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जन्मदिन विशेष : ... जब दारा सिंह ने 200 किलो वजनी किंग कांग को फेंक दिया था रिंग से बाहर

दारा सिंह ने लगभग 15-20 मिनट तक चले मुकाबले के बाद किंग कांग को अपने सिर के ऊपर उठाकर रिंग से बाहर फेंक दिया था

Sachin Shankar Updated On: Nov 19, 2017 07:17 PM IST

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जन्मदिन विशेष : ... जब दारा सिंह ने 200 किलो वजनी किंग कांग को फेंक दिया था रिंग से बाहर

दारा सिंह को हर कोई अपनी-अपनी तरह से याद करता है. किसी के लिए वह दुनिया के सबसे बड़े पहलवान थे. कोई उनको फिल्मों और टीवी सीरियलों में अभिनय के लिए जानता है. बाद में उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और राज्य सभा सदस्य बने. लेकिन दारा सिंह का नाम जेहन में आते ही सबसे पहले उनकी विश्व चैंपियन किंग कांग के साथ कुश्ती की बात आती है.

भले ही उस मुकाबले को आज करीब 61 साल गुजर चुके हैं, लेकिन हम भारतीय उस किस्से को आज भी गर्व के साथ सुनाते हैं. दरअसल इस मुकाबले ने दारा सिंह को रातों रात सुपर स्टार का दर्जा दिला दिया था. इस जीत से रुस्तमे हिंद दारा सिंह ने कुश्ती (अमेरिकी शैली की यानी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ स्टाइल) के इतिहास में ऐसी मिसाल बना दी, जिसे बाद में भी कोई पार नहीं कर पाया.

दारा सिंह और किंग कांग के बीच सोनीपत के गांव भटगांव में 12 दिसंबर, 1956 का यह मुकाबला हुआ था. तब दारा सिंह की उम्र 28 साल थी और उनका वजन 130 किलो था. जबकि उनके ऑस्ट्रेलियाई चैलेंजर किंग कांग करीब 200 किलो वजनी थे. किंग कांग का असली नाम एमिली काजा था. दारा सिंह ने लगभग 15-20 मिनट तक चले मुकाबले के बाद किंग कांग को अपने सिर के ऊपर उठाकर रिंग से बाहर फेंक दिया था. कहा जाता हैै कि उस समय दर्शकों में तत्कालीन सोवियत यूनियन के प्रधानमंत्री निकोलाई बुल्गानिन भी मौजूद थे. भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू भी यह मुकाबला देखने आने वाले थे, लेकिन किन्हीं कारणोंवश वह नहीं जा पाए.

बचपन से ही था कुश्ती का शौक

दारा सिंह बचपन से ही कुश्ती के प्रति आकर्षित रहे, क्योंकि उनका कद लंबा और शरीर बलिष्ठ था.. किशोरावस्था तक वह कई घंटे कसरत किया करते थे. दूध, मक्खन और बादाम उनका मुख्य आहार हुआ करता था. 1947 में वह सिंगापुर चले गए. वहां उन्होंने तरलोक सिंह को हराकर मलेशियाई कुश्ती चैंपियनशिप जीती. इस जीत के बाद उनकी विजय यात्रा की शुरुआत हो गई. पेशेवर पहलवान के तौर उन्होंने काफी देशों का दौरा किया और अपना लोहा मनवाया. 1952 में वह भारत आ गए और यहां भी चैंपियन बने. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रमंडल देशों का दौरा किया. उन्होंने 1959 में कलकत्ता में कनाडा के जॉर्ज गारडियांका और न्यूजीलैंड के जॉन डिसिल्वा को शिकस्त देकर राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप अपने नाम कर ली. फिर बारी आई विश्व चैंपियन अमेरिका के लाऊ थेज की. मई, 1968 में थेज को हराकर दारा सिंह विश्व चैंपियन बने.

500 से ज्यादा कुश्ती जीतीं

दारा सिंह ने अपने करियर में करीब 500 कुश्तियां लड़ी और सभी में जीत दर्ज की. 1983 में 55 वर्ष की उम्र में उन्होंने कुश्ती से संन्यास लिया और जीवन भर अजेय रहे. उन्होंने करीब 36 साल तक अखाड़े में अपना दम-खम दिखाया. खास बात यह है कि दारा सिंह ने ज्यादातर बड़े पहलवानों को उनके घर में जाकर शिकस्त दी. अपराजेय रहने के लिए उनका नाम आब्र्जवर न्यूज लेटर हॉल ऑफ फेम में दर्ज है.

भारतीय फिल्मों के पहले 'ही मैन'

पहले कामयाब पहलवान और फिर हीरो बने दारा सिंह को भारत का पहला एक्शन हीरो और देश का पहला ही मैन कहा जाता है. अपने चौड़े कंधों और संतुलित शरीर के कारण वह आसानी से एक्शन हीरो के रोल के लिए स्वीकार कर लिए गए. उनकी पहली फिल्म संगदिल 1952 में आई थी. उन्होंने कुल 115 फिल्मों में अभिनय किया. दारा सिंह को नई पीढ़ी टीवी सीरियल रामायण सीरीयल के हनुमान की वजह से जानती है. उन्होंने हाल के बरसों में जब वी मेट में करीना कपूर के दादा का रोल किया था. उससे पहले कल हो न हो में भी उनका यादगार रोल था.

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