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69 मेडल@69 कहानियां: भाई के बलिदान ने दिव्या को बनाया मेडलिस्ट

कहानी 47: दिव्या ने इसी साल ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित किए गए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया था

Updated On: Sep 15, 2018 02:02 PM IST

FP Staff

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69 मेडल@69 कहानियां: भाई के बलिदान ने दिव्या को बनाया मेडलिस्ट

देश के लिए मेडल लाने की ललक रेसलर दिव्या काकरान के अंदर इतनी ज्यादा थी कि अपने ब्रॉन्ज मेडल मैच से पहले चोट लगने के बावजूद उके अंदर डर नहीं था. वह केवल मैट पर जाकर खुद को साबित करना चाहती थी.

दिव्या ने ब्रॉन्ड के मैच में चीनी ताइपे की चेन वेनलिंग को 10-0 से तकनीकी दक्षता के आधार पर मुकाबल जीत अपने पहले ही एशियाई खेलों में मेडल जीता. दिव्या को मंगोलिया की पहलवान तुमेनटसेटसेग शारखु ने क्वार्टर फाइनल में 11-1 से मात दी थी.

दिव्या का परिवार बचपन से ही आर्थिक रूप से कमजोर था. दिव्या ने हाल ही दिल्ली में हुए सम्मान समारोह में भी इस बात को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामना रखा था कि वह बेहद गरीब परिवार से आती हैं मदद चाहती है. पिता के साथ-साथ दिव्या को सफल रेसलर बनाने के लिए उनके भाई ने भी बड़ा समझौता किया है. युवा रेसलर दिव्या के घर में दो भाई भी हैं और इनमें से एक की कुश्ती में काफी रूचि भी थी. मगर घर की परिस्थितियां यह कहती रही कि दिव्या और उसके भाई में से किसी एक का ही खर्च उठाया जा सकेगा. जिसके लिए भाई ने अपना सपना छोड़ दिव्या को कुश्ती में बढ़ाने का फैसला किया और आज वह उनकी उपलब्धियों को देख खुश है.

दिव्या ने इसी साल ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित किए गए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया था. दिव्या ने इसी साल भारत केसरी दंगल में दिग्गज पहलवान गीता फोगाट को मात दी थी.

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