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बेटा मुझे हारते हुए देखे, मैं यह नहीं चाहता: विकास

गोल्ड कोस्ट से लौटने पर फर्स्टपोस्ट हिंदी से बातचीत में बॉक्सर्स ने शेयर किए अपने अनुभव

Updated On: Apr 18, 2018 02:03 PM IST

Kiran Singh

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बेटा मुझे हारते हुए देखे, मैं यह नहीं चाहता: विकास
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गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाज अपना दमखम दिखाने में सफल रहे. भारत ने तीन गोल्ड, तीन सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज सहित कुल 9 मेडल अपने नाम किए. मैरीकॉम, विकास कृष्णा यादव, गौरव सोलंकी भले ही गोल्डन पंच लगाने में कामयाब रहे, लेकिन गोल्ड कोस्ट ने भारतीय मुक्केबाजी के आने वाले समय की एक झलक दिखा दी है.

इतिहास रचकर वापस स्वदेश लौटे भारतीय मुक्केबाजों का दिल्ली में स्वागत सम्मान किया गया . इस मौके पर बॉक्सिंग फैडरेशन आॅफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह समेत मैरीकॉम, विकास, गौरव, मनोज, सरिता देवी, अमित पंघाला, नमन तंवर आदि मुक्केबाज मौजूद थे. गोल्ड कोस्ट में अगर किसी मुक्केबाज ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है तो वह नमन तंवर. 19 साल के नमन ने भले ही ब्रॉन्ज जीता हो, लेकिन बिना गार्ड के रिंग में उतरने के उनके अंदाज ने सभी को प्रभावित किया है.

बिना गार्ड के सहज महसूस करते हैं नमन

पूछने पर नमन में बताया कि वह बिना गार्ड के ही सहज महसूस करते हैं. क्वार्टफाइनल तक बिना किसी डर में ओपन गार्ड के रिंग में उतरने वाले नमन की स्टाइल अखिल कुमार से काफी मिलती है. नमन के बताया कि वह अखिल से इस बारे में बात भी करते हैं और वह भी अक्सर नेचुरल गेम पर भी ध्यान देने को कहते हैं.

करीब साल पहले फिटनेस को ध्यान में रखते हुए बॉक्सिंग शुरू करने वाले नमन का कहना है कि गोल्ड कोस्ट में मेडल से अहम उनके लिए अनुभव है जो उन्होंने वहां से हासिल किया है और सेमीफाइनल बाउट में जो कमी रह गई थी, उसे अब वह सुधारेंगे.

एशियाड के बाद विकास करेंगे पेशेवर बॉक्सिंग की ओर रुख

वहीं विकास कृष्ण यादव ने बताया कि बाउट के दौरान वह अपने बेटे के बारे में सोच रहे थे,जो अपने पापा को हारते हुए नहीं देख सकता. आगे की योजनाओं पर विकास ने कहा कि वह छोटे टार्गेट लेकर चलते हैं . इसीलिए कॉमनवेल्थ के बाद अब उनका लक्ष्य एशियाड में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचना है. विकास के नाम अभी दो एशियाड मेडल हैं और उनकी नजर तीसरे मेडल पर है. गौरतलब है कि अभी तक कोई भी मुक्केबाज तीन बार एशियाड में मेडल में नहीं जीत पाया है. वहीं विकास ने बताया कि फैडरेशन से अनुमति मिलने पर एशियाड के बाद वह प्रो बॉक्सिंग की तरफ रुख करेंगे. इसी के साथ उन्होंने अपने रिटायरमेंट को लेकर भी संकेत दे दिया है. उनके अनुसार टोक्यो ओलिंपिक उनका आखिरी टूर्नामेंट होगा.

टेक्निक्स है गौरव की ताकत

अपने पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में ही गोल्ड जीतने वाले गौरव सोलंकी ने बताया कि भले ही सेमीफाइनल बाउट में विपक्षी उन पर हावी दिख रहा था, लेकिन उन्होंने टेक्निक्स से अंक बटोरे, उनका पूरा ध्यान टेक्निक्स पर ही था, फाइनल बाउट में भी उन्होंने इसी रणनीति का इस्तेमाल किया. मुकाबला खत्म होने के बाद जैसे ही रैफरी ने हाथ उटाया आंखों से आंसू निकल गए थे. गौरव ने बताया अब वह एशियाड को ध्यान में रखते हुए ट्रेनिंग करेंगे.

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