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आजादी के दिन सस्पेंड करके बीसीसीआई ने कैसे किया पठान को ‘आजाद’

12 अप्रैल को टेस्ट के नतीजे आने के बाद बीसीसीआई ने क्यों किया 27 अक्टूबर तक इंतजार, निलंबन की तारीख 15 अगस्त से क्यों...

Updated On: Jan 09, 2018 04:01 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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आजादी के दिन सस्पेंड करके बीसीसीआई ने कैसे किया पठान को ‘आजाद’

महज चंद घटनाओं पर गौर करें. इसमें कुछ भी ऐसा नहीं है, जो फैक्ट से अलग हो. 16 मार्च 2017 का दिन था. यूसुफ पठान ने एक सिरप लिया. दो-दो चम्मच सिरप वो 13 मार्च की शाम से ले रहे थे. वो दिल्ली में थे, जहां विजय हजारे ट्रॉफी के मैच खेले जा रहे थे. 16 मार्च को ही उनका डोप टेस्ट हुआ. वो डोप टेस्ट में फेल हो गए. ए सैंपल की रिपोर्ट 12 अप्रैल को आ गई. उसी रोज पता चल गया कि यूसुफ पठान के सैंपल में टरब्यूटलाइन है. यह पदार्थ वाडा की तरफ से बैन है.

यहां तक सब ठीक है. इसके बाद बीसीसीआई ने 27 अक्टूबर तक इंतजार किया. यहां से उन पर कार्रवाई शुरू की गई. उन्हें औपचारिक नोटिस भेजा गया. कार्यवाही पूरी होने तक उन पर किसी भी भी तरह की क्रिकेट में हिस्सा लेने से रोक लगा दी गई.

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8 जनवरी को फैसला किया गया. फैसला यह किया गया कि यूसुफ पठान पर पांच महीने का प्रतिबंध लगा. पांच महीने 15 अगस्त से शुरू हुए. इसकी कोई जानकारी नहीं है कि 15 अगस्त यानी देश को आजादी मिलने की तारीख क्यों चुनी गई. लेकिन इससे एक फायदा जरूर हुआ है. फायदा यह है कि सस्पेंशन या निलंबन 14 जनवरी की आधी रात को खत्म हो गया, जिसके बाद यूसुफ पठान पर आईपीएल में हिस्सा लेने पर कोई रोक नहीं है.

बीसीसीआई की जांच को लेकर हैं तमाम सवाल

इस पूरी जांच प्रक्रिया में कई पेंच हैं. अगर ए सैंपल की रिपोर्ट 12 अप्रैल को आ गई थी, तो बीसीसीआई ने छह महीने तक इंतजार क्यों किया. 27 अक्टूबर तक इंतजार करके नोटिस भेजा गया. इस दौरान यूसुफ पठान आजाद रहे. उन्होंने रणजी ट्रॉफी में भी हिस्सा लिया. 12 अप्रैल को सैंपल का रिजल्ट आया. उसके बाद यूसुफ पठान 17 मई तक केकेआर के लिए आईपीएल मे खेलते रहे. फिर वो रणजी ट्रॉफी खेलने लगे. उन्होंने मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश के खिलाफ मैच खेले. ये सब होता रहा, जब बीसीसीआई को पता था कि यूसुफ पठान डोप टेस्ट में फेल हो चुके हैं.

उसके बाद 27 अक्टूबर को नोटिस भेजे जाने का फैसला हुआ. 28 अक्टूबर से उन पर रोक लगा दी गई. फिर हियरिंग हुई. हियरिंग भी कमाल की है. बीसीसीआई की रिपोर्ट में पेज नंबर चार पर जिक्र है कि यूसुफ पठान के साथ हुआ पूरा मामला क्या है. आप भी जानिए.

यूसुफ पठान बीमार हुए. उन्हें देखने डॉक्टर अनिल कुमार आए, जो उस होटल के कंसल्टिंग डॉक्टर हैं, जहां बड़ौदा टीम रुकी हुई थी. डॉक्टर ने कुछ दवाएं लिखीं. टीम मैनेजर देव जाधव ने रिसेप्शन पर फोन करके दवाएं लाने के लिए किसी को भेजने को कहा. होटल का एक कर्मचारी बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल से दवाएं लाया. सारी दवाएं मिल गईं. एक (जीट एक्सपेक्टोरेंट) नहीं मिली. जितनी दवाएं लिखी गई थीं, उनमें से किसी में ऐसा कोई पदार्थ नहीं था, जो वाडा ने बैन किया हो.

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न दवा याद, न केमिस्ट, न वो शख्स जो दवा लाया

इसके बाद किसी और कर्मचारी को (नाम यूसुफ पठान या देव जाधव को याद नहीं) किसी और केमिस्ट से दवा लेने के लिए भेजा गया. केमिस्ट ने कोई और कफ सिरप दे दिया. देव जाधव ने वही सिरप बाकी दवाओं के साथ यूसुफ पठान को दिया. जाधव के मुताबिक – बगैर यह बताए कि सिरप कोई और है. यही सिरप पठान पीते रहे.

दिलचस्प है कि अब जो कर्मचारी सिरप लाया, उसका नाम याद नहीं है. जिस केमिस्ट से दवा ली गई, उसका नाम याद नहीं है. सिरप कौन सा था, उसका नाम याद नहीं है. हालांकि यूसुफ पठान ने अंदाज से एक और सिरप का नाम बताया, जिसका नाम ब्रो जीट है. इसमें टरब्यूटलाइन होता है.

जो दवाएं पठान ने लीं, वो आमतौर पर अस्थमा जैसी बीमारियों के लिए होती हैं. बीसीसीआई ने पठान की सारी बातों को माना और उनकी पहली गलती को ध्यान में रखते हुए कम समय के लिए निलंबित करने का फैसला किया. सही है, यूसुफ पठान को लेकर रहम के बारे में सोचा जा सकता है. लेकिन कम से कम एक्शन इस तरह होना चाहिए कि उसमें किसी तरह बेईमानी की बू न आए. ऐसा नहीं हुआ है. सस्पेंशन का समय 15 अगस्त से 14 जनवरी होगा, इसे लेकर लगता है, बड़े ध्यान से सोचा गया है. अगर अक्टूबर से प्रतिबंध लगाया जाता, तो पठान के लिए आईपीएल ऑक्शन तक बरी हो पाना संभव नहीं होता.

गलती से दवा लेने के और भी हैं मामले, लेकिन तब एक्शन जल्दी हुआ

ध्यान दीजिए, इसी तरह के दो मामले भारतीय खेलों में और हुए हैं. एक मामला अपर्णा पोपट का था. उन्होंने डी कोल्ड टोटल ली थी. उन्होंने यह स्वीकार भी किया था. 13 से 20 फरवरी 2000 के बीच उनका सैंपल लिया गया. मार्च में फैसला आया और 13 मार्च से उन पर तीन महीने का प्रतिबंध लगा दिया गया. उसमें भी यही पाया गया था कि अपर्णा पोपट ने गलती से दवा ले ली थी. फुटबॉलर सुब्रत पॉल को इसी प्रतिबंधित पदार्थ को लेने का दोषी पाया गया था. तब भी कार्रवाई तेजी से हुई थी. उसके बाद प्रोविजनल सस्पेंशन हटाया भी गया था.

यूसुफ पठान के मामले में समस्या कम सजा के साथ छोड़ने पर नहीं है. बल्कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है. यहां दबाव पड़ने के बाद कार्रवाई करने का फैसला हुआ. लेकिन ऐसा लगता है कि उसमें देखा गया कि सजा की तारीख कैसी रखी जाए. इसी के बाद आजादी की तारीख तय हुई और पठान आईपीएल के लिए आजाद हो गए. अब उनकी आजादी के खिलाफ या तो आईसीसी अपील कर सकता है या वाडा. ऐसा लगता नहीं कि आईसीसी अपील करेगा. क्या वाडा एक्शन लेगा?

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