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आखिर क्यों जरूरी था वेस्टइंडीज का विश्व कप के लिए क्वालिफाई करना

क्वालिफायर मैच में डकवर्थ लुईस प्रणाली के आधार पर स्कॉटलैंड को पांच रन से हराकर अपने प्रशंसकों को राहत पहुंचाई

Sachin Shankar Updated On: Mar 22, 2018 04:00 PM IST

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आखिर क्यों जरूरी था वेस्टइंडीज का विश्व कप के लिए क्वालिफाई करना

वेस्टइंडीज ने स्कॉटलैंड को हराकर 2019 में होने वाले  वर्ल्ड कप में प्रवेश कर लिया है. वेस्टइंडीज ने जैसे ही डकवर्थ लुइस प्रणाली के आधार पर स्कॉटलैंड को हराया, वैसे ही न सिर्फ कैरेबियाई टीम के प्रशंसक, बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान आ गई. भला आए भी क्यों न, यह टीम दुनिया के हर एक खेल प्रेमी की पसंदीदा टीमों में से एक जो है. जिस तरह ब्राजील के बिना फुटबॉल और भारत के बिना हॉकी की कल्पना नहीं की जा सकती. ठीक उसी तरह वेस्टइंडीज के बिना क्रिकेट भी मानो अधूरा है. जब वेस्टइंडीज क्वालिफाई मुकाबलों में उतरी थी तो हर किसी के दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि दो बार की विश्व विजेता को क्वालिफाइ करने की क्या जरूरत है, लेकिन उनके लिए यह मैच कितने अहम थे, उनका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2017 में इंग्लैंड में हुई चैंपियंस ट्रॉफी में भी खेलने को लेकर कैरेबियाई टीम तरस गई थी. विश्व क्रिकेट में इससे बड़ा विरोधाभास क्या होगा कि दो बार की चैंपियन रही वेस्टइंडीज टीम को 2019 में होने वाले विश्व कप में जगह बनाने के लिए क्वालिफायर मुकाबलों में खेलना पड़ा.

  वेस्टइंडीज पर गिरी थी आईसीसी फैसले की सबसे बुरी गाज

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अगले विश्व कप को दस टीमों तक सीमित रखने के विवादित फैसले की सबसे बुरी गाज 1975 और 1979 के चैंपियन वेस्टइंडीज पर ही गिरी है. विश्व कप 2007 में 16 टीमों ने भाग लिया था, जबकि 2011 और 2015 में 14 टीमें ही खेली थीं. अभी तक शीर्ष आठ टीमों की ही 47 दिन तक इंग्लैंड और वेल्स में चलने वाले इस टूर्नामेंट में जगह पक्की थी. कभी अपने तेज गेंदबाजों के दम पर दुनिया भर के बल्लेबाजों के अंदर खौफ भर देने वाली टीम इस समय दुनिया की टॉप आठ टीमों में शामिल नहीं है. वेस्टइंडीज को इसीलिए क्वालिफायर खेलना पड़ा. विश्व कप क्वालिफायर अभ्यास मैच में ही जब उसे अफगानिस्तान की टीम ने हरा दिया तो वो कैसे खेल पाएगी, इस पर सवाल उठने लगे थे.

दो बार वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम करने वाली वेस्टइंडीज की टीमों को आज भी सबसे महान टीमों की श्रेणी में रखा जाता है. इन टीमों ने अपने आत्मविश्वास और काबिलियत के दम पर अपने राष्ट्र के प्रति पूर्वाग्रहों को तोड़ा था. वेस्टइंडीज का खेल आपको एक अलग अहसास कराता है. निश्चित तौर पर वो ऑस्ट्रेलिया के मशीनी क्रिकेट से जुदा है. कैरेबियाई क्रिकेट उसी तरह सबको आकर्षित करता है, जैसे सांबा धुन पर विरोधियों को नचाती ब्राजीली फुटबॉल टीम. इसी वजह से विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं में जब किसी देश की टीम बाहर हो जाती है तो उसके प्रशंसक वेस्टइंडीज का समर्थन करने लगते हैं.

क्रिकेट को रोमांचक बनाने के लिए कैरेबियाई क्रिकेट को बचाना जरूरी

वेस्टइंडीज ने एक से बढ़कर एक खिलाड़ी दुनिया को दिए हैं. गैरी सोबर्स, एंडी राबर्टस, मैल्कम मार्शल, क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्डस और ब्रायन लारा तक उसके महान खिलाड़ियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. रोहन कन्हाई का तो भारत के महान सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर इतना सम्मान करते थे कि उन्होंने अपने बेटे का नाम उन्हीं के नाम पर रोहन रखा. इन महान खिलाड़ियों ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया.

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ये बात सही है कि बेकार हो चुके वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने 70 और 80 के दशक में कैरेबियाई टीम के गौरवशाली दिनों का लाभ उठाने के लिए कुछ भी नहीं किया. अपनी योग्यता के मुताबिक पैसे की मांग करने पर वे ही लोग उन्हें स्वार्थी बताकर खारिज कर दे रहे हैं जो खुद उनकी उपलब्धियों से फायदा उठाना चाहते हैं. क्रिकेट में वेस्टइंडीज की गिरती छवि यह दिखाती है कि वह आज के वैश्वीकृत जगत से प्रतिस्पर्धा करने में समर्थ नहीं है. इसलिए उनकी कोई भी उपलब्धि जो उनकी यथास्थिति को तोड़ने में मदद करे, उसकी तारीफ तो निश्चित तौर पर की जानी चाहिए. इस उपलब्धि से कैरेबियाई देशों में क्रिकेट को लंबे दौर में क्या फायदा होने वाला है. इस बारे में कुछ कह पाना कठिन है. लेकिन ये भी सही है कि विश्व क्रिकेट को रोमांचक और मनोरंजक बनाए रखना है तो कैरेबियाई क्रिकेट का बचना जरूरी है.

 

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