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एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप :  मैरी कॉम और सोनिया स्वर्ण पदक की दहलीज पर

सरिता देवी, शिक्षा, प्रियंका, लोवलिना और सीमा को कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा

Updated On: Nov 07, 2017 07:57 PM IST

Bhasha

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एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप :  मैरी कॉम और सोनिया स्वर्ण पदक की दहलीज पर

पांच बार की विश्व चैंपियन एमसी मैरी कॉम ने एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में पांचवें स्वर्ण पदक की ओर कदम बढ़ाते हुए फाइनल में प्रवेश कर लिया, जबकि सोनिया लाथेर ने भी खिताबी मुकाबले में जगह बनाई. सोनिया ने काफी आक्रामक प्रतिद्वंद्वी उजबेकिस्तान की योदगोरोय मिर्जाएवा को हराया. वह फाइनल में चीन की यिन जुन्हुआ से भिड़ेंगी.

भारत के लिए हालांकि मंगलवार का दिन निराशाजनक भी रहा, जब चार बार की स्वर्ण पदक विजेता एल सरिता देवी ( 64 किलो ) को कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा, जो सेमीफाइनल में चीन की दोउ डैन से हार गईं. सरिता के अलावा प्रियंका चौधरी (60 किलो), लोवलिना बोरगोहेन (69 किलो), सीमा पूनिया (81 किलो से अधिक) और शिक्षा (54 किलो) को भी सेमीफाइनल में हार के साथ कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.

मैरी कॉम ने जापान की सुबासा कोमुरा को 5-0 से हराया. वह छह में से पांचवीं बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची हैं, जहां उनका सामना उत्तर कोरिया की किम हयांग मि से होगा, जिन्होंने मंगोलिया की एन म्यांगमारदुलाम को मात दी. फाइनल जीतने पर यह 48 किलोवर्ग में उनका पहला एशियाई स्वर्ण होगा.

राज्यसभा सांसद और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता 35 बरस की मैरी कॉम पांच साल 51 किलो में भाग लेने के बाद 48 किलोवर्ग में लौटी हैं. जापानी मुक्केबाज ने उनके खिलाफ काफी रक्षात्मक खेल दिखाया. मैरी कॉम ने दूसरे राउंड में रफ्तार में इजाफा किया और आक्रामक खेल दिखाकर जीत दर्ज की.

शिक्षा ( 54 किलो ) ने अपने वर्ग में कांस्य पदक जीता, जिन्हें चीनी ताइपे की पूर्व युवा विश्व चैंपियन लिन यू तिंग ने सेमीफाइनल में हराया. प्रियंका चौधरी ( 60 किलो ) को भी कांस्य पदक मिला. उन्हें सेमीफाइनल में कोरिया की ओ यिओंजी ने मात दी. एक अन्य सेमीफाइनल में लोवलिना को कजाखस्तान की वेलेंटीना खालजोवा ने पटखनी दी. छोटे ड्रॉ के कारण सेमीफाइनल में सीधे प्रवेश पाने वाली सीमा को कजाखस्तान की गुजाल इस्मातोवा से हार कर कांस्य से संतोष करना पड़ा

मैरी कॉम ने जीत के बाद कहा, ' दूसरे पदकों की तरह मेरे लिए यह काफी खास पदक है. हर पदक के पीछे एक कहानी होती है. मैं फाइनल में पहुंच कर काफी खुश हूं. मुझे लगा था सेमीफाइनल में कड़ा मुकाबला होगा, लेकिन मैंने कोमुरा को जल्द ही हरा दिया. मैं फाइनल खेलने के लिए तैयार हूं, लेकिन उसके बारे में ज्यादा सोच कर खुद को दबाव में नहीं लाना चाहती हूं. मैं फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ दूंगी जैसा अब तक इस टूर्नामेंट में किया है.'

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