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जानिए क्यों महिला क्रिकेटर हरमनप्रीत को पुलिस की वर्दी पहनने के लिए देने होंगे 27 लाख रुपए!

महिला वर्ल्डकप में कंगारू गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाली हरमनप्रीत के लिए नौकरी बदलना हुआ मुश्किल, पंजाब के मुख्यमंत्री को देना पड़ा दखल

Updated On: Jan 19, 2018 05:37 PM IST

FP Staff

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जानिए क्यों महिला क्रिकेटर हरमनप्रीत को पुलिस की वर्दी पहनने के लिए देने होंगे 27 लाख रुपए!

विश्व कप में आॅस्ट्रेलिया की धुनाई करके भारतीय टीम को फाइनल में पहुंचाने वाली हरमनप्रीत कौर तो आपको याद ही होंगी..उनकी इस पारी ने उन्हें पूरे देश में पहचान दिला दी थी..लेकिन इन दिनों वह  अपनी नौकरी को लेकर परेशान हैं.

दरअसल महिला विश्व् कप में उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए पंजाब पुलिस ने पिछले साल उन्हें डीएसपी के पद  की पेशकश थी जिसे वह कबूल भी करना चाहती हैं. लेकिन हरमन और पुलिस की वर्दी के बीच एक पेंच फंस गया है.

दरअसल हरमनप्रीत ने तीन साल पहले ही  खेल कोटा के तहत पांच साल का बॉन्ड साइन कर वेस्टर्न रेलवे में नौकरी जॉइन की थी. अब हरमन रेलवे की नौकरी को छोडकर पंजाब पुलिस जॉइन करना चाहती है, तो रेलवे उन्हें इसकी इजाजत नहीं दे रहा है.

हरमनप्रीत ने इंडियन एक्सप्रेस से हुई बातचीत में कहा कि इस्तीफे को स्वीकार करने लिए रेलवे उनसे 27 लाख रुपए मांग रहा हैं हरमन ने कहा कि 'मैनें यहां तीन साल काम किया है, लेकिन रिलीव करने के लिए वे मुझसे 5 साल की सैलरी जमा कराने के लिए बोल रहे हैं.' हरमन ने कहा किे विश्व कप के कारण उन्हें 5 महीने की सैलेरी भी नहीं मिली.

Amrinder Singh

हरमनप्रीत के इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय रेलवे मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर इस स्टार खिलाडी का इस्तीफा स्वीकार करने के लिए निवेदन किया. सिंह कहा कि 'वे किसी प्राइवेट सेक्टर के लिए नौकरी नहीं छोड़ रही हैं. बस वह केन्द्रीय सरकार की नौकरी छोड़कर राज्य सरकार की नौकरी जॉइन कर रही है. यदि उन्हें डीएसपी के पद को जॉइन करने के लिए सहमति नहीं मिलती है तो ये उसके साथ गलत होगा और ये राशि क्रिकेट में उनके शानदार प्रर्दशन के लिए पुरस्कृत करने की बजाय दंडित करने जैसी होगी.'

वहीं वेस्टर्न रेलवे के जनरल मैनजर अनिल कुमार गुप्ता का कहना है रेलवे बोर्ड खेल कोर्ट से जिन लोगों की नियुक्ति करती है, उन्हें पांच साल का बॉन्ड पूरा करना होता है. बॉन्ड तोडने पर पांच साल की सैलेरी जमा करवाने के बाद ही वे यहां से जा सकते हैं.

हरमन का कहना है कि उनका मेडिकल आदि सब कुछ हो गया था, लेकिन जब वे पिछले साल अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में डीएसपी पद जॉइन करने पहुंची तो उन्हें इसके लिए सहमति नहीं मिली. तब आईएएस आॅफिसर ने उन्हें बताया कि रेलवे ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है.

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