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फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप: क्या ग्रुप ऑफ डेथ से बाहर निकल पाएगा भारत!

छह अक्टूबर से होने वाले वर्ल्ड कप में भारत को ग्रुप ए में रखा गया है, उसके साथ  कोलंबिया, घाना और अमेरिका जैसी मजबूत टीमें हैं

Sachin Srivastava Updated On: Sep 29, 2017 08:29 PM IST

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फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप: क्या ग्रुप ऑफ डेथ से बाहर निकल पाएगा भारत!

बस कुछ दिनों की तो बात है. फिर तो आपको लगने लगेगा कि पूरा हिंदुस्तान ही फुटबॉल में तब्दील हो गया है. भले ही आप क्रिकेट पसंद करते होंलेकिन एक सीमा के बाद आप फुटबॉल की गिरफ्त में आने से खुद को रोक नहीं पाएंगे. पर भला क्यों. वो इसलिए क्योंकि छह अक्टूबर से भारत में फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप शुरू हो जाएगाजिसमें दुनिया भर की 24 टीमें खिताब के लिए आपस में टकराएंगी. भारत पहली बार फीफा की किसी प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा. ब्राजील,नाइजीरियाइंग्लैंडजर्मनीस्पेन और फ्रांस जैसे दिग्गजों के बीच अपनी सरजमीं पर होने वाली इस वैश्विक प्रतियोगिता में भारतीय टीम पर सबकी नजर रहेगी. मेजबान टीम को ग्रुप ए में रखा गया है. उसके ग्रुप में कोलंबियाघाना और अमेरिका भी हैं. पहले बात इसी ग्रुप की.

पहली बार दिखेगा भारत का दम

अन्य टीमों को देखते हुए इस ग्रुप को कठिन माना जा रहा है. घाना दो बार की चैंपियन है और तीसरी बार खिताब जीतने के इरादे से भारत में खेलेगी. कोलंबिया और अमेरिका भी किसी से कम नहीं हैं. मुश्किल ग्रुप मिलने के बावजूद भारतीय टीम के कोच लुइस नॉर्टन डी माटोस का मानना है कि टीम का मनोबल काफी ऊंचा है. कोच ने कहा कि हमारे खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हमारी टीम आत्मविश्वास से लबरेज है और अपने दर्शकों के सामने नॉकआउट चरण में पहुंचने के लिए बेताब है.

माटोस के अनुसार भारतीय खिलाड़ियों को पूरे 90 मिनट अपनी एकाग्रता को बनाए रखना होगा. आज फुटबॉल में यह बहुत जरूरी है. मैंने अपने खिलाड़ियों को यही बताया है कि अपनी एकाग्रता बनाए रखें और मौके मिलने का इंतजार करें.

amarjeet kiyam

 भारत के पूर्व दिग्गज फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया को लगता है कि इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट से देश को फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ाने की मुहिम में मदद मिलेगी. अगर खिलाड़ी अच्छे परिणाम हासिल करते हैं तो यह देश और खिलाड़ियों के लिए भविष्य में और बेहतर करने के लिए प्रेरणादायी साबित होगा.

फुटबॉल की विश्व नियामक संस्था फीफा के अध्यक्ष गियानी इंफैनटिनो का मानना है कि फीफा अंडर-17 विश्व कप अपनी परिभाषा के अनुसार भारत के युवा खिलाड़ियों के लिए वैश्विक स्तर का अनुभव प्राप्त करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

भारतीय टीम में चुने गए ज्यादातर खिलाड़ियों की संघर्ष की अपनी ही दास्तां है. टीम के 21 खिलाड़ियों में से ज्यादातर ने अपने अभिभावकों को जीवनयापन के लिए संघर्ष करते देखा है. बावजूद इसके वे इस खेल में देश का प्रतिनिधित्व करने के अपने सपने को पूरा करने के करीब हैं.

घाना है दो बार का चैंपियन

घाना इस ग्रुप में सबसे मुश्किल टीम है. उसने फीफा अंडर-17 टूर्नामेंट में आठ बार भाग लिया है. घाना ने 1991 और 1995 में दो बार विश्व कप जीता है. उसकी विश्व रैंकिंग पांच है.

दो बार तीसरे स्थान पर रहा कोलंबिया

कोलंबिया ने फीफा अंडर-17 टूर्नामेंट में पांच बार भाग लिया है. इस टूर्नामेंट में इस टीम ने अपना सर्वश्रेष्ठ 2003 और 2009 में दिया. दोनों ही बार यह टीम तीसरे स्थान पर रही. हालांकि 2009 के बाद बीच के वर्षों में टीम इस टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रही.

चौथे स्थान से आगे बढ़ना चाहेगा अमेरिका

अमेरिका ने फीफा अंडर-17 टूर्नामेंट में 15 बार भाग लिया है. इस टूर्नामेंट में उसका बेस्ट 1999 में आयाजब इसने चौथा स्थान हासिल किया. इसके अलावा यह टीम चार बार क्वार्टर फाइनल में भी जगह बनाने में सफल रही.

ग्रुप ए मुकाबले

6 अक्टूबर

कोलंबिया बनाम घाना - शाम 5 बजे सेनई दिल्ली

भारत बनाम अमेरिका- शाम 8 बजे सेनई दिल्ली

9 अक्टूबर

घाना बनाम अमेरिका- शाम 5 बजे सेनई दिल्ली

भारत बनाम कोलंबिया- शाम 8 बजे सेनई दिल्ली

12 अक्टूबर

भारत बनाम घाना - शाम 8 बजे सेनई दिल्ली

अमेरिका बनाम कोलंबिया - शाम 8 बजे सेनवी मुंबई

(सभी मैचों का समय भारतीय समयानुसार)

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