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69 मेडल@69 कहानियां: बचपन में कमजोर समझे जाने वाले अमित कैसे बने 'शेर दिल' मेडलिस्ट!

कहानी 3: अमित समय से पहले पैदा हो गए थे इसी कारण वह बेहद कमजोर थे पर उनके मुक्कों का दम देखकर इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है

Updated On: Sep 02, 2018 03:38 PM IST

FP Staff

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एशियन गेम्स में ओलिपिंक चैंपियन पर घूंसे बरसाने वाले भारतीय बॉक्सर अमित पंघाल ने देश के लिए 49 किलो वर्ग में पहला गोल्ड मेडल जीता. अमित के दमदार प्रदर्शन को देखकर यह अंदाजा लगाना शायद मुश्किल है कि बचपन में अमित को कमजोर मानकर उनका मजाक उड़ाया जाता था.

अमित पंघाल हरियाणा के रोहतक ज़िले के मायना गांव से आते हैं. उनके पिता एक किसान हैं, जबकि उनके बड़े भाई अजय पंघाल सेना में हैं. इंडियन एक्सप्रेस में खबी छपर के मुताबिक उनकी मां ने बताया कि अमित समय से पहले पैदा हो गए थे. इसी कारण वह बेहद कमजोर थे. उनकी मां दिन-रात बस इसी कोशिश में रहती थी कि किसी तरह अमित का वजन बढ़ जाए. जब वह स्कूल में पहुंचे तो अक्सर गांव के बड़े लड़को के साथ उनकी लड़ाई होती रहती थी. कमतजार होने के बावजूद अमित डरते नहीं थे, तब ही उनके परिवार को एहसास हुआ कि उन्हें भले ही लगता रहा हो लेकिन अमित कमजोर नहीं है.

Jakarta: India's Amit Panghal (in blue) gestures after defeating Uzbekistan's Hasanboy Dusmatov during the Men's light fly (46-49kg) boxing final bout at the 18th Asian Games 2018 in Jakarta, Indonesia on Saturday, Sept 1, 2018.(PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI9_1_2018_000022B)

साल 2008 में उन्होंने बॉक्सिंग की शुरुआत की थी. अमित के चाचा गांव में बच्चों को बॉक्सिंग की ट्रेनिंग देते थे. यहां ट्रेनिंग के लिए उनके भाई अजय भी जाते थे. अमित शुरूआत में यहां बॉक्सिंग सीखने के लिए नहीं जाते थे बल्कि सिर्फ फिजिकल फिटनेस के लिए वो यहां पहुंचते थे. लेकिन चाचा ने देखा कि अमित का बॉक्सिंग से लगाव है ऐसे में वो उन्हें भी ट्रेनिंग देने लगे.साल 2015 से अमित ने पटियाला में ट्रेनिंग शुरू की. लेकिन इसके बावजूद शनिवार-रविवार और छुट्टी के दिन वो अपने गांव में चाचा से बॉक्सिंग के गुर सीखने जाते थे.

इस बार कॉमवेल्थ खेलों में पंघाल ने सिल्वर मेडल जीता था. फाइनल में वो इंग्लैंड के गाला याफी के खिलाफ हार गए थे. फाइनल में हारने के बाद अमित ने कहा था कि उन्हें हाथों में इंजरी हो गई थी इसके चलते वो पूरी ताकत के साथ नहीं खेल सके थे. लेकिन उन्होंने वादा किया था कि वो एशियाई खेलों में जरूर मेडल लेकर आएंगे और उन्होंने अपना यह सपना पूरा किया.

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