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69 मेडल@69 कहानियां: पिता की मौत भी नहीं तोड़ पाई अनस का हौंसला, उनके डर पर की फतह हासिल

कहानी 27: पिता भी एथलीट थे, लेकिन सफलता न मिलने के कारण सेल्समैन बन गए और वह नहीं चाहते थे कि असन खिलाड़ी बने

Updated On: Sep 04, 2018 04:47 PM IST

FP Staff

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69 मेडल@69 कहानियां: पिता की मौत भी नहीं तोड़ पाई अनस का हौंसला, उनके डर पर की फतह हासिल
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इसी साल गोल्‍ड कोस्‍ट में हुए कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में मात्र 0.02 सेकंड के अंतर से मेडल से चूकने वाले मोहम्‍मद अनस ने उस खालीपन को इंडोनेशिया में तीन सिल्‍वर मेडल से भरा. मेंस 400 मीटर के अलावा अनस मिक्‍स्‍ड 4*400 मीटर रिले और मेंस 4*400 रिले का भी सिल्‍वर अपने नाम किया. यहां अनस जिस भी इवेंट के लिए मैदान पर उतरे, खाली हाथ मैदान से बाहर नहीं आए, लेकिन एक ही जगह तीन बार पोडियम तक पहुंचने का सफर उनका भी बाकी कुछ खिलाडि़यों की तरह रहा. पिता की मौत ने उन्‍हें बड़ा झटका दिया और वह अपने खेल से दूर हो.

मोहम्मद अनस को खेल विरासत में मिला. अनस की मां शीना खुद स्कूल के जमाने में खेल-कूद में बेहद रूची रखती थीं, तो अनस के पिता खुद एक एथलीट थे. हालांकि सफलता न मिलने पर उन्होंने खेल को छोड़ परिवार को पालने के लिए सेल्समैन की नौकरी पकड़ ली.

पिता की मौत के बाद अनस की मां ने परिवार को संभाला

हालांकि अनस को खेलों में जाते देख उनके पिता खुश नहीं थे. इसके पीछे शायद संघर्षों के बाद न मिलने वाली सफलता होगी या फिर उनके व्यक्तिगत तौर पर खेलों में विफल होने का कारण. हालांकि उनकी मां शीना ने हमेशा उनको खेलने के लिए प्रोत्साहित किया. दिल का दौरा पड़ने के कारण पिता की मौत हो गई. जिसके बाद परिवार बिखर गया था. ऐसे तंगी के दौर में भी अनस की मां शीना ने उन्हें खेलने से नहीं रोका. पिता की मौत के समय अनस 10वीं में पढ़ते थे. उस समय पर अनस भी खेल को छोड़कर परिवार संभालने में लग सकते थे, लेकिन उनकी मां ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया. तब उन्होंने खेल को छोड़ने की जगह कोच की सलाह पर खेल बदल जरूर लिया. दरअसल अनस शुरुआत में लॉन्ग जंपर थे, लेकिन उनके कोच अंसार की सलाह पर उन्होंने ट्रैक रेस में कदम रखा. इस फैसले ने उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल दी.

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