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मेडिकल टीम का दावा, भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों की फिटनेस में बहुत सुधार हुआ है

भारतीय टीम ने पिछले कुछ वर्षो में शानदार प्रदर्शन किया है और इसके पीछे खिलाड़ियों की फिटनेस ने बड़ी भूमिका निभाई है

Updated On: Jan 12, 2019 08:28 PM IST

FP Staff

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मेडिकल टीम का दावा, भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों की फिटनेस में बहुत सुधार हुआ है

भारतीय फुटबॉल टीम के कोच स्टीफन कांस्टेनटाइन हमेशा इस बात पर बल देते हैं कि स्पर्धी बने रहने के लिए खिलाड़ियों की फिटनेस महत्वपूर्ण होती है. भारतीय टीम ने पिछले कुछ वर्षो में शानदार प्रदर्शन किया है और इसके पीछे खिलाड़ियों की फिटनेस ने बड़ी भूमिका निभाई है. लेकिन इस काम को अंजाम देने के लिए किसी भी टीम को ऐसी मेडिकल टीम की जरूरत होती है जो बिना थके काम करती रही. भारत सोमवार को बहरीन के खिलाफ एशियन कप के ग्रुप स्तर में अपना आखिरी मैच खेलेगा.

लेकिन भारत के पास ऐसी मेडिकल टीम है जो आधी रात हो या सुबह की पहली बेला वो फुटबॉल खिलाड़ियों के साथ काम करती रहती है. राष्ट्रीय टीम की मेडिकल टीम में डॉ. शेरविन शेरिफ, फिजियोथेरेपिस्ट गिगी जॉर्ज और प्रतीक कांबले हैं जो ब्लू टाइगर्स (भारतीय टीम के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द) को मुकाबलों से पहले पूरी तरह तैयार रखता है.

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अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) के अनुसार टीम के फिजियोथेरेपिस्ट गिगी जॉर्ज भी मानते हां कि खिलाड़ियों ने अपनी फिटनेस को बेहतर या है. गिगी जॉर्ज 2011 से भारतीय टीम के साथ है और हर दिन को एक नई चुनौती के रूप में देखते हैं

गिगी ने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षो में खिलाड़ियों की फिटनेस बेहतर हुई है. आप जेजे लालपेखलुआ का उदहारण ले सकते हैं. उन्होंने 2012 में भारत के लिए पहला मैच खेला था और तब से लेकर अब तक उन्होंने शारीरिक रूप से खुद को बेहतर किया है. हम एआईएफएफ का भी धन्यवाद देना चाहेंगे जिन्होंने हमें फिजियोथेरेपी के लिए नए उपकरण मुहैया कराए. डैनी डिएगन और जोल कार्टर द्वारा लाए गए स्पोर्ट्स साइंस से भी अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं.’

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मेडिकल टीम के डॉ. शेरिफ ने कहा, ‘कार्यक्रम पहले ही तय कर लिया जाता है. हमारी सुबह की शुरुआत स्क्रीनिंग से साथ होती है. स्क्रीनिंग परिणामों के आधार पर, खिलाड़ियों की उनकी आवश्यकताओं के अनुसार जांच की जाती है. प्रशिक्षण सत्रों के दौरान हम प्रत्येक खिलाड़ी को ट्रैक करते हैं और कार्रवार्इ करते हैं.’

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