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Asian games 2018: गोल्ड के साथ रजत की आंखों को है इस चीज की तलाश, साल भर पहले छोड़ दिया था अपना खेल

रजत चौहान ने इंचियाेन एशियाड में कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड जीता था

Updated On: Aug 17, 2018 07:33 PM IST

Kiran Singh

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Asian games 2018: गोल्ड के साथ रजत की आंखों को है इस चीज की तलाश, साल भर पहले छोड़ दिया था अपना खेल

विश्व स्तर पर एक खिलाड़ी देश का झंडा कब सबसे ऊंचा कर पाता है शायद उस समय जब वह बिना किसी मानसिक दबाव के दुनिया के दिग्गजों को चुनौती दे. कई बार तो प्लेयर्स अपनी परेशानियों को इन उम्मीदों के नीचे दबाकर उतर जाते हैं मैदान पर और उन उम्मीदों को पूरा भी कर देते हैं. कुछ दिनों में ही इंडोनेशिया में एशियन गेम्स शुरू होने वाले हैं. भारत भी अपना एक बड़ा दल काफी उम्मीदों के साथ भेज रहा है. 500 के अधिक खिलाड़ियों के इस दल में हर कोई भारत की झोली भरना चाहता है, लेकिन इनमें से कुछ ऐसे भी हैं, जिनको आशा है कि इस एशियाड से वापस लौटने के बाद शायद उनकी कई परेशानी खत्म हो जाए.

इन्हीं में से एक हैं तीरंदाज रजत चौहान. वहीं रजत, जिन्होंने 2015 में विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर इतिहास रचा था. वहीं, जिन्होेंने इंचियोन एशियाड में अपने नाम के उलट भारत को गोल्ड दिलवाया था. भारत के शीर्ष कंपाउंड आर्चर में से एक रजत चौहान की नजरें एशियाड में अपने खिताब को बरकरार रखने पर हैं, लेकिन अपना दूसरा एशियाड खेल रहे रजत की आंखें गोल्ड के साथ लंबे समय से एक और चीज पर भी टिकी हुई हैं. उन्हें उम्मीद है कि इंडोनेशिया में गोल्ड के साथ उनकी यह तलाश भी पूरी हो जाएगी.

पिछले एशियाड में रजत ने अभिषेक वर्मा औद संदीप कुमार के साथ मिलकर टीम इवेंट का गोल्ड जीता था. जकार्ता एशियाड में वह अभिषेक, संगमप्रीत बिसला और अमन सैनी के साथ कंपाउंड टीम इवेंट में उतरेंगे.

इंडोनेशिया के लिए रवाना होने से पहले फर्स्टपोस्ट से खास बातचीत में वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेडलिस्ट रजत ने बताया कि गोल्ड के साथ आखिर उन्हें किस चीज की है तलाश और जिस इवेंट में मिली थी शोहरत, आखिर क्यों छोड़ दिया था उसे...पढ़िए उन्हीं की जुबानी 

एशियाड के लिए टीम परफेक्ट...

तीन माह से सोनीपत में हूं और एशियाड की तैयारी पूरी है. हालांकि अपने खिताब को बरकरार रखने का दबाव तो है ही, लेकिन टीम के साथ प्रैक्टिस देखकर निश्चित हूं कि हम अपना गोल्ड कहीं और जाने नहीं देंगे. भले ही इस बार हमारी टीम में संदीप नहीं हैं, लेकिन दोनों खिलाड़ी अच्छा स्कोर कर रहे हैं. पहले भी मैंस कंपाउंड टीम परफेक्ट थी और अभी भी परफेक्ट है.

साल भर पहले छोड़ दिया कंपाउंड

मैंने कंपाउंड में ही एशियाड में गोल्ड जीता और उसके अगले साल ही वल्र्ड चैंपियनशिप में सिल्वर जीता था. इस खेल ने और इस इवेंट ने मुझे बहुत कुछ दिया, सबसे ज्यादा शोहरत दी. लेकिन साल भर पहले मैंने इसे छोड़कर रिकर्व अपना लिया, क्योंकि मुझे ओलिंपिक खेलना था और वहां कंपाउंड नहीं है. पंजाब के कोच जीवन ज्योत सिंह तेजा ने बहुत समझया, लेकिन उनकी बात मुझे समझ नहीं आई. कोच के बहुत समझाने पर भी कंपाउंड में नहीं आया. आखिर में उन लोगों ने मेरे परिवार का सहारा लिया, मुझे समझाने में. उन्होंने मुझे सिर्फ इतना ही समझाया कि अभी हाथ में कोई नौकरी तक नहीं हैं और ऐसे में जिस इवेंट में अच्छे हो, उसे छोड़कर किसी और में जाने से तुम्हें ही नुकसान होगा. तेजा सर ने भी कहा था कि अभी इंडिया को कंपाउंड में तुम्हारी जरूरत है. साल भर बाद जब वापस कंपाउंड में आया तो लगा कि नया खिलाड़ी हूं. फिर से खुद को तैयार किया.

India's Rajat Chauhan shoots as teammates Sandeep Kumar (L) and Abhishek Verma (R) watch during their men's compound team gold medal archery match against South Korea at the Gyeyang Asiad Archery Field during the 2014 Asian Games in Incheon September 27, 2014. REUTERS/Issei Kato (SOUTH KOREA - Tags: SPORT ARCHERY) - GM1EA9R0V0U01

आर्चरी में देश के पास ओलिंपिक मेडल नहीं...

वर्ल्ड चैंपियनशिप में मैंने खुद से वादा किया और वहां मेडल जीता. आर्चरी में देश के पास कोई ओलिंपिक मेडल नहीं हैं. मैं चाहता हूं कि वहां भी देश को मेडल दिलाऊं और इसके लिए मुझे रिकर्व में जाना पड़ेगा, लेकिन इस समय मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि कुछ साल सब कुछ छोड़कर सिर्फ रिकर्व पर ध्यान दूं, अगर नौकरी लग जाती है तो वापस रिकर्व में जा सकता हूं.

सरकार ने मेडल विजेताओं को दिया झटका

2014 में एशियाड में मेडल जीतने के बाद हालांकि रेलवे ने जूनियर टीटी का जॉब आॅफर किया था. मेरे लिए जूनियर और सीनियर मायने नहीं रखता, लेकिन उस जॉब के साथ एक शर्त यह भी रख दी कि हाफ टाइम तक ड्यूटी करनी पड़ेगी. इससे शायद मैं खेल को समय नहीं दे पाता. लेकिन पिछले साल राजस्थान ने उस समय झटका दे दिया, जब बजट में कहा कि एक जनवरी, 2016 से पहले जीते किसी के भी मेडल मान्य नहीं होंगे, ना ही एशियाड के और न ही कॉमनवेल्थ के. हालांकि विरोध के बाद इसे बदल दिया गया था. उसके पास अभी तक मुझे सरकार से नौकरी की आस है.

पापा ने कार और मां ने गिरवी रख दी थीं चूड़ियां

बात 2011 की है, जब मुझे किट चाहिए था, लेकिन पैसे नहीं होने के कारण पापा ने 70 हजार रुपए में कार बेच दी और मां ने अपनी सोने की चूडियों पर गोल्ड लोन लिया. इसे बाद किट खरीद पाया और इसके बाद उसी समय हुए एशियन ग्रांड प्रिक्स में चार गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता.

कोरिया से मिल सकती है कांटे की टक्कर

वैसे तो सभी विपक्षी टीम काफी मजबूत है, लेकिन कोरिया, ईरान अच्छा करते हैं. चीनी ताइपे और मलेशिया भी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं, लेकिन इनमें से सबसे ज्यादा कांटे की टक्कर कोरिया से मिल सकती है. इस बार एशियाड में कंपाउंड में व्यक्तिगत इवेंट नहीं हो रही, उसकी जगह मिक्स्ड डबल्स हो रही है. लेकिन अगर व्यक्तिगत इवेंट होती तो भारत की इस समय के प्रदर्शन को देखकर पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि शीर्ष दो में भारतीय खिलाड़ी ही होते. मुझे पूरी उम्मीद है कि भारत न सिर्फ कंपाउंड में, बल्कि बाकी इवेंट में भी अपनी छाप छोड़ने में सफल होगा.

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