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69 मेडल@69 कहानियां: एशियन गेम्स में भी जारी रहा पीवी सिंधु का ऐतिहासिक सफर

कहानी 63 : सिल्वर मेडल हासिल कर सिंधु ने जकार्ता में वो कर दिखाया जो इससे पहले कोई भी भारतीय खिलाड़ी कभी भी नहीं कर सका था

Updated On: Sep 16, 2018 06:16 PM IST

FP Staff

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69 मेडल@69 कहानियां: एशियन गेम्स में भी जारी रहा पीवी सिंधु का ऐतिहासिक सफर

23 साल की शटलर पीवी सिंधु को शायद भारतीय बैडमिंटन के इतिहास के पन्नों को फिर लिखवाने की आदत पड़ चुकी है. दो साल पहले रियो ओलिंपिक्स में सिल्वर मेडल हासिल करके इतिहास रचने वाली पीवी सिंधु ने सोमवार को जकार्ता में वो कर दिखाया जो इससे पहले कोई भी भारतीय खिलाड़ी कभी भी नहीं कर सका था.

सिंधु को बैडमिंटन के महिला सिंगल्स के खिताबी मुकाबले में वर्ल्ड नंबर वन ताइ जू यिंग से सीधे सेटों में हार का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद वह इतिहास रचने में कामयाब रहीं. वह एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बन गईं हैं. भारतीय उम्मीदों का बोझ कंधे पर लिए कोर्ट में उतरी सिंधु को पहले गेम में 13-21 से हार मिली.

लांकि दूसरे गेम में उन्होंने विपक्षी खिलाड़ी को कड़ी टक्कर दी, लेकिन पार नहीं पा सकीं. इस गेम में उन्हें 16-21 से हार का सामना करना पड़ा. बता दें कि सोमवार को ताइ जू यिंग से ही हारकर साइना नेहवाल को ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा था. हालांकि सायना नेहवाल भी ब्रॉन्ज मेडल हासिल करने में तो कामयाब रही, लेकिन असल इतिहास तो सिंधु ने ही रचा है.

बैडमिंटन को पहली बार 1962 के एशियाड में शामिल किया गया था. वह एशियाड भी जकार्ता में ही आयोजित हुआ था. तब से लेकर 2014 के इंचियोन एशियाड तक भारतीय बैडमिंटन का कोई भी शटलर ब्रॉन्ज मेडल से आगे नहीं बढ़ सका. 1982 में दिल्ली में आयोजित हुए एशियाड मे भारत के सैयद मोदी ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था और उसके बाद से कोई भी भारतीय सिंगल्स में मेडल भी हासिल नहीं कर सका. इंचियोन एशियाड तक भारत ने एशियाड के इतिहास में बैडमिंटन के कुल आठ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए थे.

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