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तालाब बचाने को जल सत्याग्रह कर रहे राष्ट्रीय स्तर के करीब 50 तैराक

दुर्ग जिले के पुरई गांव के इस तालाब में निखरी हैं विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले तमाम तैराकों की प्रतिभा

Updated On: Nov 02, 2017 06:20 PM IST

Sachin Shankar

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तालाब बचाने को जल सत्याग्रह कर रहे राष्ट्रीय स्तर के करीब 50 तैराक

सुधा ओझा ने तैराकी की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में तीन स्वर्ण पदक जीते हैं. जबकि निशा ओझा चार बार स्वर्णिम कामयाबी हासिल कर चुकी हैं. वहीं डिलेश्वरी ने तीन स्वर्ण और तीन रजत पदक अपने नाम किए हैं. इनके अलावा ईशू कुमार, केसरी पटेल, लक्ष्मीकांत साहू, गुलशन राजपूत, विजय ओझा, गजेंद्र साहू और अन्य कई ऐसे नाम है. राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न तैराकी प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है. लेकिन इन सबके बीच एक चीज समान है. इन सभी की प्रतिभा छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पुरई गांव के एक तालाब में निखरी है. इस तालाब से अब तक लगभग 80 तैराक ऐसे निकले हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है. पुरई के 50 से ज्यादा तैराक हर साल विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने जाते हैं.

अब इनके सामने एक संकट आ खड़ा हुआ है. जिस तालाब में ये अभ्यास करते थे उसमें गांव के दो गंदे नाले जोड़ दिए गए हैं और इसका इस्तेमाल गांव के मवेशियों के लिए किया जाने लगा है. पानी इतना दूषित हो गया है कि एक बार नहाने से खुजली और त्वचा रोग की आशंका बनने लगी है. पुरई के आस पास के गांव के भी जो बच्चे इसमें अभ्यास करने आने लगे थे, उनके लिए भी परेशानी खड़ी हो गई है.

ये सभी लंबे समय से तालाब को साफ किए जाने की मांग कर रहे थे, जिसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही थी. इन नन्हें व युवा तैराकों को अपने गांव के निवासियों सहित उस इलाके में काम कर रहे एक एनजीओ जनसुनवाई फाउंडेशन का भी साथ मिला. सब मिलकर पंचायत, जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश स्तर तक अपनी शिकायत लेकर गए, लेकिन किसी के कानों पर जूं नहीं रेंगी. मामले का कोई हल न निकलते देखकर ये युवा तैराक इसी तालाब के किनारे जल सत्याग्रह आंदोलन पर बैठ गए. इनकी मांग है कि जब तक तालाब की सफाई नहीं कराई जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा.

जन सुनवाई फाउंडेशन के राज्य समन्वयक संजय मिश्रा का कहना है कि तालाब की सफाई को लेकर प्रशासन उदासीन है. यह रवैया खिलाड़ियों पर भारी पड़ रहा है. बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलें तो वे ओलंपिक पदक भी जीत सकते हैं. बच्चों को तैराकी के गुर सिखाने वाले ओम ओझा का कहना है कि हमने किसी स्वीमिंग पूल की मांग तो रखी नहीं है. हम तो सिर्फ इस तालाब को साफ कराना चाहते हैं ताकि बच्चे अपनी उम्मीदों को परवान चढ़ा सकें.

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गांव वाले भी बच्चों के साथ

जल सत्याग्रह का गुरुवार को तीसरा दिन है. सत्याग्रह कर रहे इन तैराकों में 10 साल से लेकर 25 साल की उम्र के खिलाड़ी शामिल हैं. इनके परिजन, गांव के लोग और आस-पास के गांव वाले भी बच्चों के साथ आ खड़े हुए हैं. आंदोलन के तीसरे दिन छत्तीसगढ़ की अग्रणी समाजसेवी और महिला कमांडों संगठन के लिए ख्यात पद्म पुरस्कार विजेता शमशाद बेगम भी जल सत्याग्रह में शामिल हुईं. उन्होंने कहा कि वह यहां इन बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए आई हैं. ये बच्चे राज्य का नाम रोशन करते आए हैं. अपने गांव के तालाब को बचाने के लिए इनका यह कदम सभी के लिए एक प्रेरणा है. शहर के कुछ चिकित्सक, बुद्धिजीवी, कुछ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, पूर्व खिलाड़ी, सरपंच संघ के अध्यक्ष व सदस्यों सहित 200 से अधिक लोग बच्चों के समर्थन में पहुंचे.

कलेक्टर को जल्द रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

इधर, समाचार पत्रों के हवाले से राज्य सरकार की पहली प्रतिक्रिया भी सामने आई. सचिव, खेल विभाग सोनमणि बोरा ने कहा कि बच्चों के जल सत्याग्रह पर बैठने का पता चलने पर दुर्ग के कलेक्टर को त्वरित निर्देश जारी कर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है. स्थानीय प्रशासन गांव में स्वीमिंग पूल (स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए प्रपोजल बनाकर भेजेगा, तो तुरंत स्वीकृति दे दी जाएगी. वहीं, ग्राम पंचायत ने कहा कि वह इसके लिए ग्राम सभा की जमीन देने के लिए तैयार है. बहरहाल, स्थानीय प्रशासन की ओर से बच्चों से मिलने अब तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है. जिस पर तैराकों का कहना है कि खेल सचिव ने जो बात अखबारों में कही हैं, वे यदि इसका लिखित आश्वासन हमें दे दें तो हमें विश्वास हो जाएगा कि इस बार हमारी बात की अनसुनी नहीं की जा रही है.

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