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पुतिन के खिलाफ विरोध जताने के लिए वर्ल्ड कप फाइनल मैच में ग्राउंड में घुसे थे लोग

फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल में घुसे चारों लोग पुसी रायट नाम के संगठन से जुड़े हैं जो रूस के राष्ट्रपति को तनाशाह मानता है

Updated On: Jul 17, 2018 03:22 PM IST

FP Staff

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पुतिन के खिलाफ विरोध जताने के लिए वर्ल्ड कप फाइनल मैच में ग्राउंड में घुसे थे लोग

मॉस्को में खेले गए फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले के मैदान में घुसने वाले चारों लोगों को 15 दिन की जेल की सजा सुनाई गई है. फाइनल मुकाबले में ये चारों लोग पुलिस की वर्दी पहनकर मैदान पर घुस गए थे. इसके बाद रूस के पुसी रायट संगठन ने ट्वीट करके इसकी जिम्मेदारी ली थी.

15 दिन की जेल के अलावा इस संगठन पर किसी भी स्टेडयिम में मैच देखने को लेकर तीन साल का बैन लगाया गया है. इस ग्रुप पर आरोप लगाया गया है कि इसने नियमों का उल्लंघन किया. इसके अलावा इन पर गैर कानूनी तरीके से पुलिस वर्दी पहनने का भी आरोप है. रविवार को फ्रांस और क्रोएशिया के बीच फाइनल मैच के 53वें मिनट के दौरान फ्रांस टीम के गोल के पीछे से यह चार लोग (तीन महिलाएं एक पुरुष) मैदान पर घुस गए और खिलाड़ियों को हाई फाइव देने लगे. जहां एक ओर कायलिन एम्बाप्पे ने उनमें से एक को ताली दी वहीं क्रोएशिया के डिफेंडर डेजन लेवरेन ने ग्रुप के इकलौते पुरुष को धक्का देकर गिरा दिया था. इसके चलते मैच को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा था.

Soccer Football - World Cup - Final - France v Croatia - Luzhniki Stadium, Moscow, Russia - July 15, 2018 A steward apprehends a pitch invader while Croatia's Dejan Lovren looks on REUTERS/Carl Recine - RC1B863784B0

ट्विटर पर जारी एक पोस्ट में इस ग्रुप ने कहा कि उसने ये सब प्रदर्शन के दौरान अवैध गिरफ्तारी और राजनीतिक कैदियों के लिए किया है. इस प्रदर्शन को उन्होंने पुलिसमैन एंटर द गेम का नाम दिया था. साल 2011 से ही ये विरोधी समूह सक्रिय रहा है. ये राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रशासन के खिलाफ विशेष रूप से मुखर रहा है, जिन्हें ये ग्रुप एक तानाशाह मानता है.

Soccer Football - World Cup - Final - France v Croatia - Luzhniki Stadium, Moscow, Russia - July 15, 2018 A pitch invader, Croatia's Ivan Strinic and France's Kylian Mbappe REUTERS/Darren Staples TPX IMAGES OF THE DAY - RC191A06DCF0

अपनी फेसबुक पोस्ट पर उन्होंने लिखा हम चाहते हैं कि रूस में बोलने की आजादी हो, राजनीतिक कैदियों की आजादी हो आंदोलन करने की आजादी हो. यही संदेश लोगों और पुतिन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने यह तरीका अपनाया, हालांकि उन्हें अफसोस है कि इस वजह से मैच खेल रहे खिलाड़ियों पर फर्क पड़ा.

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