊपर रैंक की खिलाड़ी, ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट कैरोलिना मरीन उन्हें हरा पाएंगी. सिंधु ने मुकाबला 21-19, 21-16 से जीता. इस पूरे टूर्नामेंट की तरह एक बार फिर जब वो आगे थीं, तब उत्साह में और पीछे थीं, तो हताशा में अंक नहीं गंवाया. यही एक चैंपियन की पहचान होती है.

हालांकि टूर्नामेंट के पिछले मैचों से एक फर्क था. अब तक स्टैंड में बैठकर मैच देख रहे गोपीचंद इस बार कोर्ट में कोच की जगह पर थे. चेहरे पर हमेशा की तरह निर्लिप्त भाव. लेकिन हर कोई जानता है कि गोपी के लिए हर अंक और कोर्ट पर सिंधु के हर कदम का ध्यान रखना कितना अहम है. जीत के बाद बगैर किसी मुस्कान के अपनी शिष्या को उन्होंने शाबाशी दी. लेकिन उन्हें भी पता होगा कि सिंधु ने वर्ल्ड नंबर वन बनने की तरफ कितना अहम कदम उठाया है.

पहले गेम में सिंधु ने पहले अंक के बाद से लगातार बढ़त बनाए रखी. तब तक, जब गेम का आखिरी लम्हा नहीं आ गया. मरीन 16-16 से बराबरी पर आईं. फिर 18-17 और 19-18 से बढ़त पर आ गईं. यहां से लगातार तीन अंक जीतकर सिंधु ने गेम अपने नाम किया.

पहली बार इंडिया ओपन का फाइनल खेल रहीं सिंधु ने दूसरे गेम में कोई मौका नहीं दिया. मरीन ने बीच-बीच में जरूर वापसी की कोशिश दिखाई. लेकिन कभी ऐसा नहीं लगा कि वो सिंधु को हराने में कामयाब होंगी. उन्होंने बॉडी स्मैश का अच्छा इस्तेमाल किया. कोर्ट कवरेज यकीनन उनकी बेहतर थी. आखिरी अंक पर मरीन ने स्मैश की कोशिश की और नेट में मार गईं. इसके साथ सिंधु की मुट्ठियां भिंची. अब वो चैंपियन थीं. वो भी ऐसी खिलाड़ी को हराकर, जो रैंकिंग में उनसे ऊपर हैं. इससे पहले आपस में खेले मैचों में जिनसे वो ज्यादा बार हारी हैं.

इस पूरे टूर्नामेंट में अरुंधती पंतावने के खिलाफ पहले राउंड के अलावा सिंधु ने कोई आसान मैच नहीं खेला. अगले तीन मैच 40 मिनट, 47 मिनट और एक घंटा 16 मिनट चले. लेकिन वो कभी थकी नहीं दिखाई दीं. फिटनेस में कमी नहीं दिखी. ये सब वो है, जो दिल्ली से सिंधु अपने साथ पॉजिटिव के तौर पर लेकर जाएंगी. टूर्नामेंट के नेगेटिव के नोट्स तो गोपीचंद के पास जरूर होंगे. वो यकीनन इससे संतुष्ट नहीं होंगे. न ही उनकी शिष्या.

डेनमार्क के विक्टर एक्सेलसन ने पुरुष सिंगल्स खिताब जीता. फाइनल में चीनी ताइपे के चुओ तियान चेन को मात देकर खिताब अपने नाम कर लिया. एक्सेलसन ने चेन को आसान मुकाबले में 21-13, 21-10 से मात दी.

पुरुष डबल्स के फाइनल में इंडोनेशिया के मार्कस फेर्नाल्डी गिडेयोन और केविन संजया सुकामुलजो की जोड़ी ने हमवतन रिकि कारणदासुवार्डी और अनग्गा प्रतामा की जोड़ी को आसान मुकाबले में 21-11, 21-15 से मात देते हुए खिताब जीता. महिला डबल्स का फाइनल जापान की शिहो टानाका और कोहारु योनेमोटो की जोड़ी के नाम रहा. इस जोड़ी ने भी अपनी हमवतन नाओको फुकुमैन और कुरुमी योनाओ की जोड़ी को कड़े मुकाबले में 16-21, 21-19, 21-10 से मात दी. मिक्स्ड डबल्स के फाइनल में चीन के लु केई तथा हुयांग याकियोंग की जोड़ी ने जीत हासिल की

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