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69 मेडल@69 कहानियां: गरीबी के बावजूद तूर ने आखिर क्‍यों चुना महंगा खेल शॉट पुट?

कहानी 12: एशियन गेम्स में 20.75 मीटर दूर गोला फेंककर स्वर्ण पदक जीता मोगा के 23 वर्षीय तेजिंदर पाल सिंह तूर ने

Updated On: Sep 03, 2018 03:08 PM IST

FP Staff

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69 मेडल@69 कहानियां: गरीबी के बावजूद तूर ने आखिर क्‍यों चुना महंगा खेल शॉट पुट?
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पंजाब के मोगा के 23 वर्षीय लंबे-चौड़े एथलीट तेजिंदर पाल सिंह तूर की दिलचस्पी कभी भी शॉट पुट के खेल में आने की नहीं थी. वह मैदान में उतरे जरूर थे, लेकिन किसी और खेल के लिए. तेजिंदर पाल बचपन में क्रिकेटर बनना चाहते थे. लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. पिता के कहने पर उन्होंने शॉट पुट खेलना शुरू किया और ये उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा निर्णय साबित हुआ. उन्होंने जकार्ता एशियन गेम्स में 20.75 मीटर दूर गोला फेंककर स्वर्ण पदक जीता.

हालांकि इस खेल में आने से पहले उन्हें कड़ी चुनौतियां का सामना भी करना पड़ा. इस खेल के लिए जिन जूतों का इस्तेमाल होता है उनकी कीमत की शुरुआत भी 10,000 रुपए से होती है और ये जूते दो महीने से ज्यादा चल नहीं पाते. किसी किसान परिवार के लिए शॉट पुट के खेल के लिए जरूरी साजों-सामान जुटाना आसान काम नहीं था, फिर इस खेल के लिए जिम और उच्च क्वालिटी के सप्लीमेंट्स की भी जरूरत होती है. ऊपर से उनके पिता (करम सिंह) कैंसर पीड़ित भी थे. इसके बावजूद उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे. उनके पिता 2015 से कैंसर की जंग लड़ रहे हैं.

India's Tajinderpal Toor competes in the final of the men's shot put athletics event during the 2018 Asian Games in Jakarta on August 25, 2018. / AFP PHOTO / Martin BUREAU

तेजिंदर पाल अपने जुनून के प्रति मजबूत बने रहे और उनके इन सभी त्यागों का फल उन्हें स्वर्ण पदक के रूप में मिला. तेजिंदर पाल ने पांचवें प्रयास में 20.75 मीटर दूर गोला फेंकर एशियन गेम्स के नए रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ा जो ओम प्रकाश करहाना के नाम था.

तेजिंदर पाल ने स्वर्ण पदक जीतने के बाद कहा, ‘मेरे दिमाग में बस एक ही चीज थी. मैं 21 मीटर पार करना चाहता था. मैंने स्वर्ण पदक के बारे में नहीं सोचा था. लेकिन मैं इससे खुश हूं. मैं पिछले दो-तीन साल से राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ने की कोशिश कर रहा था और यह हो पाया और वह भी मीट रिकॉर्ड के साथ.’

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनके और उनके परिवार के लिए बहुत मायने रखती है. तेजिंदर ने कहा, ‘यह पदक मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इसके लिए मैंने काफी त्याग किए हैं. पिछले दो साल से मेरे पिता कैंसर से जूझ रहे हैं. मेरे परिवार ने कभी भी मेरा ध्यान भंग नहीं होने दिया. उन्होंने मुझे सपना पूरा करने की ओर बढ़ाए रखा. मेरे परिवार और दोस्तों ने काफी त्याग किए हैं और आज इन सबका फल मिल गया.’

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