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सैयद मोदी जैसा दोस्त और शख्स मिलना मुश्किल... 30 साल पहले देश ने खोया था ये अनमोल हीरा

30 साल पहले आज ही के दिन लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम के गेट पर कर दी गई थी इस मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी की गोली मार कर हत्या

anand khare Updated On: Jul 28, 2018 10:51 AM IST

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सैयद मोदी जैसा दोस्त और शख्स मिलना मुश्किल... 30 साल पहले देश ने खोया था ये अनमोल हीरा

नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ स्पोट्र्स (एनआइएस) पटियाला में 28 जुलाई, 1988 को सभी गतिविधियां वैसी ही चल रहीं थीं जैसी रोज चलती थीं. लेकिन शाम के बाद मन काफी बैचेन था. समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों है. डिनर के बाद हम सभी सोने चले गए. लेकिन रात को करीब तीन बजे किसी ने जोर से हास्टल के कमरे का दरवाजा खड़खड़ाया तो अनहोनी की आशंका ने फिर सिर उठा लिया. दरवाजा खोला तो सामने पुलिस खड़ी थी. कुछ देर तक तो माजरा समझ में नहीं आया. पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने पूछा कि क्या आप ही आनंद खरे हैं? जवाब हां में दिया तो उन्होंने जो बताया वो वाकई स्तब्ध करने वाला था. उन्होंने बताया कि लखनऊ में शाम को केडी सिंह बाबू स्टेडियम के गेट पर मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी की गोली मार कर हत्या कर दी गई.

अगले दिन अखबार में सैयद मोदी की हत्या की खबर सुर्खियों में थी. एनआइएस पटियाला में प्रतिदिन सुबह छह बजे होने वाली होने वाली एसेंबली के बाद बताया गया कि मुझे शीघ्र लखनऊ जाना होगा जहां मुझसे पूछताछ की जाएगी. मैंने कहा कि मैं तो आज ही गोरखपुर सैयद मोदी के अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहा हूं उसके बाद मैं किसी भी तरह की जांच में सहयोग के लिए तैयार हूं. गोरखपुर स्टेडियम में सैयद मोदी को कफन में लिपटा देखकर भी यह यकीन कर पाना मुश्किल था कि वो नहीं रहे.

Syed_Modi

उनके साथ कितनी यादें जुड़ी थीं. सैयद मोदी 1982 में गोरखपुर से लखनऊ आए तो मैं बतौर जूनियर खिलाड़ी वहीं पर अभ्यास करता था. मैं बेहद खुश था कि मुझे इतने बड़े खिलाड़ी के साथ अभ्यास करने का मौका मिनेगा. वह जल्दी ही सबके साथ घुल मिल गए. मेरे साथ तो उनका लगाव इतना ज्यादा हो गया था कि या तो मैं उनके घर पर होता था या वह मेरे. रात में सात-आठ घंटे की नींद के अलावा हमारा ज्यादातर समय साथ गुजरता था. उनको वो स्कूटर (यूएमआर 2616) भी मैंने खरीदवाया था जिस पर वो हादसे वाले दिन स्टेडियम से अपने घर वापस जा रहे थे. ये स्कूटर नंबर मुझे आज भी याद है. ग्रे कलर का था वो स्कूटर. इसीलिए इस घटना के बाद जब खोज हुई कि आखिर उनके दोस्तों में कौन सबसे करीबी हैं तो सबने मेरा नाम लिया. क्योंकि पुलिस को सैयद मोदी की हत्या के पीछे मोटिव समझ में नहीं आ रहा था. उसे लग रहा था कि शायद किसी करीबी से कोई ऐसा सिरा मिल जाए जिससे केस की कड़ियां सुलझतीं जाएं. लेकिन हम लोग खुद सदमें में थे कि आखिर सैयद मोदी की किससे दुश्मनी हो सकती है.   

घमंड से कोसों दूर थे मोदी

सैयद मोदी जैसा दोस्त और शख्स मिलना मुश्किल है. 1982 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने और उसी साल एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता होने के बावजूद घमंड उन्हें छू भी नहीं गया था. 1980 से लेकर वह लगातार आठ बार नेशनल चैंपियन भी बने. वह बेहद सहज और विनम्र थे. प्रतियोगिताओं में भाग लेने जाने पर उन्हें बड़ा खिलाड़ी होने के नाते रहने और खाने की सुविधा मिलती थी. मैं भी उन्हीं के कमरे में रहता था. बल्कि वह तो साथ रहने के लिए जोर देते थे. विदेश में खेलने जाने पर वह सबके लिए कुछ ना कुछ जरूर लाते थे.     

सैयद मोदी की हत्या के समय एनआइएस पटियाला में मैं कोचिंग का कोर्स कर रहा था और 18 अगस्त से वहीं तीन माह लंबा नेशनल कैंप लगने वाला था, जिसमें सैयद मोदी को भी आना था. सैयद मोदी ने कहा था कि वो कैंप में आएंगे तो फिर साथ रहेंगे. लेकिन वो दिन नहीं आया. लखनऊ आने के बाद मैंने भी लंबे समय तक रैकेट को हाथ नहीं लगाया. मोदी के ना रहने के बाद जीवन में खालीपन पैदा हो गया था. 1990 में खेल कोटे में वायु दूत में नौकरी लगने के बाद मैं दिल्ली चला गया. लेकिन मोदी तो भुलाना आसान नहीं था. उनकी हत्या का मामला सुलझाने के लिए केस पुलिस से सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया. सीबीआई पड़ताल के दौरान हम दोनों की तमाम तस्वीरें और कैसेट ले गई जो आज तक मुझे वापस नहीं मिले. मेरे पास मोदी की कोई फोटो नहीं है जिसे मैं उनकी यादगार के तौर पर संजो कर रख सकूं.       

आज उन्हें गुजरे हुए 30 साल का वक्त जरूर गुजर गया है, लेकिन मुझे उनका एक वादा अभी तक याद है जो मेरे कोचिंग का कोर्स करने के लिए पटियाला जाने से पहले उन्होंने किया था. सैयद मोदी की दिली ख्वाहिश ती कि वह और मैं अपने खिलाड़ी जीवन गुजारने के बाद लखनऊ में एक बैडमिंटन अकादमी खोलें और बच्चों को तैयार करें. मैं कोच तो बन गया, लेकिन हमारा एक साथ अकादमी चलाने का सपना पूरा नहीं हो सका.  

 

(लेखक पूर्व जूनियर राष्ट्रीय खिलाड़ी और इस समय उत्तर प्रदेश बैडमिंटन संघ के संयुक्त सचिव हैं)

(फर्स्टपोस्ट हिंदी के सचिन शंकर के साथ बातचीत पर आधारित)

(फोटो साभार- यूट्यूब और ट्विटर)

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