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CWG 2018 : पहले आर्थिक तंगी, फिर कोच का इस्तीफा, मुश्किलों से भरा रहा नीरज का सफर

अपनी प्राकृतिक ताकत के बूते महज 18 साल की उम्र में अंतराष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा और अब 20 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता

Nitesh Ojha Updated On: Apr 14, 2018 02:58 PM IST

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CWG 2018 : पहले आर्थिक तंगी, फिर कोच का इस्तीफा, मुश्किलों से भरा रहा नीरज का सफर

नीरज चोपड़ा ने 86.47 मीटर तक जैवलिन थ्रो कर गोल्ड मेडल जीत कर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को एथलेटिक्स प्रतिस्पर्धाओं का पहला गोल्ड मेडल दिला दिया है. इन खेलों में दस दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिर भारत ने गोल्ड मेडल हासिल कर ही लिया. नीरज ने हमेशा ही अपनी मुश्किलों को अपने इरादों से मात दी. गरीबी से लड़कर स्टेडियम पहुंचे तो कोच का साथ नहीं मिला. कोच के जाने के बाद तकनीक के सहारे  यू ट्यूब को गुरू बनाया लेकिन हार नहीं मानी.

कॉमनवेल्थ में जैविलन थ्रो की प्रतिस्पर्धा के अपने पहले ही प्रयास में नीरज 85.50 मीटर जैवलिन थ्रो करके पहले पायदान पर आ गए थे. जिसके बाद लगातार लीड को बरकरार रखते हुए उन्होंने चौथे प्रयास में 86.47 मीटर जैवलिन थ्रो किया. जो उनके सीज़न बेस्ट रहा इऔर करियर बेस्ट से सिर्फ 0.01 मीटर कम. इस प्रतिस्पर्धा में दूसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया के हेमिश पिकॉक रहे तो ब्रॉन्ज ग्रेनेडा के एंडरसन पीटर्स को मिला. यह दोनों ही प्रतियोगी नीरज से काफी पीछे रहे.

कभी नाम तक नहीं सुना था जिसका उसी खेल में रचा इतिहास

भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स का पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाले नीरज चोपड़ा का यह सफर कतई आसान नहीं रहा है. यह खुद-ब-खुद में संघर्ष और संकल्प की एक कहानी है. हरियाणा के पानीपत के एक किसान के बेटे नीरज एक समय पर उस खेल का नाम तक नहीं जानते थे जिसमें उन्होंने आज इतिहास रच दिया है.

खेल कूद के शौकीन नीरज चोपड़ा दोस्तों के साथ घूमते फिरते एक दिन पानीपत के शिवाजी स्टेडियम जा पहुंचे. वहां अपने कुछ सीनियर्स को जैवलिन थ्रो करते हुए देख, खुद ने भी भाला थाम लिया. पहली बार जैवलिन थ्रो करने वाले नीरज को उस दिन लगा कि यह खेल उनके लिए जिंदगी है. वह इसमें आगे बढ़ने के बारे में सोचने लगे, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार में जन्में ज्यादातर बच्चों के ख्वाब तो उनकी आंखों में ही मर जाते हैं.

आर्थिक तंगी का सामना प्राकृतिक ताकत के बूते किया

नीरज के लिए भी यह बहुत आसान तो नहीं था. वह जानते थे कि एक ज्वांइट परिवार में किसी एक व्यक्ति पर ज्यादा खर्च नहीं किया जा सकता. घर के आर्थिक हालात भी उनसे छिपे नहीं थे, लेकिन इन सब पहलुओं को दरकिनार करते हुए उन्होंने भाला थाम लिया. और अपनी प्राकृतिक ताकत के बूते पहले राष्ट्रीय स्तर पर कई मुकाबले जीते तो फिर महज 18 साल की उम्र में अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना और अपने देश का नाम दर्ज करवा दिया.

महज 18 साल की उम्र में अंडर 20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में रिकॉर्ड तोड़ते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल जीता. इसी के साथ किसी भी प्रतिस्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम करने वाले वह पहले भारतीय एथलीट बन गए.

कोच के इस्तीफे के बाद यू ट्यूब को बना लिया कोच

हालांकि नीरज के जैवलिन थ्रो में रिकॉर्ड रचने के बाद भारतीय जैवलिन थ्रो के कोच गैरी कॉलवर्ट्स ने संघ से विवाद के चलते अप्रैल 2017 में इस्तीफा दे दिया था. गैरी के जाने के बाद भारतीय जैवलिन थ्रो टीम के पास कई महीनों तक कोई कोच नहीं था. गैरी की ही कोचिंग में नीरज ने वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया था. उनके जाने के बाद नीरज नें यू-ट्यूब का सहारा लेते हुए अपनी ट्रेनिंग जारी रखी. हालांकि इस दौरान वह लंदन विश्व चैंपियनशिप में कोई खास प्रदर्शन नहीं कर सके थे.

खराब प्रदर्शन से जूझ रहे नीरज ने फिर तीन महीने जर्मनी में ट्रेनिंग ली. जिसके बाद भारत वापिस आ कर कोच ओवे होम की निगरानी में कोचिंग की. फिर कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार हिस्सा लेने पहुंचे. कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज से लोगों को अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद तो थी लेकिन उस उम्मीद को मेडल में तब्दील खुद उन्होंने किया.

90 मीटर क्लब में शामिल होने की काबिलियत

नीरज के पूर्व कोच गैरी का मानना था की नीरज में शानदार प्रतिभा है, और वह 90 मीटर क्लब में शामिल होने की काबिलियत रखता है. महज 20 साल के नीरज के सामने लंबा कैरियर है. ऐसे में वह गैरी की उम्मीद को असलियत में तब्दील कर सकते हैं. शायद इसी बहाने भारत को ओलिंपिक में मेडल मिल जाए.

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