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69 मेडल 69 कहानियां: खुशी तो दूर, क्‍या वाकई इस ब्रॉन्‍ज मेडल से तसल्‍ली मिली?

कहानी 24: शायद तसल्‍ली तो तब मिलती, जब हम मलेशियाई टीम और खिताब जीतने वाली जापानी टीम से निचली रैंकिंग पर होते

Updated On: Sep 04, 2018 03:02 PM IST

FP Staff

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पांच और 12 के बीच बड़ा फासला है. सात पायदान का फासला. हॉकी में यह फासला बड़ा माना जाता है. भारत दुनिया में पांचवें नंबर की टीम है. मलेशिया 12वें नंबर की. इसीलिए समझा जा रहा था कि इस बार एशियाई खेलों में भारत आसानी के साथ गोल्ड जीतकर 2020 टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई कर लेगा.

भारतीय टीम ने शुरुआत भी अच्छी की. कमजोर टीमों के खिलाफ थोक में गोल किए. इंडोनेशिया पर 17, श्रीलंका पर 20, हॉन्गकॉन्ग पर 26 गोल दाग दिए. जापान को भी आठ गोल से हराया. कोरिया के खिलाफ 5-3 का स्कोर जरूर करीबी लगता है. लेकिन ऐसी उम्मीद नहीं थी कि सेमीफाइनल में मलेशियाई टीम उसे परेशान कर सकती है.

India's players celebrate after scoring a goal against South Korea during the men's hockey pool A match between India and South Korea at the 2018 Asian Games in Jakarta on August 26, 2018. / AFP PHOTO / AAMIR QURESHI

भारतीय टीम खराब खेली. लेकिन बढ़त बनाए रखी. बस आखिरी डेढ़-दो मिनट बचे थे. लीड हाथ में थी. ऐसे में लग रहा था कि चलो, बहुत अच्छा प्रदर्शन न सही, लेकिन कम से कम फाइनल में तो पहुंचेंगे. उसी समय मलेशिया ने गोल दागकर बराबरी कर ली. पेनल्टी शूट आउट में दुनिया के दो बेहतरीन गोलकीपर आमने सामने थे. श्रीजेश और कुमार सुब्रमण्यम. श्रीजेश ने तीन बचाव किए. लेकिन शूट आउट में जीतने के लिए सिर्फ बचाव नहीं, गोल करना भी जरूरी होता है. भारतीय खिलाड़ी कुछ अपनी गलतियों और कुछ मलेशियाई गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन की वजह से गोल नहीं कर पाए. इस तरह पिछली बार की चैंपियन टीम फाइनल में नहीं पहुंच पाई.

पाकिस्तान को हराकर भारत ने ब्रॉन्ज जीता. लेकिन यह पदक वैसा ही है, जैसे 1968 ओलिंपिक्स में पहली बार भारतीय टीम ब्रॉन्ज जीतकर आई थी. उस टीम के खिलाड़ी एयरपोर्ट से चुपचाप घर निकल गए थे, ताकि कोई पहचान न ले. हालांकि इस बार ऐसा नहीं हुआ. खिलाड़ी टीवी स्टूडियो में भी दिखे और इंटरव्यू भी दिए. लेकिन यह ऐसा प्रदर्शन है, जिससे टीम में कोई भी खुश नहीं होगा. इस ब्रॉन्ज की वजह से अब ओलिंपिक्स के लिए क्वालिफाइंग टूर्नामेंट में भारत को खेलना होगा. जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उसमें टीम और कोचिंग स्टाफ में बदलाव के भी आसार हैं. हालांकि यह जानना दिलचस्प है कि जिस जापान टीम ने गोल्ड जीता, वो दुनिया में 16वें नंबर की टीम है.

 

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