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यह लड़ाई बैडमिंटन को कहां ले जाएगी

भारतीय बैडमिंटन में खिलाड़ी हिट, लेकिन अधिकारी...

Updated On: Jan 10, 2017 02:59 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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यह लड़ाई बैडमिंटन को कहां ले जाएगी

पुरुषों में छह खिलाड़ी दुनिया के टॉप 50 में हैं. महिलाओं में दो खिलाड़ी टॉप टेन में हैं. इस आंकड़े को सुपर पावर बनते देश के लिए ही जाना जाएगा. बैडमिंटन खिलाड़ी कोर्ट पर धमाका कर रहे हैं. लेकिन क्या खिलाड़ियों से अधिकारियों की दुनिया भी इतनी ही अच्छी दिख रही है?

रविवार की शाम करीब सात बजे विजय सिन्हा की तरफ से एक मेल किया गया. विजय सिन्हा, जो खुद को भारतीय बैडमिंटन संघ का सचिव मानते रहे हैं. लेकिन कुछ समय पहले से उन्हें संघ में किनारे किया जा चुका था. इस मेल की कॉपी hindi.firstpost.com के पास है. मेल में विजय सिन्हा ने कई आरोप लगाए और खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए उनका जवाब दिया.

सोमवार की रात एक प्रेस रिलीज के जरिए बैडमिंटन संघ ने विजय सिन्हा को हटाए जाने की घोषणा कर दी. बेंगलुरु में एक्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग में सिन्हा हो हटाए जाने का फैसला किया गया. इसके लिए अध्यक्ष अखिलेश दासगुप्ता ने अपनी ‘आपातकालीन शक्तियों’ का इस्तेमाल किया. उनके फैसले को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया. अनूप नारंग को विजय सिन्हा की जगह दे दी गई.

प्रेस रिलीज में सिन्हा पर हटाए जाने की वजहों में बताया गया कि उन पर ज्यूडिशियल जांच  चल रही हैं. सिन्हा ने फर्स्टपोस्ट से बातचीत में इन आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि उनके रहते अध्यक्ष अपनी मनमानी नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्हें हटाया गया है. उन्होंने कहा कि खुद को हटाए जाने को लेकर वो कानूनी राय ले रहे हैं. उन्होंने बेंगलुरु में लिए गए फैसले को गैर-कानूनी करार दिया.

बैडमिंटन संघ में ये सब उस साल हो रहा है, जब भारत ने पहली बार ओलिंपिक में रजत पदक जीता है. सिन्हा मानते हैं कि भारत की बैडमिंटन में कामयाबी सिर्फ एक आदमी (पुलेला गोपीचंद) की वजह से है. गोपीचंद की मेहनत का श्रेय लेने की होड़ लगी हुई है.

विजय सिन्हा ने अपने मेल में आरोप लगाया है कि पिछले 12-13 महीने में पंजाब नेशनल बैंक की ब्रांच से 36 से ज्यादा करोड़ रुपये निकाले गए हैं. एक समय काफी करीब माने जाने वाले अखिलेश दासगुप्ता और विजय सिन्हा के बीच तनातनी लंबे समय से चल रही है. अखिलेश दासगुप्ता ने उनसे सारे अधिकार छीन लिए थे. इसकी वजह बताई गई थी कि सिन्हा की तबीयत ठीक नहीं है.

संविधान में मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए अखिलेश दासगुप्ता ने उनकी जगह अनूप नारंग को सारे अधिकार दे दिए थे. यहां तक कि बैंक अकाउंट ऑपरेट करने के अधिकार भी नारंग के पास थे. सिन्हा इस साल जनवरी में बीमार थे, लेकिन उनका कहना है कि एक-डेढ़ महीने में वो पूरी तरह स्वस्थ हो गए थे, जिसके बाद अपना कामकाज संभाल सकते थे.

दासगुप्ता और सिन्हा दोनों ने एक-दूसरे पर ‘अपनों को’ गलत तरीके से मदद करने का आरोप लगाया है. सिन्हा के बेटे निशांत सिन्हा की एकेडमी को लेकर काफी विवाद रहा है. दूसरी तरफ सिन्हा ने दासगुप्ता पर अपने बेटे विराज सागर दास और सोना दास को गलत तरीके से प्रमोट करने का आरोप लगाया है.

ये सारे आरोप उस वक्त लग रहे हैं जब प्रीमियर बैडमिंटन लीग चल रही है. लीग को लेकर भी हमेशा से विवाद रहा है. पहले इंडियन बैडमिंटन लीग के नाम से होने वाली लीग का नाम बदला गया. लीग के आयोजन को लेकर विवाद अदालत तक गया है. ये सब तब हो रहा है, जब भारत में बैडमिंटन के दबदबे की बात की जा रही है. खिलाड़ी तो यकीनन अपना काम कर रहे हैं. लेकिन क्या अधिकारी सही उदाहरण रख रहे हैं, जिससे खेल को प्रमोट किया जाए?

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