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क्यों फेल हो गया पुणे के पिच क्यूरेटर के खिलाफ आधा-अधूरा स्टिंग

यह स्टिंग आखिर क्या अहम जानने या बताने में चूक गया है, यह समझना बहुत जरूरी है.

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu Updated On: Oct 26, 2017 01:10 PM IST

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क्यों फेल हो गया पुणे के पिच क्यूरेटर के खिलाफ आधा-अधूरा स्टिंग

सबसे पहली बात. महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के क्यूरेटर पांडुरंग सालगांवकर को उनकी करतूत के लिए फिर कभी क्रिकेट मैदान पर नहीं जाने नहीं देना चाहिए. दूसरा, उनका स्टिंग करने वाले चैनल ने क्रिकेट के इस ‘सबसे बड़े पर्दाफाश’ के बावजूद क्रिकेट से गंदगी दूर करने का मौका गंवाया है.

यहां यह भी समझना जरूरी है कि कौन किसका स्टिंग कर रहा था. चूंकि पूरा स्टिंग एडिट किया गया है. इसलिए समझना मुश्किल है कि रिटायरमेंट की दहलीज पर खड़े इस पूर्व तेज गेंदबाज के आसपास कैसे हालात बने कि वह पिच के बारे में दो अनजान लोगों से बात करने को तैयार हो गया.

कुछ जरूरी बातें नहीं हुईं साफ

फुटेज में यह भी नहीं है कि बात कैसे शुरू हुई और रिपोर्टरों ने पांडुरंग को क्या लालच दिया. सवाल क्या किए गए. स्टिंग सिर्फ बीच का हिस्सा है. वैसे अगर स्टिंग पांडुरंग को पैसे थमाने और उससे यह जानने की फुटेज के साथ खत्म होता कि उसने पहले कितनी बार ऐसी जानकारी बुकियों को दी है, तो यकीनन क्रिकेट का भला होता.

इस सब में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या कोई क्यूरेटर मैच के एक या दो दिन पहले पिच का मिजाज बदल सकता है! कई जानकारों से बात हुई. सभी एकमत थे कि पिच को आधा अधूरा तैयार करके स्पिनरों की मददगार करने की कोशिश की जा सकती है लेकिन पेसरों के लिए मुश्किल है.

फिर मैच के एक दिन पहले मैदान पर टीम का कप्तान अपने पूरे मैनेजमेंट के साथ मौजूद रहता है. फिर आईसीसी का मैच रेफरी और बीसीसीआई का ऑब्जर्वर भी है. इस सब में पिच के साथ कलाकारी करना आसान नहीं है. आखिर काम तो बाकी लेबर से ही लेना है. पांडुरंग खुद ही झाडू या ब्रश लेकर पिच को नई शक्ल देने में नहीं लग जाएंगे.

कितने रुपयों की थी डील?

अब सवाल यह है कि पांडुरंग रिपोर्टरों के साथ यह सब बात क्यों कर रहे हैं. जैसा कि कहा जा चुका है कि सनसनीखेज स्टिंग यह बताने में नाकाम रहा है कि पांडुरंग को क्या लालच दिया गया. कितने पैसे देने की बात हुई और कितने दिए गए. इसका कोई वीडियो चैनल ने अभी तक नहीं दिखाया है.

इस सब में पांडुरंग को एक मौका दिया जा सकता है कि शायद वही रिपोर्टरों को बेवकूफ बना कर कुछ हासिल करने की कोशिश कर रहे होंगे. जबकि रिपोर्टर समझ रहे हैं कि वह स्टिंग कर रहे हैं.

यहां पर कुछ आंकड़ों पर गौर करना भी जरूरी है.

स्टिंग में पांडुरंग ने दो मौकों पर दो अलग संभावित स्कोर 337 और 340 बताए जो पुणे की पिच पर दूसरे वनडे में बन सकते थे. दावा यह भी था कि इस पर 337 चेस किया जा सकता है. लेकिन मैच खत्म होने पर स्कोर बोर्ड पर कुछ और था.

यह सही है कि इस मैदान पर खेले गए वनडे में भारत ने इसी साल जनवरी में इंग्लैंड के खिलाफ 351 रन के टारगेट को हासिल कर लिया था. हालांकि 2013 में ऑस्ट्रेलिया के 304 रन का पीछा कर रही टीम 232 पर ही सिमट गई थी.

यह स्टिंग आखिर क्या अहम जानने या बताने में चूक गया है, यह समझना बहुत जरूरी है. इस साल फरवरी में इस मैदान ने पहली बार टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया की मेजबानी की थी. ऑस्ट्रेलिया वह मैच 333 रन से जीता था और वह टीम इंडिया की हाल के सालों में सबसे बड़ी हार थी.

दोनों पारियों में टीम 105 और 107 रन पर आउट हो कर ड्रेसिंग रूम में थी. यह स्टिंग अगर यह जानने की कोशिश करता कि क्या पांडुरंग ने कभी इससे पहले बुकियों की कब-कब मदद की तो कई बाते सामने आ जातीं.

स्टिंग करना आसान है. यह कोई भी किसी के साथ कर सकता है. मैं और आप भी. हम पीड़ित भी हो सकते हैं और दूसरे को पीड़ित बना भी सकते हैं. छुपे कैमरे के सामने किसी को बड़ा लालच दीजिए. आपस की बात रिकॉर्ड कीजिए. जितना लगे कि कहानी है, उतनी ही फुटेज इस्तेमाल कीजिए. यह पहले भी हुआ है.

लेकिन अगर मकसद पांडुरंग के भ्रष्टाचार को उजागर करना था तो यह स्टिंग नाकाम रहा है और इसमें कुछ निकल कर नहीं आया है.

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