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Asian Games 2018: स्टार निशानेबाजों की अनुपस्थिति में यंग ब्रिगेड जमा सकती है रंग

संजीव राजपूत, रवि कुमार, मानवजीत सिंह संधू, अपूर्वी चंदेला जैसे निशानेबाज शामिल होने पर भी मनु भाकर, इलावेनिल वालारिवन और अनीश से गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद की जा रही है

Updated On: Aug 11, 2018 02:35 PM IST

Manoj Chaturvedi

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Asian Games 2018: स्टार निशानेबाजों की अनुपस्थिति में यंग ब्रिगेड जमा सकती है रंग

हम एशियाई खेलों में भारतीय निशानेबाजों की बात करें तो उनका प्रदर्शन बहुत चमकदार नहीं रहा है. भारत ने अब तक सात ही व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीते हैं. यह स्वर्ण पदक जीतने वाले हैं रणधीर सिंह, जसपाल राणा, रंजन सोढ़ी और जीतू राय हैं. भारत के अब तक जीते 17 रजत और 25 कांस्य पदकों से कुल पदकों की संख्या 49 तक ही पहुंचती है. निशानेबाजी में भारतीय स्थिति का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि 2014 के इंचियोन में हुए एशियाई खेलों में चीन ने 27 स्वर्ण सहित 50 पदक जीते थे, जो कि भारत के कुल पदकों से एक ज्यादा है. इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग शहरों ने 18 अगस्त से दो सितम्बर तक होने वाले एशियाई खेलों की निशानेबाजी में भारत का 28 सदस्यीय दल भाग ले रहा है, जिसमें 16 पुरुष और 12 महिला निशानेबाज शामिल हैं.

दल में नहीं कई स्टार निशानेबाज

भारतीय दल में इस बार कई स्टार निशानेबाज शामिल नहीं हैं. इनमें खासतौर से ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता गगन नारंग, कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता जीतू राय, कॉमनवेल्थ गेम्स रजत पदक विजेता मेहुली घोष, एयर पिस्टल शूटर शाहजर रिजवी हैं. शाहजार रिजवी इस साल मैक्सिको और चांगवोन विश्व कपों में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण और रजत पदक जीत चुके हैं. इन निशानेबाजों की मुख्य वजह इनकी स्पर्धाओं का 2018 के एशियाई खेलों में शामिल नहीं होना है. असल में एशियाई खेलों के आयोजकों ने निशानेबाजी की स्पर्धाओं में खासी कटौती कर दी है. चार साल पहले इंचियोन में 44 स्वर्ण सहित 132 पदक दांव पर थे. लेकिन इस बार पदकों की संख्या 20 स्वर्ण सहित 60 तक सीमित कर दी गई है. इस तरह इस बार निशानेबाजी में मिलने वाले पदक आधे से भी कम हो गए हैं. भारत के लिए दिक्कत की बात यह भी है कि इंचियोन में एक स्वर्ण सहित जीते नौ पदकों में से सात उन स्पर्धाओं में जीते थे, जिनका इस बार आयोजन ही नहीं हो रहा है.

रियो ओलिंपिक की निराशा से उभरना होगा

भारतीय निशानेबाज आए दिन आईएसएसएफ विश्व कपों में शानदार प्रदर्शन करते रहते हैं. लेकिन ओलिंपिक और एशियाई खेलों जैसी मेजर प्रतियोगिताओं में वह अक्सर टांय-टांय फिस्स हो जाते हैं. हम 2016 के रियो ओलिंपिक की ही बात करें तो भारत का 12 सदस्यीय दल खाली हाथ लौटा था. यही नहीं 2008 बीजिंग ओलिंपिक के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा और जीतू राय को छोड़ दें तो कोई भी निशानेबाज पदक जीतना तो दूर फाइनल तक में स्थान नहीं बना सका था.

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अभिनव बिंद्रा बहुत ही मामूली अंतर से कांस्य पदक जीतने से चूक गए थे. वह यदि पदक जीत जाते तो उनकी विदाई पदक के साथ हो जाती और भारत खाली हाथ भी नहीं लौटता. इसके बाद भारतीय निशानेबाज 2017 में भी कोई उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं कर सके हैं.

यंग ब्रिगेड बंधाती है उम्मीद

भारत के युवा निशानेबाजों ने इस साल के पहले हाफ में शानदार प्रदर्शन करके अपनी धाक जमाकर इस बार एशियाई खेलों में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की उम्मीद बंधाई है. चीनी निशानेबाजों के जलवे से हम सभी परिचित हैं. भारतीय युवा निशानेबाजों ने इस साल सिडनी और सुहल में हुए जूनियर विश्व कपों में शानदार प्रदर्शन से यह संकेत जरूर दिया है कि भारतीय निशानेबाजी का भविष्य उज्जवल है. इन दोनों जूनियर विश्व कपों में भारत ने कुल 48 पदक जीते. सिडनी में भारतीय दल चीन से पिछड़कर दूसरे स्थान पर रहा. लेकिन भारतीय दल सुहल में चीन को पछाड़कर पहले स्थान पर पहुंच गया. चीन को निशानेबाजी में किसी भी स्तर पर पटकना बहुत मायने रखता है. यही नहीं ऐसा प्रदर्शन करने से निशानेबाजों का मनोबल बढ़ता है और वह फिर सधे निशाने साध सकते हैं.

गोल्ड पर निगाह रखने वाले

भारतीय दल में संजीव राजपूत, रवि कुमार, मानवजीत सिंह संधू, अपूर्वी चंदेला जैसे निशानेबाज शामिल होने पर भी मनु भाकर, हिना सिद्धू, इलावेनिल वालारिवन और अनीश से गोल्ड मेडल जीतने की उम्मीद की जा रही है. इन युवाओं ने इस साल जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उससे दुनिया उनकी मुठ्ठी में नजर आ रही है. हम मनु भाकर की बात करें तो वह इस सबसे ज्यादा सुर्खियां पाने वाली पिस्टल निशानेबाज हैं. उन्होंने इस साल मैक्सिको विश्व कप में दोहरा स्वर्ण पदक जीतकर झंडे गाड़ दिए थे. उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल और प्रकाश मितरावल के साथ इसकी मिक्सड टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीते थे. दिलचस्प बात यह है कि मनु भाकर ने अप्रैल 2016 में निशानेबजी को अपनाया और डेढ़ साल के भीतर विश्व कप में दोहरे गोल्ड पर निशाना साध दिया, ऐसा कम ही देखने को मिलता है. मनु भाकर इन एशियाई खेलों में एयर पिस्टल, स्पोर्ट्स पिस्टल और एयर पिस्टल मिक्सड में भाग ले रही हैं. इसलिए वह कम से कम दो व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पीला तमगा ला ही सकती हैं.

Shooting - Gold Coast 2018 Commonwealth Games - Women's 10m Air Pistol - Finals - Belmont Shooting Centre - Brisbane, Australia - April 8, 2018. Gold medallist Manu Bhaker of India celebrates. REUTERS/Eddie Safarik - UP1EE48097E9U

मनु के अलावा एक अन्य युवा निशानेबाज इलावेनिल वालारिवन हैं, जिनसे महिलाओं की एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद की जा सकती है. वह सिडनी आईएसएसएफ विश्व कप के जूनियर वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था. इस तरह से उनके नाम दो स्वर्ण पदक दर्ज हैं. कुड्डालोर में पैदा हुई और अमदाबाद में रहने वाली इस निशानेबाज को इतना प्रतिभाशाली माना जाता है कि वह किसी भी दिन विश्व रिकॉर्ड बनाने की क्षमता रखती है. हिना सिद्धू की एक तो मनु भाकर वाली स्पर्धा ही है पर उनके दावे को कम करके नहीं आंका जा सकता है. वैसे भी वह इस साल हुए गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं. पर कई बार उनके ऊपर दवाब हावी हो जाता है. वह चार साल पहले इंचियोन एशियाई खेलों में क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी थीं. वह महिलाओं की पिस्टल टीम स्पर्धा में कांस्य पदक ही जीत सकीं थीं.

अनीश भी है पदक का दावेदार

पुरुषों की 16 सदस्यीय टीम में इस बार नामी निशानेबाज शामिल नहीं हैं क्योंकि उनकी स्पर्धाओं को शामिल ही नहीं किया गया है. लेकिन इनमें अनीश भानवाल ऐसा निशानेबाज है, जो कि कोई भी तमगा लाने का दम रखता है. हरियाणा के करनाल के एक गांव में जन्मे अनीश ने इस साल ऐसा धमाकेदार प्रदर्शन किया है कि उसके पदक के साथ लौटने की हर कोई उम्मीद कर रहा है. इस पिस्टल शूटर ने इस साल सिडनी और सुहल जूनियर विश्व कपों में तीन स्वर्ण सहित पांच पदक जीत चुके हैं. वह इस साल गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में भी 25 मीटर रेपिड फायर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.

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