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CWG 2018: 1930 में हुई थी कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत, जानिए कैसा रहा है इतिहास

ओंटारियो के हैमिल्टन शहर में आयोजित किए गए थे पहले खेल, जिसमें ग्यारह देशों के 400 एथलीटों ने हिस्सा लिया था

Updated On: Apr 01, 2018 02:39 PM IST

FP Staff

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CWG 2018: 1930 में हुई थी कॉमनवेल्थ गेम्स की शुरुआत, जानिए कैसा रहा है इतिहास
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अंग्रेज अधिकारी रिवरेंड एश्ले कूपर ने ब्रिटिश हुकूमत वाले देशों में खेलों के एक महाआयोजन का विचार दिया था. उनका मानना था कि इससे इन देशों में खेल की भावना बढ़ेगी साथ ही लोगों के मन में ब्रिटिश हुकूमत के प्रति अच्छी भावना आएगी. इसके बाद सन 1928 में कनाडियाई मूल के एथलीट बॉबी रॉबिनसन को पहले राष्ट्रमंडल खेलों यानी कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. कनाडा इन खेलों का गवाह बना था. यह खेल सन 1930 में ओंटारियो के हैमिल्टन शहर में आयोजित किए गए थे, जिसमें ग्यारह देशों के 400 एथलीटों ने हिस्सा लिया था. जिन्होंने छह खेलों की 59 प्रतियोगिताओं में अपना दमखम दिखाया था.

विश्व युद्ध के दौरान नहीं हुआ कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन

इसके बाद हर चौथे वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया जाने लगा था. सिर्फ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान 1942 और 1946 में इनका आयोजन नहीं किया जा सका था. इन खेलों को कई नामों से जाना जाता था,  जैसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स, ब्रिटिश एम्पायर व कॉमनवेल्थ गेम्स और  ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेल. सन 1978 से इन खेलों को राष्ट्रमंडल खेलों का स्थायी नाम दिया गया. सिर्फ एक प्रतिस्पर्धी खेलों का आयोजन रहने वाला यह समारोह कुआलालंपुर में आयोजित खेलों के बाद काफी बदल गया. 1998 में मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में क्रिकेट, हॉकी तथा नेटबॉल जैसे अन्य प्रसिद्ध खेलों को भी इसमें पहली बार शामिल किया गया.

ब्रिटिश एम्पायर गेम्स बन गया कॉमनवेल्थ गेम्स

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आई बाधा के बाद वर्ष 1950 में राष्ट्रमंडल खेल फिर शुरू किए गए. 1930 से 1950 तक इसे कॉमनवेल्थ यानी राष्ट्रमंडल खेलों के बजाए ब्रिटिश एम्पायर गेम्स यानी ब्रितानी साम्राज्य खेल कहा जाता था. इसी प्रकार 1954 से 1966 तक राष्ट्रमंडल खेलों को ब्रितानी साम्राज्य और राष्ट्रमंडल खेल कहा गया और 1970 और 1974 में इसका नाम ब्रिटिश राष्ट्रमंडल खेल रहा. सन 1978 में जाकर कहीं इस रंगारंग खेल प्रतियोगिता का नाम राष्ट्रमंडल खेल पड़ा और तब से आज तक यह इसी नाम से आयोजित हो रहा है.

राष्ट्रमंडल खेलों की ख़ास बात ये रही है कि उसने शुरू से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले दोस्ताना खेल करवाने का दावा किया है. शुरू में इसमें सिर्फ एकल मुक़ाबले होते थे और ये सिलसिला 1930 से लेकर 1994 के विक्टोरिया में हुए खेल तक जारी रहा. वर्ष 1998 में मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में टीम खेलों को भी शामिल किया गया. पहली बार 50 ओवरों का क्रिकेट, हॉकी (महिला, पुरुष) नेटबॉल (महिला) और रग्बी (पुरुष) को शामिल किया गया. वर्ष 2006 में पहली बार बस्केटबॉल राष्ट्रमंडल खेलों का हिस्सा बना.

विवाद और बहिष्कार के साये में कॉमनवेल्थ गेम्स

राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार विवाद का साया 1978 में दिखाई दिया. न्यूजीलैंड द्वारा दक्षिण अफ्रीका से खेल को लेकर करार किया था, इससे नाइजीरिया नाराज हो गया था और उसने सबसे पहले इन खेलों का बहिष्कार किया. इसके बाद 1986 राष्ट्रमंडल खेलों में महज 26 देशों ने अपनी टीमें भेजी. इसका कारण इंग्लैंड की थैचर सरकार के व्यवहार व दक्षिण अफ्रीका से किए गए समझौते थे, इस बार अफ्रीका, एशिया व कैरेबियन देशो के 59 में से 32 देशों ने इसका विरोध कर खेलों का बहिष्कार किया था. दक्षिण अफ्रीका के कारण 1974, 1982 व 1990 में भी इसका असर दिखा. राष्ट्रमंडल खेलों के 88 साल के इतिहास में 20 संस्करण आयोजित हो चुके है. इसमें अब तक 90 से अधिक देश भाग ले चुके हैं.

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