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FIFA World Cup 2018 : मोरक्को में है स्पेन और पुर्तगाल की नाक में दम करने का माद्दा

ग्रुप बी में यूरोपीय चैंपियन पुर्तगाल और 2010 की विश्व चैंपियन स्पेन शामिल हैं. ग्रुप की इन दो मजबूत टीमों को मोरक्को तगड़ी चुनौती देने की क्षमता रखती है

Manoj Chaturvedi Updated On: Jun 18, 2018 12:00 PM IST

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FIFA World Cup 2018 : मोरक्को में है स्पेन और पुर्तगाल की नाक में दम करने का माद्दा

ग्रुप बी- स्पेन, पुर्तगाल, मोरक्को और ईरान

फीफा विश्व कप 2018 के मुश्किल ग्रुपों में शुमार है ग्रुप बी. इसमें यूरोपीय चैंपियन पुर्तगाल और 2010 की विश्व चैंपियन स्पेन शामिल हैं. ग्रुप की इन दो मजबूत टीमों को मोरक्को तगड़ी चुनौती देने की क्षमता रखती है. वह भले ही 1998 के बाद पहली बार भाग ले रही है पर उसका खेल देखने लायक होगा. वैसे स्पेन और पुर्तगाल को ही इस ग्रुप से नॉकआउट दौर में स्थान बनाने वाली टीमें माना जा रहा है. दिलचस्प यह है इन दोनों दिग्गज टीमों को पहले मैच में ही टकराना है. इसके परिणाम से पहले दिन ही साफ हो जाना है कि कौन सी टीम ग्रुप में नंबर एक बनने जा रही है.

ये हैं ग्रुप के स्टार खिलाड़ी

क्रिस्टियानो रोनाल्डो (पुर्तगाल) : इस खिलाड़ी की शख्सियत से कौन फुटबॉलप्रेमी वाकिफ नहीं होगा. उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलरों में गिना जाता है. उन्होंने अपने देश के लिए 2003 से लेकर अब तक 149 मैच खेलकर 81 गोल जमाए हैं. रोनाल्डो आजकल अच्छी फॉर्म में हैं और उन्होंने 2017-18 के सत्र में ला लीगा में 27 मैच खेलकर 26 गोल जमाए हैं. वह मैच का रुख पलटने वाले खिलाड़ी हैं.

क्रिस्टियानो रोनाल्डो

क्रिस्टियानो रोनाल्डो

आंद्रेस इनिएस्टा (स्पेन) : यह सही है कि स्पेन के लिए 124 मैच खेलकर 13 गोल ही इनिएस्ता ने जमाए हैं. पर वह बहुत ही दर्शनीय अंदाज में गोल जमाने वाले हैं. सही मायनों में उनकी भूमिका गोल जमाने में मदद करना है. स्पेन ने 2010 में नीदरलैंड्स को हराकर जब खिताब जीता था तो फाइनल का इकलौता गोल जमाने वाले आंद्रेस इनिएस्ता ही थे. स्पेन के कप्तान का कहना है कि मैच में इनिएस्ता ने यदि एक गोल जमाने के लिए एक अच्छा पास भी दे दिया तो टीम का जलवा बन जाएगा.

सरदार अजमौन (ईरान) : इस खिलाड़ी ने अपने व्यक्तिगत कौशल से ईरान को तमाम सफलताएं दिलाई हैं. इस 22 वर्षीय फारवर्ड ने 2015 के एशिया कप में गोल जमाने की क्षमता का शानदार  प्रदर्शन किया था. वह ईरान के लिए अंतराष्ट्रीय मैचों में 22 गोल जमा चुके हैं. उन्होंने क्वालीफाइंग दौर में 11 गोल जमाए हैं.

करीम अल अहमदी (मोरक्को) : करीम नीदरलैंड्स में जन्मे और उसके लिए यूथ फुटबॉल विश्व कप में खेल चुके हैं. लेकिन मोरक्को टीम में शामिल होने के बाद टीम के स्तंभ बन गए हैं. वह दो साल एस्टोन विला में खेलने के बाद फेयेनूर्ड क्लब से खेल रहे हैं.

बी ग्रुप की टीमों का इतिहास

स्पेन को 2010 में विश्व कप जीतने का गौरव हासिल है. उसने 1934 से भाग लेना शुरू किया और इसके बाद पांच विश्व कप को छोड़कर हमेशा एक्शन में नजर आई है. हम यदि इसके हाल के सालों के विश्व कप प्रदर्शन की बात करें तो वह 2002 में क्वार्टर फाइनल, 2006 प्रीक्वार्टर फाइनल और 2014 में ग्रुप चरण तक ही चुनौती पेश कर सकी है. वहीं, पुर्तगाल ने 1966 में पहली बार भाग लिया और तीसरा स्थान प्राप्त किया और यह आज भी उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. इसके बाद वह 1986 में ही क्वालीफाई कर सकी. वह 2002 के बाद से लगातार भाग ले रहे हैं और 2006 में चौथा स्थान प्राप्त किया. मोरक्को भाग तो पांचवीं बार ले रही है पर 1998 के बाद पहली बार खेलेगी. वह अब तक सिर्फ एक बार 1986 में राउंड ऑफ 16 में स्थान बना सकी है. इस साल उसने पुर्तगाल को 3-1 से हराया था. वह 1998 में स्कॉटलैंड को भी फतह कर चुकी है. ईरान भी पांचवीं बार भाग ले रहा है. लेकिन एशिया की इस दिग्गज टीम को विश्व कप में गंभीर चुनौती के रूप में नहीं लिया गया है. 1998 में फ्रांस में हुए विश्व कप में अमेरिका पर 2-1 से जीत ही उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.

किसके दावे में कितना दम

स्पेन के पहले 2014 में विश्व कप और फिर 2016 में यूरोपीय खिताब की रक्षा नहीं कर पाने पर यह माना जाने लगा कि वहां की फुटबॉल में गिरावट का दौर शुरू हो गया है. इसकी वजह उनकी टिकी-टाका शैली में पहले विपक्षी टीमें जवाबी हमले के लिए दरार नहीं बना पातीं थीं. पर अब टीमों ने इसकी काट निकाल ली और उसका ही परिणाम है कि टीम हारने लगीं.

स्पेन की फुटबॉल टीम

स्पेन की फुटबॉल टीम

लेकिन हूलन लोपे तेयी के कोच बनने पर टीम की किस्मत एकदम से बदल गई और उन्होंने क्वालीफाइंग अभियान अजेय रहकर चलाया. उन्होंने इस दौरान नौ मैच जीते और एक ड्रॉ खेला. वैसे भी गोल पर डेविड डि गिया और डिफेंस में सर्गियो रामोस और गेराल्ड पिक्यू की मौजूदगी में आसानी से गोल पड़ना संभव नहीं है. यह टीम खिताब की मजबूत दावेदार के तौर पर जाएगी.

पुर्तगाल टीम के पास क्रिस्टियानो रोनाल्डो के रूप में एक नगीना है. वह अपने बूते पर ही टीम को जिताने का माद्दा रखते हैं. इस टीम की ताकत मिडफील्ड है. इसमें विरनार्ड, जोआ मोटिन्हो, विलियम कारवल्हो और विलियम नेविस जैसे दिग्गज शामिल हैं. ये मिडफील्डर रोनाल्डो का गोल जमाने में सहयोग कर सके तो टीम का अगले दौर में जाना तय है. पर पुर्तगाल को मोरक्को के खिलाफ जीत पाने का भरसक प्रयास करना होगा, अन्यथा अभियान थम भी सकता है.

ईरान की टीम

ईरान की टीम

ईरान की टीम मजबूत डिफेंस के लिए जानी जाती है. उनका प्रयास होता है कि सामने वाली टीम को गोल जमाने से रोककर हताश किया जाए और जवाबी हमला बोलकर विजय प्राप्त की जाए. ईरान की आगे जाने की संभावनाएं भले ही कम हों पर वह उलटफेर करके दूसरों का मजा जरूर किरकिरा कर सकती है. वहीं, मोरक्को के कोच हर्व रेनार्ड यदि अपने खिलाड़ियों को अपना बेस्ट देने के लिए प्रेरित करने में सफल हो जाते हैं तो इस टीम का प्रदर्शन देखने लायक होगा. पिछले विश्व कप में अल्जीरिया ने अपना जिस तरह का प्रदर्शन किया था, उसे इस बार मोरक्को की टीम दोहरा सकती है. मोरक्को की टीम बचाव में महारथ रखने के बाद हमले भी तेजी से बनाती है. वह यदि अपनी रंगत में खेल सकी तो कुछ खास इस ग्रुप में जरूर देखने को मिल सकता है.

कार्यक्रम -

15 जून- मोरक्को बनाम ईरान, पुर्तगाल बनाम स्पेन

20 जून- पुर्तगाल बनाम मोरक्को, ईरान बनाम स्पेन

25 जून- ईरान बनाम पुर्तगाल, स्पेन बनाम मोरक्को

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