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भारतीय हॉकी में 'म्यूजिकल चेयर' जारी, हरेंद्र सिंह को हटाया... कहा- जूनियर टीम संभालो

Indian Hockey - हरेंद्र सिंह को जूनियर टीम का कोच बनाने का प्रस्ताव, कुछ समय में होगा सीनियर टीम के कोच का फैसला

Updated On: Jan 10, 2019 12:36 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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भारतीय हॉकी में 'म्यूजिकल चेयर' जारी, हरेंद्र सिंह को हटाया... कहा- जूनियर टीम संभालो

भारतीय हॉकी में हैरान होना रुटीन शब्द जैसा है. एक बार फिर ऐसा फैसला किया गया है, जो आम लोगों को हैरान करेगा. लेकिन भारतीय हॉकी को जानने-समझने वालों के लिए यह रुटीन फैसला है. वर्ल्ड कप हॉकी में छठे स्थान पर आई टीम इंडिया के कोच हरेंद्र सिंह को सीनियर टीम से हटाने का फैसला किया गया है. उन्हें जूनियर टीम का कोच पद संभालने का ऑफर दिया गया है. सीनियर टीम के चीफ कोच के लिए आवेदन मंगाए जाने का फैसला हुआ है.

दिलचस्प है कि जब तक सीनियर टीम का कोच नहीं चुना जाता, तब तक डेविड जॉन जिम्मेदारी संभालेंगे. हॉकी इंडिया के अलावा शायद हर किसी को याद होगा कि वर्ल्ड कप से ठीक पहले डेविड जॉन को टीम से जुड़े हर फैसले से अलग कर दिया गया था. डेविड जॉन ने एक इंटरव्यू में सीनियर खिलाड़ियों के प्रदर्शन की आलोचना की थी. फिर उनके ‘पक्षपाती रवैये’ को देखते हुए उन्हें टीम से अलग रहने को कहा गया था. यहां तक कि भुवनेश्वर में हुए वर्ल्ड कप के दौरान भी डेविड जॉन टीम के साथ नहीं थे. आखिरी दिनों में वो गए, तब भी टीम से अलग ही रहे.

हॉकी इंडिया की बैठक सोमवार को हुई थी, जिसके बाद यह फैसला किया गया. हॉकी इंडिया की प्रेस रिलीज के मुताबिक यह फैसला 2021 के जूनियर वर्ल्ड कप और 2020, 2024 के ओलिंपिक्स को नजर में रखकर लिया गया है. 2019 में नया कोच लाने से 2020 के ओलिंपिक्स में प्रदर्शन कैसे सुधरेगा, यह समझ पाना और समझा पाना उन्हीं लोगों के लिए संभव होगा, जो इस मीटिंग का हिस्सा थे. हाई परफॉर्मेंस एंड डेवलपमेंट कमेटी की इस मीटिंग के अध्यक्ष आरपी सिंह हैं. उनके अलावा हरबिंदर सिंह, बीपी गोविंदा और सैयद अली जैसे खिलाड़ी इस कमेटी का हिस्सा हैं.

आरपी सिंह ने इस मामले में अपना पक्ष रखा. फर्स्टपोस्ट के साथ खास बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर नतीजे नहीं आएंगे, तो बदलाव किए ही जाएंगे. उन्होंने खासतौर पर एशियन गेम्स में गोल्ड नहीं जीतने को लेकर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, 'अगर आप एशिया में नंबर वन हैं तो एशियन गेम्स में गोल्ड जीतना ही चाहिए. ऐसा होता तो हमको ओलिंपिक्स में क्वालिफाई करने की चिंता ही नहीं होती.' हालांकि उन्होंने यह साफ किया कि सिर्फ एशियन गेम्स नहीं, वर्ल्ड कप के प्रदर्शन को भी ध्यान में रखा गया. हालांकि शायद फैसला करने वाली कमेटी ने चैंपियंस ट्रॉफी पर ध्यान नहीं दिया, जहां हरेंद्र सिंह की टीम ने सिल्वर जीता था.

भारतीय टीम का अगला टूर्नामेंट मार्च में

इस मीटिंग में तय किया गया कि जूनियर वर्ल्ड कप विजेता टीम के कोच रहे हरेंद्र सिंह को सीनियर टीम से हटाकर दोबारा जूनियर टीम सौंप दी जाएगी. हॉकी इंडिया के मुताबिक आरपी सिंह ने हरेंद्र सिंह को यह प्रस्ताव दिया है. जूनियर टीम का कैंप मार्च में होगा. उससे पहले फरवरी में सीनियर टीम का कैंप लगेगा, जो 23 मार्च से होने वाले सुल्तान अजलन शाह टूर्नामेंट में खेलने मलेशिया जाएगी. आरपी सिंह ने उम्मीद जताई कि जल्दी ही नए कोच का चयन हो जाएगा.

2019 में सीनियर टीम के सामने ओलिंपिक्स क्वालिफायर्स के अलावा कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं है. लेकिन हर कोई समझ सकता है कि ओलिंपिक्स क्वालिफायर्स की क्या अहमियत है. उसके बाद, ओलिंपिक्स के लिए करीब एक साल का वक्त बचता है. ऐसे में नए कोच को आना है, उसे टीम को समझना है. अपनी तरह से टीम को खिलाना है. उसके बाद ओलिंपिक्स में अच्छे प्रदर्शन का भी दबाव होगा. हालांकि आरपी सिंह के मुताबिक इतना समय काफी है.

जूनियर से महिला सीनियर, फिर पुरुष सीनियर, अब फिर जूनियर!

हॉकी इंडिया ने यह प्रस्ताव भारतीय खेल प्राधिकरण यानी साई को भेज दिया है. करीब डेढ़ दशक तक सीनियर टीम के साथ असिस्टेंट कोच रहने और हटने के बाद हरेंद्र सिंह को उस जूनियर टीम का चीफ कोच बनाया गया था, जिसने 2016 में वर्ल्ड कप जीता. उसके बाद जब रोलंट ओल्टमंस को पुरुष टीम के कोच पद से हटाया गया, तो महिला टीम के कोच को पुरुष टीम की कमान दी गई. हरेंद्र को महिला टीम के साथ भेज दिया गया. जब कॉमनवेल्थ गेम्स में टीम का प्रदर्शन कमजोर रहा, तो हरेंद्र को सीनियर टीम की कमान दे दी गई. अब उन्हें वापस जूनियर टीम के साथ भेजने का फैसला हुआ है.

दिलचस्प है कि प्रेस रिलीज में बेहद निराशाजनक 2018 बताने वाली हॉकी इंडिया ने हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर डेविड जॉन पर कोई फैसला नहीं लिया, जो ऑस्ट्रेलिया के हैं. उनके परफॉर्मेंस से शायद कोई नाराजगी नहीं है. नया कोच आने तक टीम के सपोर्ट स्टाफ में रहे एक और ऑस्ट्रेलियन क्रिस सिरिलो को भी बरकरार रखा गया है. यह भी ऑस्ट्रेलियन हैं. हॉकी इंडिया की सीईओ तो ऑस्ट्रेलिया की हैं ही.

इस बारे में भी अभी कोई फैसला नहीं हुआ है कि हरेंद्र के जूनियर टीम का कोच बनने के बाद जूड फेलिक्स का क्या होगा. जूड अभी जूनियर टीम के कोच हैं. उन्हें अब क्या सीनियर टीम के साथ जोड़ा जाएगा या हरेंद्र की कोचिंग स्टाफ के सदस्य होंगे. कुल मिलाकर ओलिंपिक्स से डेढ़ साल पहले भारतीय हॉकी में म्यूजिकल चेयर का गेम जारी है, जो इस खेल की पहचान रहा है.

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