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CWG 2018: कॉमनवेल्थ में गोल्ड का सूखा खत्म करने उतरेंगी पीवी सिंधु

पीवी सिंधु को 2014 कॉमनवेल्थ खेलों में ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा था, इस बार उनकी नजर मेडल का रंग बदलने पर होगी

FP Staff Updated On: Mar 25, 2018 05:49 PM IST

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CWG 2018: कॉमनवेल्थ में गोल्ड का सूखा खत्म करने उतरेंगी पीवी सिंधु

नाम- पीवी सिंधु

खेल- बैडमिंटन

उम्र- 22 साल

कैटेगरी- सिंगल्स

आठ साल की उम्र में रैकेट थामने वाली पीवी सिंधु आज भारत की स्टार शटलर हैं. सालों की अपनी मेहनत और कोच पुलेला गोपीचंद के मार्गदर्शन में आज वह उस मुकाम पर पहुंची हैॆ जहां वो आज हैॆ. सिंधु के माता पिता खेल के मैदान से जुड़े थे, लेकिन बैडमिंटन से नहीं. वह दोनों वॉलीबॉल प्लेयर थे. लेकिन साल 2001 में पुलेला गोपीचंद को ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप में खेलता देख उन्होंने बैडमिंटन को चुना.

2014 कॉमनवेल्थ खेलों में जीता था ब्रॉन्ज

भारत के लिए पीवी सिंधु कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीय शटलरों में सबसे बड़ी उम्मीद होंगी. पिछली बार उन्हें ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा था. इस बार वह मेडल का रंग बदलने के इरादे से उतरेंगी. आठ साल की उम्र में गोपीचंद को बैडमिंटन खेलते देख उन्होंने मां बाप की तरह वॉलीबॉल की जगह रैकेट थामने का फैसला किया. साल 2013 में उन्होंने अपना पहला ग्रांप्री अपने नाम किया.  2016 के रियो ओलिंपिक में केरोलिना मारिन से हारने से पहले उन्होंने जू यिंग, ओकोहारा जैसे दिग्गजों को मात दी थी. सिल्वर मेडल जीतने वाली सिंधु के लिए यह बड़ा मौका है.  भले ही वह पुरुष खिलाड़ी थे, जिन्होंने इस सत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए बैडमिंटन में नई इबारत लिखी. लेकिन पीवी सिंधु ने एक बार फिर नई उपलब्धियां हासिल कीं.

HONG KONG, NOVEMBER 27: Pusarla V. Sindhu competes against Tai Tzu Ying of Taiwan during the Women's Singles Final of YONEX-SUNRISE Hong Kong Open Badminton Championships 2016 at the Hong Kong Coliseum on 27 November 2016 in Hong Kong, Hong Kong. (Photo by Power Sport Images/Getty Images))

22 साल सिंधु देश की सबसे कामयाब महिला खिलाड़ी बन चुकी हैं. सिंधु ने इस साल अपने करियर की बेस्ट रैंकिंग नंबर दो हासिल की. उन्होंने तीन खिताब और तीन रजत पदक के साथ विश्व की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच अपना दावा पुख्ता किया.  2017 में सिंधु ने सैयद मोदी इंटरनेशनल, इंडियन ओपन और कोरिया ओपन में खिताबी जीत हासिल की. वह कोरिया ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं. उन्होंने वर्ल्ड सुपर सीरीज और विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया. वह हांगकांग ओपन में उपविजेता रहीं.

 

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