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क्या टीम इंडिया के लिए हादसों भरा रहेगा केपटाउन और सेंचुरियन वाया नागपुर-दिल्ली जाना!

भारतीय कप्तान ने दक्षिण अफ्रीका के दौरे को ध्यान रखते हुए पिचों की मांग की लेकिन आखिरी दो टेस्ट में इसका कोई फायदा नहीं हुआ

Updated On: Dec 05, 2017 12:30 PM IST

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu

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क्या टीम इंडिया के लिए हादसों भरा रहेगा केपटाउन और सेंचुरियन वाया नागपुर-दिल्ली जाना!

कोलकाता टेस्ट में हरी पिच पर चार स्लिप व दो गली वाली फील्डिंग थी. वैसी क्रिकेट के बीच मैच अच्छी स्थिति के साथ खत्म करने के बाद भारतीय टीम प्रबंधन का जोश देखने लायक था.

कप्तान कोहली की मांग पर बनी कोलकाता की पिच 

मैच खत्म होने के बाद कप्तान विराट कोहली से पूछा गया कि क्या तेज गेंदबाजी के लिए उपयुक्त पिच पर खेलने का फैसला दक्षिण अफ्रीका के दौरे की तैयारी की हिस्सा था?

कप्तान का जवाब था कि सीरीज खत्म होने के दो दिन बाद ही टीम को दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर जाना है. टीम के पास तैयारी के लिए समय ही नहीं है. इसलिए उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था.

कप्तान के जवाब से लगना लाजिमी है कि जैसे टीम प्रबंधन ने ही कोलकाता में ऐसी पिच की मांग की जिस पर तेज गेंदबाज ही सारी विकेट ले गए और टेस्ट क्रिकेट के भारतीय इतिहास में पहली बार किसी स्पिनर को कोई विकेट नहीं मिला.

नागपुर और दिल्ली में नहीं चल पाए तेज गेंदबाज

नागपुर टेस्ट शुरू होने से पहले ही ग्रीन टॉप और बाउंसी ट्रैक जैसे शब्द अखबारी रिपोर्टों में आने लगे. गलती लिखने वालों की भी नहीं है क्योंकि कप्तान ही कह रहे थे कि टीम ने ही ऐसी पिचें मांगी हैं.

लेकिन हुआ क्या! नागपुर में इशांत को पहली पारी में नई गेंद से तीन विकेट जरूर मिले. बाकी आर अश्विन और रवींद्र जडेजा ने आपस में  बांट लिए. 79.1  ओवर की उस पारी में 49 ओवर इन दोनों ने डाले.

नागपुर की उस ‘ग्रीन’  व ‘बाउंसी’ पिच पर दूसरी पारी में अश्विन नई गेंद से दूसरे ओवर में बॉलिंग करने आए. अश्विन के नाम श्रीलंका के चार रहे और जडेजा दो विकेट ले गए. साफ है कि कप्तान ने कोलकाता टेस्ट मैच के बाद जो कहा, वह इस टेस्ट मैच  में दिखाई नहीं दिया और न ही दिल्ली टेस्ट के नतीजे में इसकी झलक दिखी.

pitch

कोटला में तो पहले तीन दिन घुटने से नीचे आ रही गेंदबाजी के सामने श्रीलंका के दो बल्लेबाज शतक बनाने में सफल रहे. मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा कई मौकों पर 142 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से गेंद फेंक गए. लेकिन इसका ज्यादा फायदा उन्हें नहीं मिला. दूसरी नई गेंद लेने के बाद पहली ही बॉल पर रोहित शर्मा ने स्लिप में एंजेलो मैथ्यूज के छूटे कैच को छोड़ दे तो लगा नहीं कि यह पिच कोलकाता के मुकाबले ही है.

सवाल यह उठता है कि अगर टीम प्रबंधन ने कोलकाता टेस्ट की पिच दक्षिण अफ्रीका के दौरे को ध्यान में रखते हुए तैयार की थी तो नागपुर और दिल्ली में क्या हुआ!

साउथ अफ्रीका में वाकई में मिलेगा ऐसी पिचों का फायदा

साफ दिख रहा है कि कोलकाता की पिच टीम इंडिया के लिए हैरानी की सबब था और नागपुर व दिल्ली में उसका वास्तविकता में लौटना जैसा. क्योंकि कोई भी भारतीय कप्तान अपने घर में मैच हारने का खतरा मोल नहीं ले सकता.

कोटला में भारतीय कप्तान दोहरा शतक बना कर गए हैं और तीन टेस्ट मैचों में भारत की ओर से छह बल्लेबाज शतक लगा चुके हैं. इन रनों का इस महीने से शुरू हो रहे दक्षिण अफ्रीका के दौरे के दौरान क्या फायदा मिलने वाला है, इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा.

AUCKLAND, NEW ZEALAND - MARCH 04: AB de Villiers of South Africa shares a laugh with teammates after winning game five of the One Day International series between New Zealand and South Africa at Eden Park on March 4, 2017 in Auckland, New Zealand. (Photo by Anthony Au-Yeung/Getty Images)

लेकिन नागपुर व दिल्ली की पिचों को देख कर साफ दिख रहा है कि दक्षिण अफ्रीका के दौरे की तैयारी से ज्यादा टीम इंडिया के जेहन से घर पर अपने रिकॉर्ड को किसी भी तरह से खराब न होने की मानसिकता बनी हुई है. इसमें कोई शक ही नहीं कि इस कारण टीम को दक्षिण में नुकसान उठाना पड़ सकता है.

दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत 5 जनवरी से केपटाउन में पहला टेस्ट मैच खेलना है जबकि दूसरा टेस्ट मैच 13 जनवरी से सेंचुरियन  में होगा. तीसरा टेस्ट जोहानिसबर्ग में खेला जाएगा.

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