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अलविदा 2016 : वो लम्हे जो हमेशा याद रहेंगे

रियो ओलिंपिक 2016 में दिल को छू लेने वाले कई पल खेलप्रेमियों को देखने को मिले.

Updated On: Dec 27, 2016 04:07 PM IST

FP Staff

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अलविदा 2016 : वो लम्हे जो हमेशा याद रहेंगे

ओलिंपिक को खेलों का महाकुंभ कहा जाता है. ओलिंपिक में पूरी दुनिया को जानने का मौका मिलता है. खिलाड़ियों को पूरी दुनिया के सामने अपनी काबिलियत दिखाने का मौका मिलता है. ओलिंपिक खेल में कई ऐसे पल आते है जो यादगार बन जाते है. रियो ओलिंपिक 2016 में भी कुछ ऐसे पल आए जिन्होंने हर खेल प्रेमी के दिल पर अपनी छाप छोड़ी.

रिफ्यूजी टीम

रियो ओलिंपिक का सबसे बड़ा पल था, रिफ्यूजी टीम. इस टीम में कई देशों के खिलाड़ी शामिल थे. ये वो देश हैं, जो किन्हीं वजहों से प्रतिबंधित थे या ओलिंपिक में हिस्सा नहीं ले सकते थे.

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10 खिलाड़ियों की इस टीम में से किसी ने कोई मेडल तो नहीं जीता लेकिन उनके प्रदर्शन की तारीफ हर किसी ने की. खासकर कभी हार ना मानने वाले जज्बे को पूरी दुनिया ने सलाम किया. कांगो के मेसेंगा ने ने जूडो प्रतियोगिता में वर्ल्ड चैंपियन को हरा दिया. वहीं सीरिया की युसरा मर्दिनी अपनी तैराकी से सबका ध्यान अपनी और खींचा. युसरा का जीवन कड़े संघर्ष में गुजरा.

सीरिया से ग्रीस जाते वक्त उनकी बोट उलट गई थी. जिसके कारण 20 लोगों की जान जोखिम में आ गई. लेकिन मुर्दिनी ने अपनी तैराकी के कारण करीब 20 लोगों की जान बचाई.

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फिजी ने रग्बी में जीता गोल्ड मेडल

पैसिफिक आईलैंड का छोटा सा देश फिजी. फिजी ने रियो ओलिंपिक में वह उपलब्धि हासिल की जिसका उसे दशकों से इंतजार था. 10 लाख से भी कम आबादी वाले देश ने रग्बी में गोल्ड मेडल जीतकर ओलंपिक इतिहास का अपना पहला पदक हासिल किया. फिजी ने ग्रेट ब्रिटेन को 43-7 से करारी शिकस्त दी. इस जीत के बाद पूरा फिजी खुशी से झूम उठा.

इस ओलिंपिक में फिजी ने अपने से कई मजबूत टीम को हराया. इस जीत के बाद फिजी में राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया. स्वर्ण पदक जीतने का बाद फिजी के खिलाड़ी अपने घर पहुंचे तो इनका हीरो की तरह स्वागत हुआ.

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बोल्ट का फिर दिखा जलवा

उसेन बोल्ट ओलिंपिक इतिहास के सबसे कामयाब खिलाड़ियों में से एक है. बोल्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह कभी खुद पर विश्वास नहीं खोते. पूरी दुनिया उन्हें एक जुझारू खिलाड़ी के तौर पर जानती है. पिछले दो ओलिंपिक की तरह बोल्ट से इस बार भी पदक की उम्मीद थी.

बोल्ट ने अपने फैंस को निराश नहीं किया और लगातार तीसरे ओलंपिक में 100 मीटर और 200 मीटर रेस में गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया. मेडल जीतने के बाद बोल्ट ने कहा कि किसी ने कहा था कि दो और स्वर्ण पदक जीतने के बाद मै अमर हो जाऊंगा. शायद अब पदक जीतने के बाद मै अमर हो जाऊं.

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जोसेफ स्कूलिंग ने रोका फेल्प्स का विजयरथ

रियो ओलिंपिक की तैराकी स्पर्धा में कुछ ऐसा हुआ जिसे देखकर लोग ना केवल आश्चर्यचकित हुए बल्कि लंबे समय तक उन्हें यह पल याद रहेगा. रियो में अपना आखिरी ओलिंपिक खेल रहे विश्व के सर्वश्रेष्ठ तैराक अमेरिका के माइकल फेल्प्स का स्वर्णिम अभियान आखिरकार जोसेफ स्कूलिंग ने थाम लिया.

सिंगापुर के स्कूलिंग ने 100 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. इसके साथ ही उन्होंने सिंगापुर तो ओलिंपिक इतिहास का पहला गोल्ड मेडल जिताया. सबसे खास बाद ये है कि स्कूलिंग माइकल फेल्प्स को ही अपना आइडल मानते है. 2008 में फेल्प्स सिंगापुर में अभ्यास के लिए गए थे, तब स्कूलिंग पहली बार अपने आइडल से मिले थे.

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ब्राजील की फुटबॉल टीम ने घरेलू दर्शकों के सामने जीता गोल्ड

2014 का फुटबॉल वर्ल्ड कप तो आपको याद होगा. जब ब्राजील के स्टार नेमार चोटिल होकर वर्ल्ड कप से बाहर हो गए थे. उसके बाद ब्राजील को जर्मनी के हाथों 7-1 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा. लेकिन दो साल बाद ओलिंपिक के फाइनल मैच में नेमार ने पेनल्टी लगाकर ब्राजील को पहला गोल्ड मेडल जिताया.

ये जीत रियो ओलिंपिक की सबसे यादगार जीत में शुमार हुई. मेजबान ब्राजील ने सभी को चौंकाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया. इस पल के बाद पूरे ब्राजील में जश्न का माहौल था. इस जीत को ब्राजील के इतिहास की सबसे यादगार जीत में शामिल किया गया.

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खेल भावना की बेहतरीन मिसाल

किसी खिलाड़ी के लिए ओलिंपिक सबसे बड़ा मंच होता है. यहां हर खिलाड़ी जी जान लगाकर जीतने की कोशिश करता है. लेकिन क्या आपने सुना है कि कोई एथलीट अपनी हार की परवाह किए बिना अपने विरोधी खिलाड़ी की मदद करे? किसी एथलीट का ऐसा कदम खेल भावना का सबसे बेहतरीन उदाहरण होगा. रियो में भी कुछ ऐसा ही हुआ.

दरअसल ओलिंपिक में महिलाओं की 5000 मीटर की क्वालिफाइंग रेस चल रही थी. पहले 3000 मीटर बिल्कुल नॉर्मल रहा लेकिन इसके बाद अचानक न्यूजीलैंड की निक्की हैम्बलिन अमेरिकी एथलीट ऐबे डि एगोस्टिनो एक दूसरे से टकरा गईं. इस टक्कर में हैम्बिलन चोटिल होकर जख्मी हो गईं. अब एगोस्टिनो चाहतीं तो हैम्बलिन को छोड़ रेस पूरी कर सकती थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. उन्होंने हैम्बलिन को कहा कि उठो, ये रेस हम दोनों एक साथ पूरी करेंगे. इसके बाद दोनों ने एक साथ रेस पूरी की. इसके बाद एगोस्टिनो रेस तो हार गईं लेकिन पूरी दुनिया का दिल उन्होंने जीत लिया.

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मोनिका पुइग ने अपने देश के लिए जीता पहला पदक

प्यूर्तो रिको की मोनिका पुइग ने रियो ओलंपिक में महिला टेनिस के सिंगल में गोल्ड मेडल जीतकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में लिखवा दिया. पुइग ने एंजेलिक कर्बर को 6-4, 4-6, 6-1 को हराकर अपने देश के 68 साल के इतिहास का पहला स्वर्ण पदक जीता.

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अमेरिका की 19 साल की लेडेकी ने तैराकी में जीता गोल्ड

ओलिंपिक में हमेशा से ही कड़े मुकाबले दिखते हैं. खिलाड़ी एक दूसरे को हराने के लिए अपनी जी जान लगा देते हैं. एक ऐसे ही मुकाबले में महिला तैराकी के 400 मीटर की फ्री स्टाइल में देखने को मिला, जिसमें अमेरिका की तैराक कैटी लेडेकी ने 400 मीटर के फाइनल में विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता. 19 साल की लेडेकी ने दूरी तीन मिनट 56.46 सेकेंड में पूरी की.

सबसे खास बात इससे पहले का रिकॉर्ड भी लेडेकी के ही नाम था. लेडेकी ने केवल 15 साल की उम्र में 2012 में हुए लंदन ओलंपिक में 800 मीटर फ्री स्टाइल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था.

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रेस में गिर जाने के बावजूद मो फराह ने जीता गोल्ड

ब्रिटेन के एथलीट मो फराह से हर कोई मेडल की उम्मीद कर रहा था. रियो में भी ब्रिटेन के लंबी दूरी के धावक ने खराब शुरुआत के बाद भी रियो ओलिंपिक के 10 हजार मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीत लिया. यह उनका तीसरा ओलिंपिक गोल्ड है. इससे पहले उन्होंने लंदन ओलिंपिक में 5 हजार और 10 हजार की रेस में भी गोल्ड मेडल भी जीता था.

इस रेस में दो बार के गोल्ड मेडल जीत चुके फराह रेस के बीच में ही गिर पड़े थे, लेकिन उसके बाद वह फिर से खड़े हुए और तेजी दिखाते हुए गोल्ड पर कब्जा जमाया. इस गोल्ड पदक के साथ वह 3 ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले ब्रिटिश धावक बन गए.

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होआंग ने वियतमान को दिलाया इतिहास का पहला पदक

वियतनाम की होआंग वीन ने रियो में वो कारनामा किया जो उनके देश का कोई भी खिलाड़ी आजतक नहीं कर पाया था. होआंग शुआन वीन ने दस मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में जीत हासिल कर अपने देश की झोली में पहला ओलिंपिक पदक डाला. 10 मीटर की स्पर्धा 202.5 के स्कोर के साथ जीती.

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