Co Sponsor
In association with
In association with
S M L

अलविदा 2017 : अब नहीं दिखेगी बोल्ट, फराह, नेहरा, अाफरीदी और हिंगिस की चमक

ट्रैक से लेकर क्रिकेट पिच तक कई दिग्गजों ने छोड़ा खेल का साथ

Riya Kasana Riya Kasana Updated On: Dec 25, 2017 05:32 PM IST

0
अलविदा 2017 : अब नहीं दिखेगी बोल्ट, फराह, नेहरा, अाफरीदी और हिंगिस की चमक

साल 2017 में बहुत से शानदार करियरों का अंत हुआ. ट्रैक से लेकर क्रिकेट पिच तक दिग्गजों ने खेल का साथ छोड़ा. कुछ ने खेल का साथ छोड़ा तो कुछ ने जिंदगी का. आईए आपको बताते हैं इस साल किन खिलाड़ियों ने अपने करियर को अलविदा कहा

ट्रैक के बादशाह यूसेन बोल्ट

इस साल लंदन में आइएएएफ विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो महान एथलीट्स ने अपने करियर का समापन किया. बोल्ट ने पहली बार 2008  बीजिंग ओलिंपिक में 100, 200 मीटर दौड़ और 4 गुणा 100 मीटर रिले में गोल्ड अपने नाम किया था. बोल्ट ने लंदन में ही नहीं, बल्कि 2016 रियो डि जेनेरियो में भी ऐसा कर दिखाया. वह लगातार तीन ओलिंपिक में ट्रिपल-ट्रिपल यानी लगातार तीन-तीन गोल्ड मेडल जीतने का सपना पूरा करने में भी सफल रहे. हालांकि बाद में उनका बीजिंग का चार गुणा, सौ मीटर रिले का गोल्ड एक साथी एथलीट के डोप में पकड़े जाने पर छिन गया. विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी वह 11 गोल्ड जीत चुके हैं. अपनी आखिरी रेस में बोल्ट को हार का सामना पड़ा. लेकिन बेशक वह ट्रैक के बादशाह रहेंगे.

लंबी दूरी के गोल्डन एथलीट मो फराह

लंदन में आईएसएफ विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ट्रैक के जादूगर मो फराह ने करियर को अलविदा कहा. अपने आखिरी टूर्नामेंट में उन्होंने 10000 मीटर में गोल्ड मेडल हासिल किया, लेकिन 5000 मीटर में वह चूक गए. उन्होंने कभी खुद को महान नहीं माना. लेकिन उनके रिकॉर्ड उन्हें महान साबित करने के लिए काफी है. फिनलैंड के लासे विरेन अकेले ऐसे एथलीट हैं, जिन्होंने मो फराह से पहले  ओलिंपिक में डबल डबल किया है. मो फराह ने दो बार  2012 और 2016 में 10000 मीटर और 5000 मीटर में डबल गोल्ड अपने नाम किए.

आशीष नेहरा

आशीष नेहरा ने एक नवंबर, 2017 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलकर क्रिकेट करियर को अलविदा कहा. मोहम्मद अजहरुद्दीन के नेतृत्व में 1999 में भारत की ओर से अपना पहला मैच खेलने वाले नेहरा ने 17 टेस्ट, 120 वनडे और 27 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं. उन्होंने टेस्ट मैचों में 44, वनडे में 157 वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय में 34 विकेट लिए है. "कम बैक किंग” नाम से मशहूर नेहरा ने पूरे करियर में कुल 12 सर्जरी कराईं, लेकिन उसके बावजूद वह अपनी मेहनत और जुनून की बदौलत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करीब 19 साल टिके रहे. विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी ने उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए उनके आखिरी मैच से पहले अपनी तरफ से एक फेयरवेल ट्रॉफी दी.

आखिर विदा हुए शाहिद अाफरीदी

इस साल फरवरी महीने में पाकिस्तान के चर्चित ऑलराउंडर शाहिद अाफरीदी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी. इसके साथ ही शाहिद अाफरीदी के 21 साल लंबे इंटरनेशनल क्रिकेट पर विराम लग गया. अफरीदी इससे पहले भी संन्यास की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन वह हर बार वापसी कर लेते थे. अाफरीदी की गिनती लंबे और तेज तर्रार शॉट्स खेलने वाले बल्लेबाजों में होती है. अफरीदी टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले चुके थे. अाफरीदी ने 1996 में अपने दूसरे ही मैच में 37 गेंदों पर शतक जमाकर दुनिया को अपना मुरीद बना लिया था. एकदिवसीय मैचों में ये एक ऐसा रिकॉर्ड था, जो 17 साल बाद टूटा. शाहिद ने 27 टेस्ट मैचों में 1176 रन बनाए और 48 विकेट लिए. 398 वनडे मैचों में 8064 रन के साथ उन्होंने 395 विकेट हासिल किए.

तीसरी बार हिंगिस ने कहा अलविदा

पूर्व नंबर वन स्विस टेनिस स्टार मार्टिना हिंगिस ने अक्टूबर में तीसरी और आखिरी बार इस साल  अपने संन्यास की घोषणा कर दी. 37 साल की स्विस खिलाड़ी इससे पहले दो बार संन्यास ले चुकी थीं. 2007 में कोकीन के लिए किए गए टेस्ट में पॉजीटिव पाए जाने के बाद उन्होंने खेल छोड़ने की घोषणा की थी. सिंगापुर में डब्ल्यूटीए फाइनल्स उनका अंतिम टूर्नामेंट साबित हुआ. 15 साल की उम्र में ग्रैंड स्लैम जीतने के बाद हिंगिस ने 1997 में सभी चारों ग्रैंड स्लैम अपने नाम कर करियर स्लैम के साथ रिकॉर्ड बनाया था. हिंगिस सबसे कम उम्र में नंबर वन बनने वाली महिला खिलाड़ी भी बनी थी. अपने करियर में हिंगिस ने कुल सात सिंगल्स ग्रैंड स्लैम जीते. जबकि 13 बार डबल्स में बाजी मारी. वापसी के बाद मिक्स्ड डबल्स में भी हिंगिस का जलवा रहा और उन्होंने कुल सात ग्रैंड स्लैम अपने नाम किए.

जीत के साथ रिंग छोड़ा मेवेदर ने

फ्लॉयड मेवेदर भी उन दिग्गाजों में से रहे, जिन्होंने इस साल अपने करियर को अलविदा कह दिया. अगस्त महीने में  अपने आखिरी और साल के सबसे बड़े मुकाबले में 29 साल के आइरिश कोनॉर मैक्ग्रेगोर को हराकर उन्होंने 50वीं जीत हासिल की. हाई प्रोफाइल मुकाबले का रिजल्ट 10 राउंड में निकला. इतिहास की ये सबसे महंगी फाइट लास वेगास के टी-मोबाइल एरीना में खेली गई. 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन मेवेदर ने इस जीत के साथ ही प्रोफेशनल बॉक्सिंग से अपने संन्यास की घोषणा की थी.

... जिनकी हैं यादें शेष 

ओलिंपिक में भाग लेने वाले पहले तैराक थे शमशेर 

भारत के पहले ओलिंपिक तैराक शमशेर खान का रविवार को आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 87 वर्ष के थे. 1956 मेलबर्न ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खान ने गुलमुर में रेपल्ले के पास स्थित एक छोटे से गांव इस्लामपुर के अपने घर में अंतिम सांस ली. 1956 के ओलिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले शमशेर पहले तैराक थे. ब्रेस्टस्ट्रोक और बटरफ्लाई में आज तक उनका रिकॉर्ड कोई भारतीय तैराक नहीं तोड़ पाया है. उन्होंने 200 मीटर बटरफ्लाई में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर मेलबर्न ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया था. शमशेर खान गोल्ड मेडल जीतने के प्रति आश्वस्त थे, लेकिन वह इस मुकाबले में चौथे स्थान पर रहे थे.

कैंसर से हारीं टेनिस खिलाड़ी याना नोवोत्ना

टेनिस खिलाड़ी याना नोवोत्ना का कैंसर के चलते 19 नवंबर को चेक गणराज्य में निधन हो गया. नोवोत्ना ने 1998 में फ्रांस की नताली तौजियात को फाइनल में हराकर विंबलडन खिताब जीता था. इसके अलावा वह दो बार और विंबलडन फाइनल में पहुंची थीं, लेकिन 1993 में स्टेफी ग्राफ और 1997 में मार्टिना हिंगिस से हार गई थीं. नोवात्ना ने इसके अलावा 1989 और 1990 में हमवतन हेलेना सुकोवा के साथ, 1995 में अरांत्सा सांचेज विकारियो और 1998 में हिंगिस के साथ मिलकर विंबलडन डबल्स खिताब भी जीते थे. उन्होंने सभी चारों ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट में डबल्स खिताब जीते थे.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
AUTO EXPO 2018: MARUTI SUZUKI की नई SWIFT का इंतजार हुआ खत्म

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi