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लक्ष्य सेन कैसे बने दुनिया के नंबर वन जूनियर बैडमिंटन खिलाड़ी

लक्ष्य ने अब तक जूनियर सिंगल्स टाइटल में अंडर 13, 17 और अंडर 19 का खिताब जीता है.

Shirish Nadkarni Updated On: Feb 09, 2017 03:14 PM IST

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लक्ष्य सेन कैसे बने दुनिया के नंबर वन जूनियर बैडमिंटन खिलाड़ी

46 साल पहले साल 1971 के राष्ट्रीय चैंपियनशिप में बेंगलुरु के 16 साल के लड़के ने जूनियर बॉयज सिंगल्स और मेंस सिंगल्स का टाइटल अपने नाम कर इतिहास रचा था. इस खिलाड़ी का नाम था प्रकाश पादुकोण. प्रकाश पादुकोण ने अपने भाई के साथ मिलकर बॉयज डबल्स भी जीता था.

तब प्रकाश पादुकोण नेशनल गेम्स के फाइनल में पहुंचने वाले सबसे युवा खिलाड़ी थे. उन्होंने सुरेश गोयल और रोमेन घोष जैसे बड़े खिलाड़ियों को पीछे छोड़ा था. अब उनका यह रिकॉर्ड टूट चुका है. हालांकि सबसे कम उम्र में नेशनल चैंपियन बनने का उनका रिकॉर्ड अब तक कायम है.

उत्तराखंड के अल्मोड़ा के 15 साल के एक लड़के ने अपने गुरु प्रकाश पादुकोण को पीछे छोड़ते हुए सबसे कम उम्र में नेशनल गेम्स के फाइनल में पहुंचने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. इस लड़के का नाम है लक्ष्य सेन.

शानदार प्रदर्शन के बाद फाइनल में हारे

लक्ष्य 16 अगस्त को अपना सोलहवां जन्मदिन मनाएंगे. हालांकि फाइनल में लक्ष्य को 24 साल के पूर्व चैंपियन सौरभ वर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा. वह 13-21, 21-21 से हार गए.

सेमीफाइनल में सौरभ वर्मा ने अपने छोटे भाई और पिछली बार के चैंपियन समीर वर्मा को हराया था. लक्ष्य सेन फाइनल मुकाबले में आसानी से हार गए. जो प्रदर्शन उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में किया, वह इसे फाइनल में नहीं बरकरार नहीं रख पाए.

Lakshya Sen22

लक्ष्य के नाम का ही मतलब है टारगेट. लक्ष्य ने हाल में ही सैयद मोदी इंटरनेशनल ग्रांप्री गोल्ड टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले हर्षिल दानी को कड़ी टक्कर दी.

15 साल के लक्ष्य हाल ही में जूनियर वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर वन पर पहुंचे हैं. प्री क्वार्टर फाइनल में उनका प्रदर्शन उनकी काबिलियत को दर्शाता है. प्री क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उन्होंने एचएस प्रणॉय को आखिरी गेम में 21-19 से हराया. ये जीत इसलिए भी खास है क्योंकि प्रणॉय ने प्रीमियर बैडमिंटन लीग में लगातार 7 मैच जीते है और इनमें उन्होंने कई विदेशी खिलाड़ियों को भी पटखनी दी थी.

क्वार्टर फाइनल में लक्ष्य की भिड़ंत एक और शानदार खिलाड़ी डेनियल फरीद से हुई. डेनियन ने अपने पिछले मैच में रोहित यादव को हराया था. क्वार्टर फाइनल के इस कड़े मुकाबले में लक्ष्य ने डेनियल को 21-11, 19-21, 21-19 से हराया.

इतने कड़े और रोमांचक मुकाबले के बाद लक्ष्य को उसी दिन शाम हर्षिल दानी के खिलाफ मैच खेलना था. लेकिन लक्ष्य ने अपनी शारीरिक फिटनेस दिखाते हुए आसानी से अपना मैच जीता.

विरासत में मिला खेल

इसमे कोई दो राय नहीं कि लक्ष्य के खून में ही बैडमिंटन है. लक्ष्य के पिता डीके सेन भारत के जाने माने बैडमिंटन कोच हैं. लक्ष्य के दादाजी की भी फिटनेस काफी अच्छी थी. अल्मोड़ा के रहने वाले लक्ष्य को ऊंचाई पर रहने का भी फायदा हुआ, इस कारण उनके पैर काफी मजबूत हैं.

साल 2010 में लक्ष्य, जो उस समय 10 साल के भी नहीं थे, अपने पिता के साथ यूनियन बैंक ऑल इंडिया बैडमिंटन सब जूनियर बैडमिंटन टूर्नामेंट में जाते थे. उस समय उनके बड़े भाई चिराग उस टूर्नामेंट में खेलते थे.

ये टूर्नामेंट उभरते हुए और युवा खिलाड़ियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट है. इस टूर्नामेंट में दो बार के नेशनल चैंपियन विमल कुमार टैलेंट की परख करते हैं.

चिराग ने अंडर 13 का सिंगल्स टाइटल जीता और उनके पिता के पास अच्छा कारण था कि वह विमल कुमार को मना सके कि वह चिराग को ट्रेनिंग दें.

अपने पिता और भाई के साथ गए लक्ष्य सेन ने कहा कि मैं भी खेलना चाहता हूं. इसके बाद विमल कुमार ने लक्ष्य का ट्रायल लिया और दोनों भाइयों को ट्रेनिंग देने का फैसला किया.

प्रकाश पादुकोण से मिली ट्रेनिंग

लक्ष्य जब बेंगलुरु गए थे तो उनकी उम्र केवल साढ़े नौ साल की थी. विमल कुमार ने बताया कि जब मैंने लक्ष्य को पहली बार खेलते हुए देखा तो मैंने प्रकाश पादुकोण से ट्रेनिंग देने को कहा. लक्ष्य को पहली बार खेलते देख प्रकाश काफी प्रभावित हुए.

विमल कुमार ने बताया कि मुझे और प्रकाश को जो बात सबसे अच्छी लगी वो है जीत की भूख. अगर वह मैच हार जाता था तो कोने में जाकर रोने लगता था. जब वह अंडर 11 के फाइनल मुकाबले में हार गया थो तो भी उसके आंखों में आंसू थे.

कुछ साल बीतने के बाद लक्ष्य ने अपनी आदत में सुधार किया और अब वह शांत रहता था. अगर अब वह मैच हार जाते हैं तो अपनी गलतियों में सुधार करते हैं और उसे सुधार करने के लिए कड़ी प्रैक्टिस करते हैं. इसलिए बहुत कम होता है कि वह अपनी गलतियों को दोहराएं.

Lakshya

लक्ष्य अब तक जूनियर सिंगल टाइटल में अंडर 13, अंडर 17, अंडर 19 का खिताब अपने नाम कर चुके हैं. इसके साथ ही उन्होंने कई इंटरनेशनल मेडल जीते हैं.

विमल कुमार ने लक्ष्य की तारीफ करते हुए कहा कि लक्ष्य बिना देखे स्मैश नहीं करता, वह उसी तरह खेलता है जिस तरह प्रकाश अपने समय में खेला करते थे. लक्ष्य नेट पर काफी मजबूत है जिसके कारण वह रैली को आसानी से कंट्रोल कर सकता है. वह अपने खेल पर काफी मेहनत करता है.

प्रकाश की तरह लक्ष्य भी अच्छी गति से स्मैश करता है. प्रकाश इंटरनेशनल लेवल पर इसलिए सफल हुए क्योंकि वह रैली में अच्छा खेल दिखाते थे. लक्ष्य रैली करते समय थोड़ी ताकत का इस्तेमाल करते हैं और अपनी स्मैश में हॉफ स्मैश और फास्ट ड्र\प का मिक्स करते रहते हैं.

विमल कुमार ने बताया कि अगर प्रकाश से लक्ष्य की तुलना करे तो वह नेट पर थोड़े स्लो हैं. क्योंकि उनके पैरों को थोड़ा और मजबूत बनाने की जरुरत है. लेकिन उनका फुटवर्क बिल्कुल साफ है. उनका फुटवर्क महान खिलाड़ी सैयद मोदी की याद दिलाता है.

पिछले एक साल में लक्ष्य की हाइट भी 3 इंच बढ़ी है. मौजूदा समय में उनकी हाइट 5’ 10” है. लक्ष्य के भाई की हाइट उनसे कम है. अभी लक्ष्य के पास समय कि उनकी हाइट कुछ और बढ़े, 6 फिट की हाइट बैंडमिटन खिलाड़ी के लिए अच्छी होती है.

सीनियर लेवल पर लक्ष्य ने पहली बार साल 2016 में इटानगर में हुई ऑल इंडिया सीनियर चैंपियनशिप में अपनी पहचान बनाई. उन्होने सैट्स इंडिया इंटरनेशनल सीरीज का खिताब जीत कर सीनियर लेवल पर अपना पहला खिताब जीता

लक्ष्य सेन के पास प्रकाश पादुकोण और विमल कुमार के रूप में अच्छे मार्गदर्शक है जो इस युवा खिलाड़ी को निखारने का काम कर रहे हैं.

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