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Fifa World Cup 2018 : उरुग्वे का साथी बनने के लिए ग्रुप ए में होगा संघर्ष

इस ग्रुप की सबसे मजबूत टीम उरुग्वे है और उसके साथ ही मिस्र भी अगले दौर में स्थान बनाने की दावेदार मानी जा सकती है

Updated On: Jun 14, 2018 12:24 PM IST

Manoj Chaturvedi

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Fifa World Cup 2018 : उरुग्वे का साथी बनने के लिए ग्रुप ए में होगा संघर्ष

ग्रुप ए : रूस, उरुग्वे, मिस्र और सऊदी अरब

इस बार फीफा विश्व कप की शुरुआत इस चैंपियनशिप की दो सबसे कमजोर टीमों के बीच मुकाबले से होगी. यह उद्घाटन मैच 65वीं रैंकिंग की मेजबान टीम रूस और 63वीं रैंकिंग की सऊदी अरब के बीच मास्को के लुझमिंक स्टेडियम में खेला जाएगा. विश्व कप इतिहास में शायद पहली बार होगा कि उद्घाटन मैच इतनी कमजोर टीमों के बीच खेला जाएगा. ग्रुप ए की दोनों ऐसी टीमें हैं, जिनके नॉकआउट चरण में स्थान बनाने की उम्मीदें कम ही हैं. इस ग्रुप की सबसे मजबूत टीम उरुग्वे है और उसके साथ ही मिस्र भी अगले दौर में स्थान बनाने की दावेदार मानी जा सकती है. यह सही है कि मिस्र की टीम के नाम विश्व कप में अभी कोई जीत दर्ज नहीं है. पर वह इस बार अपने इस रिकॉर्ड में सुधार करने की उम्मीद कर रही है.

इन स्टार्स पर निर्भर होगी सफलता

मोहम्मद सालाह (मिस्र) : इस फुटबॉलर ने  प्रीमियर लीग में इस सीजन में लिवरपूल के लिए 38 मैचों में खेलकर 32 गोल जमाने का रिकॉर्ड बनाया है. इस कारण पहले सत्र में मिले गोल्डन बूट को लंदन स्थित ब्रिटिश म्यूजियम में प्राचीन मूर्तियों के बीच रखा जाएगा.

लुइस सुआरेज (उरुग्वे) : सुआरेज बार्सिलोना क्लब के प्रमुख खिलाड़ियों में शुमार रखते हैं. वह उरुग्वे के लिए सर्वाधिक 50 गोल जमाने वाले खिलाड़ी हैं. उन्होंने 26 गोल जमाने में सहयोग भी दिया है. उन्हें पेरिस सेंट जर्मेन (पीएसजी) में खेलने वाले एडिंसन कवानी का सहयोग मिलने पर वह प्रभावी साबित हो सकते हैं.

लुइस सुआरेज (उरुग्वे)

लुइस सुआरेज (उरुग्वे)

फेडोर समोलोव (रूस) : इस खिलाड़ी के बारे में कहा जाता है कि वह चल गया तो रूसी अभियान अगले दौर में पहुंच सकता है. वह रूसी लीग में क्रासनोडार क्लब के लिए खेलते हैं और उन्होंने सर्वाधिक 14 गोल जमाए हैं. कोकोरिन की अनुपस्थिति में उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है.

मोहम्मद अल साहलावी (सऊदी अरब) : यह 30 वर्षीय स्ट्राइकर मैनचेस्टर यूनाइटेड में तीन हफ्ते का प्रशिक्षण ले चुका है और इससे उनके खेल कौशल में जबर्दस्त सुधार हुआ है. उन्होंने क्वालीफाइंग दौर में 16 गोल जमाकर अपनी टीम को मुख्य ड्रॉ में स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है.

ग्रुप टीमों का इतिहास

हम ग्रुप की टीमों के विश्व कप इतिहास की बात करें उरुग्वे ही इस मामले में दमदार नजर आती है. वह इससे पहले तक 12 बार भाग ले चुकी है और 1930 और 1950 में चैंपियन भी रह चुकी है. लेकिन बड़ा प्रदर्शन  किए उन्हें लंबा समय बीत चुका है. वहीं मिस्र की टीम ने 1990 के बाद पहली बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है. वह इससे पहले दो बार विश्व कप में खेल चुकी है पर दोनों ही मौकों पर वह जीत के लिए तरसते रही है. रूस की बात करें तो वह दसवीं बार विश्व कप में भाग ले रही है. वह सात बार सोवियत संघ के तौर पर भाग ले चुकी है और उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 1966 में चौथा स्थान है. पर पिछले तीन विश्व कप की  बात करें तो 2006 और 2010 में क्वालिफाई ही नहीं कर सकी और 2014 में ग्रुप चरण में ही हार गई. सऊदी अरब की टीम भी पांचवीं बार विश्व कप में खेल रही है. लेकिन वह 2010 और 2014 में क्वालीफाई नहीं कर पाने के बाद इस बार खेल रही है. पर उनसे किसी को भी खास उम्मीद नहीं है.

किसके दावे में कितना दम

हम यदि इस ग्रुप की टीमों के नॉकआउट चरण में स्थान बनाने के दावे के बारे में देखें तो इस मामले में उरुग्वे का दावा सबसे दमदार नजर आता है. क्वालीफाइंग दौर की शुरुआत उनकी अच्छी नहीं रह सकी थी, क्योंकि वह पहले तीन मैच चिली, ब्राजील और पेरू से हार गए थे. इसके बाद कोच ऑस्कर वाशिंगटन तबारेज ने रणनीति में बदलाव किया और मिडफील्ड में गति लाने के लिए अपनी अंडर-20 टीम के फेडरिको वालवेर्डे (रीयाल मैड्रिड) और रोड्रिगो बेंटानकर (जुवेंटस) को लाए और इससे सप्लाई लाइन बेहतर हो जाने से उरुग्वे की टीम में जान आ गई. इससे यह तो लगता है कि ग्रुप की बाकी टीमों में उसे रोकने का माद्दा नहीं है. पर फुटबॉल में उलटफेर की संभावनाएं हमेशा रहती हैं.

ब्राजील फुटबॉल टीम

ब्राजील फुटबॉल टीम

मिस्र की जहां तक बात है तो उसके पास मोहम्मद सालाह के रूप में तुरुप का इक्का है, जो अकेले दम एक-दो मैच जिता सकता है. यह माना जा रहा है कि उन्हें यदि साथी खिलाड़ियों का सहयोग मिल गया तो उसकी नॉकआउट चरण में स्थान बनाने की मुराद पूरी हो सकती है. इस टीम के पास मोहम्मद इलनेरी और अब्दल्ला सैद के रूप में उम्दा मिडील्डर भी हैं. यह जोड़ी सालाह के लिए गेंद आगे रखकर अपना नाम जीत दर्ज कराने का माद्दा तो रखती ही है. हेक्टर कूपर की अगुआई वाला डिफेंस भी अच्छा है. इसकी मजबूती इससे समझी जा सकती है कि उन्होंने खेले पिछले 32 मैचों में से सिर्फ दो में ही एक से ज्यादा गोल खाए हैं. पर टीम के लिए चिंता की बात इलनेरी की फिटनेस है. आर्सेनल और वेस्टहम के बीच खेले गए मैच में चोटिल होने की वजह से उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाया गया था. पर वह टखने की चोट से उबर गए हैं.

मेजबान रूस टीम की दिक्कत यह है कि उन्हें प्रतियोगात्मक मैच खेलने को नहीं मिले हैं और वह दोस्ताना मैच खेलकर ही तैयारी करने में व्यस्त रही है. कोकोरिन की अनुपस्थिति को एलेक्सी मीरानचुक को लाकर भरा गया है. वह स्पेन और फ्रांस पर जीत पाने के दौरान गोल जमा चुके हैं. कोच चेरचोसोव ने टीम को एकजुट करने का भरसक प्रयास किया है. लेकिन टीम पर बेरेजुत्सकी बंधुओं के संन्यास लेने से आई रिक्तता को पूरी तरह से भरा नहीं जा सका है.

रूस की फुटबॉल टीम

रूस की फुटबॉल टीम

दूसरी तरफ सऊदी अरब ने जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ दमदार प्रदर्शन करके क्वालीफाई किया है. लेकिन उसकी तैयारी अवरोधों से भरी है. टीम को क्वालीफाई कराने में अहम भूमिका निभाने वाले कोच बर्ट वान विज्क को सऊदी फुटबॉल फेडरेशन ने हटा दिया. अर्जेंटीनी कोच एडगाडरे बौजा तो पांच मैच तक ही जुड़े रह सके. पिछले पांच माह से टीम के साथ कोच पीज्जी की सबसे बड़ी दिक्कत टीम को अंतरराष्ट्रीय अनुभव नहीं दिला सकना है. यह कमी अखरने वाले परिणाम दे सकती है.

कार्यक्रम :

14 जून : रूस बनाम सऊदी अरब

15 जून : मिस्र बनाम उरुग्वे

19 जून : रूस बनाम मिस्र

20 जून : उरुग्वे बनाम सऊदी अरब

25 जून : उरुग्वे बनाम रूस और सऊदी अरब बनाम मिस्र

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