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69 मेडल@69 कहानियां: टैलेंट के अलावा आध्‍यात्‍म भी कूट-कूट के भरा है दीपक में, गुरुकुल के हैं पूर्व विद्यार्थी

कहानी 18: पिछड़ने के बाद उनकी शिक्षा ने उन्‍हें ही उन्‍हें वहां तक पहुंचाया

Updated On: Sep 04, 2018 12:55 PM IST

FP Staff

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69 मेडल@69 कहानियां: टैलेंट के अलावा आध्‍यात्‍म भी कूट-कूट के भरा है दीपक में, गुरुकुल के हैं पूर्व विद्यार्थी
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देश में शूटिंग को काफी रिच खेल माना जाता है. माना तो ऐसा भी जाता है कि राइफल, पिस्‍टल, गन हाथ में उठाने वाले ज्‍यादातर निशानेबाज देश और विदेश के सबसे बड़े स्‍कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी से बढ़ते हैं और इसीलिए उनकी कई भाषाओं पर भी अच्‍छी पकड़ होती है. भाषाओं में पकड़ का मतलब हिंदी के बाद अंग्रेजी और इसके बाद तो फ्रेंच, जर्मन. लेकिन किसी निशानेबाज का संस्‍कृत में अच्‍छी पकड़ होना शायद एक बार तो आंखें बड़ी बड़ी कर दे, लेकिन ऐसा है. एशियन गेम्‍स में सिल्‍वर पर निशाना साधने वाले दीपक कुमार हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही संस्‍कृत के भी एक्‍सपर्ट हैं.

 

दीपक कुमार ने 10 मीटर एयर राइफल में सिल्वर मेडल अपने नाम करने वाले दीपक काफी आध्‍यात्मिक व्‍यक्ति हैं. देहरादून के गुरूकुल में पढ़े दीपक संस्कृत के एक्सपर्ट है. वह हर जगह गुरुकुल की शिक्षा फैलाने का प्रयास करते हैं. दिल्ली के रहने वाले दीपक के अंदर इतना संयम उनकी परवरिश के कारण हैं और शायद यहीं कारण है कि क्‍वालिफिकेशन में पीछे रहने के बावजूद भी उन्‍होंने 247.7 का स्‍कोर करके सिल्‍वर जीता. फाइनल में जब दीपक पिछड़ रहे थे तो उन्‍होंने उस समय अपने कोच की बात को याद किया. उनका कहना था कि मैं क्वालीफिकेशन में भी पीछे था. मैने उनके शब्दों को याद किया. वह कहते हैं कि आपको अपनी ताकत और सीमायें पता है. शुरुआत अच्छी नहीं थी और बीच में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका लेकिन मुझे संयम बनाए रखना था .’

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