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69 मेडल@69 कहानियां: पत्‍तों के खेल को पुरुष और मिक्‍स्‍ड टीम ले गई एक नए मुकाम पर

कहानी 57 और 58: जीतने के बाद प्‍लेयर्स ने इसी बात पर जोर दिया था कि ब्रिज जुआ नहीं है

Updated On: Sep 15, 2018 06:45 PM IST

FP Staff

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69 मेडल@69 कहानियां: पत्‍तों के खेल को पुरुष और मिक्‍स्‍ड टीम ले गई एक नए मुकाम पर

इंडोनेशिया में हुए एशियन गेम्‍स में इस बार कुछ खेलों ने डेब्‍यू भी किया था और उनमें से ही एक रहा ब्रिज, जिसमें भारत का प्रदर्शन उम्‍मीदों से भी बेहतर रहा. भारत ने यहां पुरुष और मिक्‍स्‍ड टीम इवेंट में ब्रॉन्‍ज मेडल जीता था. हालांकि दोनों ही जगह सेमीफाइनल तक पहुंचने का सफर भारत का शानदार रहा था, जिसको देखने के बाद माना जा रहा था कि दोनों ही जगह कम से कम सिल्‍वर तो आ ही जाएगा, लेकिन सेमीफाइनल में पुरुष टीम को सिंगापुर से और मिक्‍स्‍ड टीम को थाईलैंड के हाथों हार का सामना करना पड़ा. पुरुष टीम में जग्‍गी शिवदसानी, राजेश्वर तिवारी, अजय खरे, राजू तोलानी, देवब्रत मजूमदार और सुमित मुखर्जी शामिल थे. वहीं मिक्स्ड टीम में किरण नादर, हेमा देवड़ा, हिमानी खंडेलवाल, बचिराजू सत्यनारायण, गोपीनाथ मन्ना और राजीव खंडेलवाल खामिल हैं. पुरुष टीम की औसत उम्र 52 जबकि मिक्स्ड टीम की 57 साल थे.

60 साल के जग्‍गी भारत के सबसे सफल ब्रिज प्‍लेयर में से एक हैं और जकार्ता में उन्‍होंने अपने इसी अनुभव का परिचय देते हुए टीम को सफलता दिलाई. वहीं देश की शीर्ष महिला ब्रिज खिलाड़ी में शामिल किरण नादर मिक्‍स्‍ड इवेंट में टीम अहम भूमिका निभाई. एशियन गेम्‍स में ब्रिज में देश के इस प्रदर्शन के बाद हर ए‍क ब्रिज प्‍लेयर को अब उम्‍मीद हो गई है देश में अब इसे जुआ नहीं समझा जाएगा. जीतने के बाद खिलाडि़यों ने भी इसी बात पर जोर दिया था कि ब्रिज जुआ नहीं है.

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