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क्या फ्रेंच ओपन नहीं जीतते, तो अर्जुन पुरस्कार के हकदार नहीं होते बोपन्ना?

तारीख निकलने के बाद एआईटीए अर्जुन पुरस्कार के लिए बोपन्ना के नाम की सिफारिश करेगा

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi Updated On: Jun 09, 2017 06:03 PM IST

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क्या फ्रेंच ओपन नहीं जीतते, तो अर्जुन पुरस्कार के हकदार नहीं होते बोपन्ना?

नाम रोहन बोपन्ना. उम्र 37 साल. 16 एटीपी खिताब. अभी तक अर्जुन अवॉर्ड नहीं. इस साल भी अर्जुन अवॉर्ड के लिए उनके नाम की सिफारिश नहीं हुई. लेकिन अचानक भारतीय टेनिस फेडरेशन यानी आइटा ने अब बोपन्ना का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए भेजने का फैसला किया है. वो भी तब, जब तारीख निकल चुकी है.

फेडरेशन या किसी भी तरफ से अगर तारीख निकलने के बाद पुरस्कार के लिए नाम भेजा जाता है, तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है. सिर्फ खेल मंत्रालय की विशेष सिफारिश पर ही आखिरी तारीख के बाद किसी खिलाड़ी का नाम कमेटी के सामने आ सकता है. हालांकि 2012 में बीसीसीआई ने युवराज सिंह का नाम बाद में भेजा था. तब बीसीसीआई ने खेल मंत्रालय को लिखा था कि उन्हें आखिरी तारीख का पता नहीं चला. इससे पहले 2003 में वीरेंद्र सहवाग को भी तारीख निकलने के बाद नामांकन के बावजूद पुरस्कार मिला था.

मंत्री को है नाम के प्रस्ताव का विशेष अधिकार

हालांकि क्रिकेट से बाहर ऐसे उदाहरण याद नहीं आते. पिछले कुछ सालों से ऐसे तमाम उदाहरण हैं, जब तारीख निकलने के बाद खेल मंत्री ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए किसी खिलाड़ी का नाम शामिल करवाया. ऐसे खिलाड़ियों को पुरस्कार भी मिले हैं. लेकिन सवाल यही है कि आखिरी तारीख निकलने का इंतजार क्यों किया जाए. ..और मंत्री जी को ऐसा अधिकार क्यों हासिल हो.

रोहन बोपन्ना 2003 में प्रोफेशनल बने थे. इस बात को 14 साल हो गए. इस बीच डेविस कप के तमाम मुकाबले बोपन्ना ने खेले हैं और जीत दर्ज की है. इससे पहले भी उनके नाम की सिफारिश अर्जुन अवॉर्ड के लिए की जा चुकी है. लेकिन मिला नहीं है. इस बार नाम नहीं भेजा गया. अब बोपन्ना ने फ्रेंच ओपन खिताब जीता है. वो भी अभी भेजा नहीं है. सिर्फ फैसला हुआ है.

बोपन्ना ने गुरुवार को कनाडा की गैब्रियला डाब्रोस्की के साथ मिक्स्ड डबल्स खिताब जीता. यह उनका पहला ग्रैंड स्लैम खिताब है. आइटा सचिव हिरणमय चटर्जी ने पीटीआई से कहा है, ‘वह अर्जुन पुरस्कार के हकदार हैं. इस बार उन्हें यह पुरस्कार मिलना चाहिए.’ चटर्जी को जब याद दिलाया गया कि आवेदन भेजने की अंतिम तिथि समाप्त हो गई है, तो उन्होंने कहा, ‘हम आज ही इसे भेजने की कोशिश करेंगे. यह किया जा सकता है.’

हालांकि सच्चाई यही है कि ऐसा नहीं किया जा सकता. और अगर खेल मंत्री के बाद फेडरेशनों के लिए भी खोल दिया गया कि आखिरी तारीख के बाद भी आवेदन कर सकते हैं, फिर तो नियमों का कोई मतलब नहीं रह जाता. इस साल आवेदन की आखिरी तारीख 28 अप्रैल थी. उसकी वजह ये थी कि 29 और 30 को छुट्टी थी. वरना आखिरी तारीख 30 अप्रैल होती है.

क्या हैं अर्जुन अवॉर्ड को लेकर नियम

नियम में साफ है कि 1 जनवरी 2013 से लेकर 31 दिसंबर 2016 तक किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन को आधार मानकर पुरस्कार दिया जाएगा. ऐसे में फ्रेंच ओपन का प्रदर्शन इसमें शामिल नहीं हो सकता. अर्जुन पुरस्कार के लिए तीन साल के प्रदर्शन को देखा जाता है. हालांकि अगर खेल मंत्री नाम प्रस्तावित करते हैं, तो फ्रेंच ओपन का प्रदर्शन भी देखा जाएगा, जो नियमों के खिलाफ होगा. ऐसा आमतौर पर मंत्री जी को नाराज न करने के लिए किया जाता है.

इसमें कोई शक नहीं कि रोहन बोपन्ना अर्जुन पुरस्कार के हकदार हैं. लेकिन सवाल यही है कि हर पुरस्कार नियम-कायदों को अलग रखकर देने की कोशिश क्यों होती है. क्यों ये तय नहीं हो सकता कि फेडरेशन हों या मंत्रालय, कोई भी नियम को नहीं तोड़ सकता.

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