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CWG 2018: 'कमबैक्स' के नाम रहा है गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ

35 वर्ष और तीन बच्चों की मां मैरीकॉम ने गोल्डन पंच लगाया तो सुशील कुमार ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया

Neeraj Jha Updated On: Apr 14, 2018 07:15 PM IST

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CWG 2018: 'कमबैक्स' के नाम रहा है गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का प्रदर्शन अभी तक अच्छा रहा है. हालांकि भारत के लिए 2010 में जीते 38 गोल्ड मैडल को पार करना मुश्किल है लेकिन 2018 का प्रदर्शन भी अभी तक के कामनवेल्थ गेम्स में किए गए बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक है. इस पूरे हफ्ते में जो सबसे खास बात रही वो हो कमबैक्स की.  यानी जब लोगो ने ये कहना शुरू कर दिया थी इन खिलाडियों को अब रिटायरमेंट ले लेनी चाहिए, उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर इसका करारा जबाब दिया. जिन खिलाड़ियों को पिछले कुछ सालो में ये कहकर साइड कर दिया गया था की अब इनका समय समाप्त हो गया है और नए खिलाडियों को मौका मिलना चाहिए, उन खिलाड़ियों ने इस बार अपने प्रदर्शन से साबित कर दिया की उनकी गिनती ऐसे ही महान खिलाडियों में नहीं होती. चाहे वो तीन बच्चों की माँ मैरी कॉम हो या फिर 35 वर्षीय सुशील कुमार. जीत के साथ इन दोनों ने जिस तरह से मैदान में वापसी की है उससे खेल प्रेमियों की उमीदें और भी बढ़ गई है.

सुपर मॉम - मैरी कॉम

खेल की दुनिया जब आप 35 की उम्र के पड़ाव को पार करते है तो वो ज्यादातर खिलाड़ियों के लिए वो करियर का ढलान होता है जहाँ सिर्फ रिटायरमेंट की बात होती है - खासकर महिलाओं के लिए. मैरी कॉम तीन बच्चों की माँ है, राज्यसभा की सांसद भी और उसके बाद भी अगर वो रिंग में वापसी कर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतती हैं तो इस से बड़ी क्या बात होगी.

मैरी ने जिस तरह से 45-48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में आयरलैंड की क्रिस्टीना ओ'हारा को 5-0 से हराया है वो ना सिर्फ काबिले-तारीफ है बल्कि इस जीत ने खेलप्रेमियों के दिल और दिमाग में अगले ओलिंपिक गेम्स में उम्मीद की बीज भी बो दी है.  यहाँ ये बता दूं की मैरी पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में शिरकत कर रहीं थीं.

जीत का श्रेय फिटनेस को देती हैं मैरीकॉम

पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन मैरी ने 2012 के लंदन ओलंपिक्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था लेकिन 2016  रियो ओलंपिक के लिए वो क्वालिफाई नहीं कर पाई थी. उसके बाद ऐसा लगने लगा था की उनकी करियर खत्म हो चुका है और शायद ही उनकी रिंग में फिर कभी वापसी होगी. 2 साल के अवकाश के बाद मैरी ने रिंग में वापसी की और पांच महीने पहले ही उन्होंने एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप का गोल्ड देश में वापस लाने का सपना पूरा किया और ये दिखा दिया कि मन में अगर सही लगन हो तो कुछ भी हासिल करना मुश्किल नहीं है.

Boxing - Gold Coast 2018 Commonwealth Games - Women's 45-48kg Final Bout - Oxenford Studios - Gold Coast, Australia - April 14, 2018. MC Mery Kom of India (red) v Kristina O'Hara of Northern Ireland (blue). REUTERS/Athit Perawongmetha - UP1EE4E06DCWV

कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतने के बाद मैरी ने बताया कि उनकी जीत की वजह उनकी फिटनेस है. उन्होंने कहा- मैं हमेशा से यह जानती थी कि अगर मैं फिट रहूंगी तो गोल्ड मेडल मेरे कब्जे में रहेगा. एशियन महिला मुक्केबाज़ी प्रतियोगिता में 5 गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतने वाली मैरी ने जीत के बाद कहा की अगर वो इसी तरह फिट रही तो टोक्यो ओलंपिक्स में भी शिरकत कर सकती है.

सुशील कुमार की वापसी

कुश्ती के 74 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्स बोथा को हराने के बाद सुशील कुमार कॉमनवेल्थ गेम्स में तीन गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए. सुशील ने इस मुकाबले में अपना एक भी अंक नहीं गवांया और अंतिम मुकाबले में तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर सिर्फ 80 सेकंड में जीत हासिल कर ली.

Wrestling - Gold Coast 2018 Commonwealth Games - Men's Freestyle 74 kg - 1/8 Final - Carrara Sports Arena 1 - Gold Coast, Australia - April 12, 2018. Jevon Balfour of Canada and Kumar Sushil of India compete. REUTERS/Athit Perawongmetha - UP1EE4C08J5QQ

तीन साल के अंतराल के बाद 2017 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में सक्रिय कुश्ती के लिए वापसी करने वाले सुशील ने अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को आसानी से हरा दिया. उन्होंने 2010 में 66 किलोग्राम वर्ग में और 2014 में 74 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था.

सुशील की इस वापसी ने उनके कई विरोधियों को जबाब दे दिया है हालांकि जीतने के बाद उन्होंने कहा की वो किसी को कुछ साबित नहीं करना चाहते है. जब तक वो मुकाबला कर सकते है, वो तब तक खेल में हिस्सा लेते रहेंगे.

विवादों से भरा रहा है करियर 

सुशील का करियर भी विवादों से भरा रहा है. डोपिंग विवाद की वजह से वो और 74 किलोग्राम वर्ग में उनके प्रतिद्वंदी नरसिंह यादव को पिछले ओलंपिक्स से हाथ धोना पड़ा था. हालांकि नरसिंह पर अभी भी डोपिंग का बन लगा हुआ है लेकिन सुशील ने पिछले साल नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर वापसी की.

इसके अलावा उनके और प्रवीण राणा के बीच का विवाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा है. दिल्ली के केडी जाधव स्टेडियम में कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए क्वालिफाइंग मुक़ाबलों में 74 किलोग्राम में पहलवान सुशील कुमार अविजित रहते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए टिकट कटाने में सफल रहे थे. उन्होंने फाइनल में पहलवान जीतेंद्र कुमार को और सेमीफाइनल में प्रवीण राणा को हराया था. सेमीफाइनल मुकाबले के बाद सुशील और राणा के समर्थकों के बीच विवाद हो गया था.

sushil

कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 के लिए क्वालिफाई करने में नाकाम रहे पहलवान प्रवीण राणा के साथ हुई मारपीट के मामले में एफआईआर भी दर्ज कर ली गई और ऐसा लगने लगा की शायद सुशील हिस्सा नहीं ले पाएंगे. लेकिन सुशील ने इन मुश्किलों को पार कर गोल्ड कोस्ट के लिए पूरी तैयारियों में जुटे रहे.  हद तो तब हो गई जब कामनवेल्थ खिलाडियों के लिस्ट में उनका नाम ही नहीं शामिल था. हालांकि बाद में बताया की वो एक वेबसाइट प्रोग्रामिंग की गलती थी.  लेकिन इस जीत ने कुश्ती प्रेमियों को एक नई उम्मीद दे दी है.

सुशील ओलिंपिक में दो मेडल जीतने वाले एकमात्र भारतीय हैं। उन्होंने 2008 ओलिंपिक में बीजिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था और 2012 में लंदन ओलिंपिक में सिल्वर भी जीता था.

 

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