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'घर' छोड़कर जा रहा है श्रीलंकाई क्रिकेट को 'रफ्तार' देने वाला....

चंपका रमानायके ने श्रीलंका को मलिंगा, कुलसेकरा और प्रदीप जैसे गेंदबाज दिए हैं

Jasvinder Sidhu Updated On: Jul 31, 2017 07:15 PM IST

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'घर' छोड़कर जा रहा है श्रीलंकाई क्रिकेट को 'रफ्तार' देने वाला....

गॉल बहुत सुंदर और छोटा शहर है. यहां कई बीच हैं. कुछ क्रिकेट बचा है जिसे रग्बी मारने के करीब है. कोलंबो के मुकाबले यहां की जिंदगी थोड़ी धीमी है. लेकिन इस शहर ने श्रीलंका क्रिकेट को कई तेज गेंदबाज दिए हैं. लसित मंलिगा का नाम सबसे आगे है. फिर 18 टेस्ट और 62 वनडे खेले पूर्व तेज गेंदबाज चंपका रमानायके भी गॉल से ही हैं.

चंपका सिर्फ एक बॉलिंग कोच ही नहीं हैं. इसी शख्स ने मलिंगा, नुवान प्रदीप और नुवान कुलासेकरा, सुरंग लकमल, लाहिरु कमारा, चमिंडा रंगा जैसे कई तेज गेंदबाजों को गांवों और छोटे कस्बों के धूल भरे टेनिस क्रिकेट के मैचों से उठा कर श्रीलंका के क्रिकेट में जगह दिलाई.

बतौर श्रीलंकाई टीम के तेज बॉलिंग कोच चंपका रमानायके का 31 जुलाई आखिरी दिन था. बांग्लादेश क्रिकेट का हाई परफॉर्मेंस कोच की भूमिका निभाने जा रहे चंपका किसी के बात नहीं करने के इच्छुक नहीं थे. वह चुपचाप नई जिम्मेदारी संभालना चाहते थे, बिना किसी विवाद के.

लेकिन अंत में उन्होंने मेहमान होने के सम्मान दिया और फिर अपना सफर साझा किया. सवाल था कि इतने अजीबो-गरीब एक्शन वाला गेंदबाज लसित मलिंगा आखिर उन्हें कहां से मिला? राइट आर्म मीडियम पेसर रहे चंपका 1998 में झांक कर याद करने की कोशिश करते हैं.

चंपका बताते हैं, ‘1998 में मैं किसी प्राइवेट फर्म के साथ टैलेंट हंट पर काम कर रहा था. मैंने कई शहरों का दौरा किया और कई गेंदबाजों को देखा और परखा. इनमें से मलिंगा भी थे. कोलंबो में मैंने मलिंगा को इंडोर नेट्स में गेंद डालने को कहा और मैं बल्लेबाजी कर रहा था. यकीन मानिए, मुझे उसकी पहली गेंद दिखाई ही नहीं दी. इसके बाद मैंने उससे कहा कि तुम्हारी जगह यहां नहीं है. मेरे साथ गॉल चलो. वह गॉल से ही आते हैं. वह तैयार हो गए और मैंने उन्हें गॉल क्रिकेट क्लब की ओर से खिलाना शुरु किया.’

लेकिन मलिंगा का एक्शन कभी विवाद में नहीं आया?

चंपका बताते हैं, ‘हां, उसके खिलाफ शिकायत हो चुकी है. उसी साल वह सीसीसी क्लब के खिलाफ अंडर-16 का मैच खेल रहे थे. मलिंगा ने आठ विकेट लिए. बल्लेबाज उन्हें खेल ही नहीं पा रहे थे क्योंकि उन्हें गेंद ही नहीं दिखाई दे रही थी. वह उनका पहला  मैच था. 20 साल की उम्र में वह देश के लिए खेले और भारत में उभरते खिलाड़ियों के टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड के खिलाफ अंपायरों ने उनके एक्शन को लेकर शिकायत की जिसकी जांच हुई. बाद में उनका एक्शन लीगल माना गया.

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बकौल चंपका, क्योंकि मलिंगा का एक्शन ऐसा है कि हाथ सामने से सीधा आता है, इसलिए कई मैचों में अंपायरों की टाई उतरवानी पड़ी. वजह थी कि गेंद डालने से ठीक पहले उनका हाथ अपंयार की छाती के सामने होता था.

नुवान प्रदीप कैसे मिले?

चंपका विस्तार से पूरी कहानी बताते हैं, ‘पहले नुवान के बारे में आप को बता दूं. 20 साल की उम्र तक कभी उसने लेदर की बॉल पकड़ कर नहीं देखी थी. 2007 में कोलंबो में सॉफ्ट बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट में मैं टैलेंट हंट प्रोग्राम के तहत कुछ बॉलर्स को देखने गया था. वहां प्रदीप भी थे. मैंने उनसे लेदर की गेंद फेंकने को कहा और स्पीड गन ने उसकी पहली ही गेंद की स्पीड 139 किलोमीटर प्रति घंटा दिखाई. प्रदीप को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेटर बनाने में चार-पांच साल का समय लगा. आप देखिए कि गॉल टेस्ट में पहली बार उसने दुनिया की बेहतरीन टीम के खिलाफ अपने जीवन का बेहतरीन प्रदर्शन किया.’

बतौर कोच चंपका का कैरियर 1997 में संयुक्त अरब अमीरात की टीम के साथ हुआ और वह 2001 से श्रीलंका टीम के बॉलिंग कोच रहे और उन्होंने बहुत ही छोटी उम्र के तेज गेंदबाजों के साथ काम किया.

श्रीलंका की परिस्थतियां काफी कठिन हैं और यहां पर तेज गेंदबाजी के लिए किसी युवा को तैयार करना एक बड़ी चुनौती रहती हैं.

इस बारे में चंपका कहते हैं, ‘श्रीलंका में तेज गेंदबाजी और तेज गेंदबाज तैयार करना एक चुनौती है क्योंकि यहां का मौसम गर्म और उमस भरा है. ऐसी परिस्थितियों में कोई भी तेज गेंदबाज संघर्ष करेगा लेकिन इन हालात में जो अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने में कामयाब होता है. स्कोर बोर्ड पर उसके नाम के आगे दोनों पारियों में विकेट रहती हैं.’

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