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CWG 2018: इस वजह से महावीर फोगाट को बाहर करना पड़ा इंतजार, अंदर चल रहा था बेटी का 'दंगल'

फिल्म 'दंगल' की तरह जब उनकी बेटी करारा स्पोर्ट्स एंड लीजर सेंटर में अपना मुकाबला लड़ रही थी तब उन्हें बाहर इंतजार करना पड़ा

Updated On: Apr 13, 2018 12:39 PM IST

FP Staff

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CWG 2018: इस वजह से महावीर फोगाट को बाहर करना पड़ा इंतजार, अंदर चल रहा था बेटी का 'दंगल'

यहां उन्हें 'दंगल' फिल्म की तरह कमरे में बंद करने के लिए कोई असंतुष्ट कोच नहीं था, लेकिन महावीर फोगाट तब भी अपनी बेटी बबिता को गोल्ड कोस्ट में सिल्वर मेडल जीतते हुए नहीं देख पाए. दरअसल वह मुकाबला स्थल तक पहुंचने का टिकट ही हासिल नहीं कर पाए.

बेटी दंगल में थी और पिता बाहर टिकट का इंतजार कर रहे थे

इस दिग्गज कोच, जिनकी जीवनी पर फिल्म ‘दंगल’ बनी है, यहां मौजूदा चैंपियन बबिता (53 किग्रा) का मुकाबला देखने के लिए आये थे, लेकिन जब उनकी बेटी करारा स्पोर्ट्स एंड लीजर सेंटर में अपना मुकाबला लड़ रही थी तब उन्हें बाहर इंतजार करना पड़ा.

इस पूरे घटनाक्रम से दुखी बबिता ने कहा, ‘मेरे पिताजी पहली बार मेरा मुकाबला देखने के लिए आये थे, लेकिन मुझे दुख है कि सुबह से यहां होने के बावजूद वह टिकट हासिल नहीं कर पाए. एक खिलाड़ी दो टिकट का हकदार होता है लेकिन हमें वे भी नहीं दिए गए. मैंने अपनी तरफ से बहुत कोशिश की लेकिन उन्हें बाहर बैठना पड़ा।. यहां तक कि वह टीवी पर भी मुकाबला नहीं देख पाए.’

ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की मदद से अंदर पहुंचे फोगाट

महावीर फोगाट आखिर में तब अंदर पहुंच पाए जब ऑस्ट्रेलियाई कुश्ती टीम बबिता की मदद के लिए आगे आई और उन्होंने उसे दो टिकट दिए. बबिता ने कहा, ‘जब मैंने ऑस्ट्रेलियाई टीम से दो पास देने के लिए कहा तब वह अंदर आ पाए. ऑस्ट्रेलियाई टीम ने मेरी उन्हें एरेना तक लाने में मदद की. मैंने आईओए से लेकर दल प्रमुख तक हर किसी से मदद के लिए गुहार लगाई. मैं कल रात दस बजे तक गुहार लगाती रही हालांकि आज मेरा मुकाबला था और मुझे विश्राम करने की जरूरत थी.’

उन्होंने कहा, ‘इससे बहुत बुरा लगता है. मैंने दल प्रमुख सहित हर किसी से बात की थी.’ दल प्रमुख विक्रम सिसौदिया ने कहा कि पहलवानों के लिए जो टिकट थे उन्हें उनके कोच राजीव तोमर को दिया गया था और इन्हें बांटना उनकी जिम्मेदारी थी. उन्होंने कहा, ‘हमें कॉमनवेल्थ गेम्स महासंघ से जो टिकट मिले थे हमने उन्हें संबंधित कोच को दे दिया था. हमें कुश्ती के पांच टिकट मिले थे जो हमने तोमर को दे दिए थे. मुझे नहीं पता कि उसे टिकट क्यों नहीं मिल पाया. लगता है कि मांग काफी अधिक थी.’

एक खिलाड़ी के परिजनों को एक्रीडिएशन मिलता है तो दूसरे को भी मिले

बबिता से जब पूछा गया कि जब माता पिता को एक्रीडिएशन दिलाने की बात आती है तो क्या सभी खिलाड़ियों के साथ समान रवैया अपनाया जाना चाहिए, उन्होंने कहा, ‘पहली बार मेरे पिताजी इतनी दूर मेरा मुकाबला देखने के लिए आए थे. मुझे दुख है कि उन्हें इंतजार करना पड़ा.’ बबिता ने कहा, ‘मुझे इसकी परवाह नहीं कि उन्हें एक्रीडिएशन मिलता है या नहीं. मेरे लिए तो यह केवल एक टिकट का सवाल था. वह कम से कम मुकाबला तो देख सकते थे.’

उन्होंने शटलर साइना नेहवाल की अपने पिता को सभी क्षेत्रों में पहुंच रखने वाला एक्रीडिएशन नहीं देने पर खेलों से हटने की धमकी के संदर्भ में कहा, ‘लेकिन एक खिलाड़ी के माता पिता को एक्रीडिएशन मिलता है. तो दूसरों को भी मिलना चाहिए. केवल एक खिलाड़ी को ही यह सुविधा क्यों दी गई.’

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