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कप्तान कोहली को बचाने के लिए वॉर्निंग जैसा क्यों है इस युवा का फैसला

पहले दो टेस्ट मैचों के लिए आराम मांगकर पांड्या ने सही फैसला किया है, लेकिन बाकियों के बारे में क्या कहा जाए

Updated On: Nov 14, 2017 02:08 PM IST

Jasvinder Sidhu Jasvinder Sidhu

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कप्तान कोहली को बचाने के लिए वॉर्निंग जैसा क्यों है इस युवा का फैसला

हार्दिक पांड्या को भारतीय क्रिकेट में आए अभी एक ही साल हुआ है. वह अपना पहला वनडे मैच अक्टूबर 2016 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले थे. अब तक वह टीम के लिए तीन टेस्ट, 29 वनडे और 24 टी-20 मैच खेल चुके हैं. आईपीएल के मैच अलग हैं.

हार्दिक ने खुलासा किया है कि श्रीलंका के खिलाफ पहले दो टेस्ट मैचों के लिए उन्होंने ही आराम मांगा है.

एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'ईमानदारी से कहूं, तो मैंने ही आराम की मांग की है. मुझे लगा कि मेरा शरीर इन मैचों के लिए तैयार नहीं है. मैं लगातार क्रिकेट  खेल रहा हूं. उसके कारण मुझे कुछ चोटें भी लग रही थीं. मैं उस समय क्रिकेट खेलना चाहता हूं, जब मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार रहूं, जब मैं अपना 100 पर्सेंट दे सकूं'

अभी पिछले 11 अक्टूबर को पांड्या अपने 25वें साल में गए हैं. इस उम्र में उन्होंने बहुत ही बेहतरीन पेशेवर फैसला किया है. वह भी यह जानते हुए कि टीम से बाहर बैठने के क्या खतरे हैं और कितने ही खिलाड़ी मौकों के भुनाने के लिए लाइन लगा कर खड़े हैं.

पांड्या के फैसले से इस बात पर बहस होना जरूरी है कि क्या श्रीलंका ऐसी टीम है जिसके लिए बीसीसीआई अपने श्रेष्ठ खिलाड़ियों को लगातार मैदान पर उतारता रहे. बिना आराम दिए!

नतीजे देखें तो श्रीलंका की टीम ऑस्ट्रेलिया या साउथ अफ्रीका जैसी टक्कर देने वाली नहीं रही. अभी दो महीने पहले ही टीम इंडिया उसके मैदान पर टेस्ट, वनडे और टी-20 सीरीज में एकतरफा क्रिकेट खेल कर लौटी है.

पिछले दस सालों में भारत ने इस टीम के साथ 15 टेस्ट खेले हैं और 9 जीते हैं जबकि चार हारे हैं. श्रीलंका के खिलाफ उसके मैदान पर खेले 12 मैचों में सात भारत जीत कर आया है.

पांड्या ने सही फैसला किया है, लेकिन बाकियों के बारे में क्या कहा जाए. कप्तान विराट कोहली को उदहारण माना जा सकता है. इस समय विश्व से बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक विराट पिछले दो साल से लगातार क्रिकेट खेल रहे हैं.

2016 की शुरुआत से वह अब तक 19 टेस्ट, 36 वनडे और 25 टी-20 मैच खेल चुके हैं. इसमें आईपीएल के 26 मैच भी जोड़ दिए जाएं तो अंदाजा लगाया जा सकता है  कि विराट का शरीर कितना भार ले रहा है. यह आंकड़े सिर्फ मैचों के हैं.

टीम  को थका देने वाले फील्डिंग, बैटिंग और फिटनेस सेशन से लेकर एक शहर से दूसरे तक मैच के लिए यात्रा किसी के भी शरीर को तोड़ने के लिए काफी है. बेशक वह इंसान कितना भी फिट क्यों न हो.

फिर विराट जिम में भी अपना काफी समय बिताते हैं. उनके सिक्स पैक और बिना फैट की बॉडी से अंदाजा लगाना आसान है कि जिम में वह किस कदर अपने शरीर के सामने चुनौती पेश करते होंगे.

यहां तर्क दिया जा सकता है कि अगर कोई फिट है तो उसे आराम देने का क्या तुक है. लेकिन इस तर्क का काउंटर इस तर्क के साथ किया जा सकता है कि एक ऐसी टीम के खिलाफ अपने बेहतरीन खिलाड़ी को बार-बार उतारने का क्या तुक है जो टेस्ट मैच जीतने के लिए नहीं, बल्कि मैच को चौथे-पांचवें दिन तक खींचने तक में फेल हो रही हो.

यहां सवाल यह भी है कि विराट खुद ही आराम नहीं चाहते या बोर्ड आपसी सीरीज के करार की शर्तों की इज्जत को बनाए रखने के लिए खुद ही इस बारे में फैसला नहीं करना चाहता.

जाहिर है कि दो मुल्कों के बीच अगर आपसी सीरीज का करार होता है तो दोनों पार्टियां सुनिश्चित करती हैं कि टॉप के सभी खिलाड़ी उसमें खेलें ताकि प्रसारण के करार पर कोई असर न पड़े.

वैसे टीवी कंपनी के पास हर हालात में अपने नुकसान के निपटने के कई विकल्प रहते हैं. लेकिन अगर कभी विराट जैसे अन्य टॉप खिलाड़ी लगातार क्रिकेट के कारण वाकई चोटिल हो कर लंबे समय तक बाहर बैठते हैं तो उसकी भरपाई आसान नहीं होगी.

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