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बर्थडे स्पेशल : ... तो दुनिया वंचित रह जाती पेले का हुनर देखने से

1958 विश्व कप से पहले ब्राजीली टीम के डॉक्टर ने कहा था कि कोच पेले को टीम में शामिल न करें

Updated On: Oct 23, 2017 02:29 PM IST

Sachin Shankar

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बर्थडे स्पेशल : ... तो दुनिया वंचित रह जाती पेले का हुनर देखने से

यह 1958 विश्व कप से पहले का वाकया है. ब्राजीली फुटबॉल टीम के मनोवैज्ञानिक डॉक्टर जोओ कार्वालहेस ने स्वीडन जाने से पहले अपनी रिपोर्ट में लिखा था, ‘पेले अभी बच्चा है. उसमें जुझारूपन नहीं है और आक्रामक बनने के लिए अभी उसकी उम्र बहुत कम है.

इसके अलावा टीम भावना के लिए जरूरी जिम्मेदारी का अहसास भी उसमें नहीं है.’ उन्होंने कोच विंसेंटे फेओला को सलाह दी थी कि वह पेले को टीम में शामिल नहीं करें. अगर कोच फेओला ने कार्वालहेस की सलाह पर गौर किया होता तो शायद दुनिया फुटबॉल के जादूगर पेले का हुनर देखने से वंचित ही रह जाती.

पेले और फुटबॉल जगत की यह खुशकिस्मती रही कि फेओलो ने डॉक्टर जोओ की सलाह अनसुनी कर दी और सोवियत संघ के खिलाफ टूर्नामेंट के तीसरे मैच में इस नन्हें जादूगर को उतारा. इसके बाद जो कुछ हुआ वह इतिहास में दर्ज हो चुका है. पेले ने ब्राजील के बाकी सारे मैच खेले और चार मैचों में छह गोल दागे. दक्षिण अमेरिकी टीम ने अपना पहला विश्व कप इस नन्हें तूफान के दम पर जीता.

17 बरस के पेले ने 1957 में माराकाना स्टेडियम में एक नुमाइशी मैच के दौरान चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और अर्जेन्टीना के खिलाफ दो मैचों के लिए उन्हें ब्राजील की टीम में जगह मिल गई. दोनों मैचों में गोल करने के बावजूद उन्हें विश्व कप 1958 की टीम में चुनने को लेकर बहस जारी रही.

कइयों का कहना था कि वह अभी बच्चा है और उसे 1962 विश्व कप तक इंतजार करना चाहिए. वहीं, ब्राजील फुटबॉल महासंघ के प्रमुख जोओ हावेलांजे समेत एक धड़े का कहना था कि पेलेे को स्वीडन में खेलना चाहिए. पेले के प्रशंसक फेओला ने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और पेले को टीम में शामिल कर लिया.

सोवियत संघ के खिलाफ मैच में पेले खुद तो गोल नहीं कर सके, लेकिन वावा के गोल के सूत्रधार जरूर बने. मैच दर मैच मजबूत होते पेले ने वेल्स के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में एकमात्र विजयी गोल किया. वहीं,सेमीफाइनल में उन्होंने फ्रांस के खिलाफ हैट्रिक जमाई. आखिरी मैच में पेले ने स्वीडन के खिलाफ दो गोल और किए. आखिरी हूटर बजने से पहले ही पेले जमीन पर गिर पड़े. साथी खिलाडिय़ों ने आकर उन्हें कंधों पर उठा लिया.

खेल कोई भी हो महानता ही अंतिम पैमाना है. पेले का उस दिशा में यह पहला कदम था. उसके बाद उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि साओ पाउलो में लोग बताते थे कि अगर पेले की मुलाकात पोप से होगी तो भीड़ पेले की वजह से आएगी. फुटबॉल के जादूगर नाम से विख्यात हुए पेले ने फुटबॉल की दुनिया में जो नाम कमाया है वो अविश्वसनीय है.

Pele

ब्राजील ने सबसे ज्यादा पांच बार विश्व कप जीता है, जिनमें से तीन बार विजेता टीम में पेले भी शामिल रहे. 1958, 1962 और 1970 में जब ब्राजील ने विश्व खिताब जीता, तो पेले टीम का हिस्सा थे. उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 1281 गोल किए.

पेले ने ब्राजील के लिए कुल 91 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 91 गोल किए. फुटबॉल से संन्यास लेने के बाद भी पेले फुटबॉल और पर्यावरण संबंधी मामलों से जुड़े रहे. 1992 में संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें पारिस्थितिकी और पर्यावरण दूत बनाया. इसके अलावा वह ब्राजील में खेल मामलों के एक्स्ट्राऑर्डिनरी मंत्री भी बनाए जा चुके हैं.

पेले के पैरों में असाधारण संतुलन था और ये दोनों पैरों से समान रूप से खेलने में माहिर थे.| इनकी रफ्तार इतनी तेज थी कि फुटबॉल को जल्दी काबू में ले लेते थे. कठिन से कठिन अवसर पर भी उन्होंने कभी अपना धैर्य नही खोया.

इनके बारे में कुछ ऐसी कहानिया भी प्रचलित हैं कि पेले अपनी पुरी ताकत से फाल्स जम्प लगाते थे और इनकी नजर बॉल पर टिकी रहती थी. इस तरह छकाकर ये गोल मार ही लेते थे.  विपक्षी टीम का पूरा ध्यान पेले पर लगा रहता था.

कैसे एडसन अरांतेज डू नासिमेंटो बने पेले

फुटबॉल के इस जादूगर का असली नाम एडिसन अरांतेज डू नासिमेंटो है. यह नाम उनके परिवार वालों ने फेमस साइंटिस्ट थॉमस एडिसन के नाम पर रखा था. लेकिन परिवार वालों ने बाद में उनके नाम से आई शब्द को हटा लिया जिसके बाद एडिसन अरांतेज डू नासिमेंटो बन गए एडसन अरांतेज डू नासिमेंटो. वैसे प्यार से परिवार वाले उनको 'डिको' के नाम से बुलाते थे.

जब पेले 3 -4 साल के थे तब उनके पिता डॉनडिन्हो ने उन्हें फुटबॉल ट्रेनिंग में दाखिला करा दिया था. पेले के पिता जो खुद सेमी प्रफेशनल फुटबॉलर रह चुके थे उनकी टीम में एक साथी गोलकीपर का नाम 'बिली था.

पेले बचपन में जब फुटबॉल खेलते और गोल करने में सफल रहते तो लोग चुटकी लेकर कहते, क्या कमाल का गोल किया है 'बिली, क्या शॉट खेला है बिली या फिर वह गोल रोकने में सफल रहते तो लोग कहते,  “क्या कमाल का गोल रोका है बिली.“ दरअसल बिली एक शानदार गोलकीपर थे. बचपन में वह चहेते फुटबॉलर 'बिली' के नाम का ठीक से उच्चारण नहीं कर पाते थे और उन्हें 'पिले ' कह कर पुकारते. जिसके बाद सभी उन्हें पेले कहकर बुलाने लगे.

रचाईं तीन शादियां

पेले ने तीन बार शादी की. वह पिछले साल मार्सिया चेबेले के साथ विवाह बंधन में बंधे. पेले 1980 में मार्सिया से न्यूयार्क में मिले थे, लेकिन दोनों के बीच 2010 में डेटिंग शुरू हुई. मार्सिया बिजनेस वुमन हैं, जो मूलत: जापान की हैं और ब्राजील में रहती हैं. इससे पहले पेले ने रोसमेरी चोलबी के साथ विवाह किया था और उनसे उनके तीन बच्चे है.

इसके बाद उन्होंने अभिनेत्री एसिरिया नासीमेंटो से शादी रचाई और उनसे उनके दो बच्चे हुए. पेले का कहना है कि अगर मैं एक दिन मर जाऊं तो मैं ख़ुशी से जाऊंगा, क्योंकि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश की. मेरे खेल ने मुझे ऐसा करने दिया क्योंकि ये दुनिया का सबसे बड़ा खेल है. फुटबॉल दुनिया का सबसे बड़ा खेल है तो पेले इस खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी.

 

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