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कप्तान अमरजीत बोले, मैदान पर जीतने के लिए उतरेगी टीम

कप्तान अमरजीत ने कहा, व्यक्तिगत प्रदर्शन ज्यादा मायने नहीं रखता, इस टीम की मजबूती इसकी एकता है

Updated On: Sep 29, 2017 07:37 PM IST

FP Staff

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कप्तान अमरजीत बोले, मैदान पर जीतने के लिए उतरेगी टीम

अमरजीत सिंह कियाम फीफा अंडर-17 विश्व कप के लिए भारतीय टीम के कप्तान चुने जाने से अश्चर्य चकित है. टीम के कोच लुई डि मातोस ने खिलाड़ियों से अंतरिम वोटिंग कराई. जो भी सबसे ज्यादा खिलाड़ियों की पसंद होता उसे ही कप्तान बनाया जाता.

विश्व कप छह से 28 अक्टूबर तक खेला जाएगा, जिसमें भारत के अभियान की शुरुआत पहले दिन ही होगी. ग्रुप चरण के तीनों मैच भारतीय टीम दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में खेलेगी.

अमरजीत ने कहा, ‘जब कोच ने मुझे कहा कि मैं टीम का कप्तान चुना गया हूं तो मैं अश्चर्य चकित था. मेरे लिए यह शानदार अनुभूति थी. लेकिन हम एक टीम की तरह खेलते है, एक टीम की तरह जीतते हैं, टीम की तरह हारते हैं. व्यक्तिगत प्रदर्शन ज्यादा मायने नहीं रखता, इस टीम की मजबूती इसकी एकता है.’ मणिपुर के थाउबाल जिले के हाओखा ममांग गांव के अमरजीत के लिए यहां तक का सफर काफी मुश्किल भरा रहा है. उनके पिता किसान हैं और उनकी फुटबॉल की जरुरतों को पूरा करने के लिए मां मछली बेचती हैं.

अमरजीत ने कहा, ‘मेरे पिता किसान हैं और खाली समय में बढ़ई का काम करते हैं, मेरी मां गांव से 25 किलोमीटर दूर जाकर मछली बेचती हैं ताकि मेरा फुटबॉल खेलने का सपना पूरा हो सके.’ कप्तानी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, ‘टीम में जब जरूरत होती है, मैं तभी बोलता हूं. अगर जरूरी नहीं हुआ तो मैं नहीं बोलता हूं.’

अमरजीत से जब ग्रुप ए की दूसरी मजबूत टीमों अमेरिका, कोलंबिया और पूर्व चैंपियन घाना से मुकाबले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मेजबान देश के तौर पर भारत इस विश्वकप में दमदार प्रदर्शन करेगा. विश्वकप में भाग लेने वाली हर टीम की अपनी चुनौती है. हम अपनी विरोधी टीम का सम्मान करते हैं, वे कड़े विरोधी होंगे, लेकिन हम जीतने के लिए खेलेंगे और मैच के आखिरी पलों तक हम लड़ेंगे. ’ फुटबॉल के प्रति जुनूनी राज्य में जन्म लेने वाले इस खिलाड़ी ने बचपन से ही देश के लिए खेलने का सपना देखा है जो इस विश्वकप के साथ पूरा होने वाला है.

उन्होंने कहा, ‘मैं सोचता था कि एक दिन देश का प्रतिनिधित्व करूंगा और अब मैं अंडर-17 विश्व कप में खेलने वाला हूं. मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा क्योंकि यह सपने की तरह है.’ अमरजीत ने स्कूल के दिनों में फुटबॉल खेलना शुरू किया था और 2010 में वह चंडीगढ़ स्थित फुटबॉल अकादमी में गए जहां खेलने के अलावा उन्हें मुफ्त में रहने और पढ़ने की सुविधा भी मिली.

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