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Asian games 2018: नौकरी नहीं होने का अफसोस नहीं, बल्कि मंजीत की आंखों में था गोल्ड का सपना

भारत ने 800 मीटर में आखिरी बार 1982 दिल्ली एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था

Updated On: Aug 28, 2018 09:34 PM IST

FP Staff

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Asian games 2018: नौकरी नहीं होने का अफसोस नहीं, बल्कि मंजीत की आंखों में था गोल्ड का सपना

बेरोजगार और अनजान एथलीट मंजीत सिंह ने ट्रैक पर धूम मचायी तथा एशियाई खेलों की पुरुष 800 मीटर दौड़ में प्रबल दावेदार हमवतन जिनसन जॉनसन को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीता. भारत ने इस इवेंट में पहले दो स्थान हासिल किए.

मंजीत को मेडल का दावेदार नहीं माना जा रहा था लेकिन उन्होंने अनुभवी जॉनसन को पीछे छोड़कर एक मिनट 46.5 सेकेंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय मेडल जीता. केरल के एशियाई चैंपियनशिप के मेडल विजेता जॉनसन एक मिनट 46.35 सेकेंड का समय लेकर दूसरे स्थान पर रहे.

भारत ने 800 मीटर में आखिरी बार 1982 दिल्ली एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था. तब चार्ल्स बोरोमियो ने यह उपलब्धि हासिल की थी.

Jakarta: India's Manjit Singh celebrates as he crosses the finish line to win the men's 800m final during the athletics competition at the 18th Asian Games in Jakarta, Indonesia, Tuesday, Aug. 28, 2018. AP/PTI(AP8_28_2018_000209B)

यह एशियाई खेलों में केवल दूसरा अवसर है जबकि भारतीय एथलीट 800 मीटर दौड़ में पहले दो स्थानों पर रहे. उनसे पहले नई दिल्ली में 1951 में पहले एशियाई खेलों में रंजीत सिंह और कुलवंत सिंह ने यह कारनामा किया था.

सेना के अमरीश कुमार से कोचिंग लेने वाले मंजीत ने एक मिनट 46.24 सेकेंड के अपने पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में सुधार किया जो उन्होंने गुवाहाटी में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किया था. कोई भी मंजीत को गोल्ड पदक का दावेदार नहीं मान रहा था लेकिन उन्होंने कहा कि वह खुद को साबित करने के लिए प्रतिबद्ध थे.

जींद में रहने वाले मंजीत ने कहा, ‘मैंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी दौड़ के वीडियो देखे और गलतियों का आकलन किया. मैं अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए प्रेरित था.’यह पहला अवसर नहीं है जबकि मंजीत ने जानसन को पीछे छोड़ा. इससे पहले पुणे में 2013 में भी उन्होंने केरल के एथलीट को हराया था. मंजीत ने कहा, ‘मैं आशान्वित था. मैंने अपने हिसाब से तैयारी की और कभी राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बारे में नहीं सोचा. मैं केवल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता था. मेरे पास नौकरी नहीं है लेकिन मेरा कोच सेना से जुड़ा है.’

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