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साउथ अफ्रीका के खिलाफ उसी की धरती पर शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं डब्ल्यू वी रमन

अपने करियर में 11 टेस्ट और 27 वनडे मैच खेलने वाले डब्ल्यू वी रमन घरेलू क्रिकेट के सबसे सफल कोच में से एक हैं

Updated On: Dec 21, 2018 07:18 PM IST

FP Staff

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साउथ अफ्रीका के खिलाफ उसी की धरती पर शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं डब्ल्यू वी रमन

डब्ल्यू वी रमन का शुमार अपने समय के  प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में किया जाता है, लेकिन उन्होंने भारत के लिए ज्यादा टेस्ट और वनडे क्रिकेट नहीं खेला. हालांकि उनके खाते में कुछ उपलब्धियां ऐसी हैं जो उनकी प्रतिभा को बयां करती हैं. रमन साउथ अफ्रीका के खिलाफ उसी की धरती पर शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज हैं. उन्होंने 1992-93 के फ्रेंडशिप दौरे में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन में वनडे मैच में शतक (114 रन) लगाया था. ये मैच चार विकेट से भारत ने जीता था. रमन के अंतरराष्ट्रीय करियर का ये एकमात्र शतक है.

दक्षिण अफ्रीका के गैरी कर्स्टन पर तरजीह देते हुए पूर्व सलामी बल्लेबाज डब्ल्यू वी रमन को गुरुवार को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का कोच नियुक्त किया गया. रमन इस समय बेंगलुरु में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में बल्लेबाजी सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं. वह अगले महीने न्यूजीलैंड में पहली बार टीम के साथ जाएंगे. अपने करियर में 11 टेस्ट और 27 वनडे मैच खेलने वाले डबल्यू वी रमन घरेलू क्रिकेट के सबसे सफल कोच में से एक हैं. रमन ने तमिलनाडु और बंगाल जैसी बड़ी टीमों को भी कोचिंग दी है. वह भारत की अंडर 19 टीम के साथ भी जुड़े रहे हैं.

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टेस्ट में पहले ओवर में लिया था विकेट  

रमन मूलत: ऑलराउंडर थे जो अच्छी बल्लेबाजी के साथ उपयोगी गेंदबाजी भी कर सकता था. गेंदबाज के तौर पर उनके नाम बड़ी उपलब्धि ये दर्ज है कि उन्होंने टेस्ट करियर के पहले ओवर में विकेट लिया था. ये विकेट कोर्टनी वाल्श का था. लेकिन वह टीम में बतौर बल्लेबाज खेलते थे. 1988-89 उनके करियर का सबसे अच्छा साल था. घरेलू क्रिकेट में  उन्होंने तमिलनाडु की ओर से गोवा के खिलाफ 313 रन की पारी खेली थी. इसके अलावा उन्होंने दो दोहरे शतक भी लगाए थे. उस सत्र में रमन ने 1018 रन बनाकर रूसी मोदी का एक सत्र में सर्वाधिक रन बनाने का 44 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था.

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पदार्पण टेस्ट में बनाए थे 83 रन  

अपने समय के अन्य बल्लेबाजों की तरह रमन को भी भारतीय टीम के लिए पारी की शुरुआत करने के लिए कहा गया था. उन्होंने कुछ मैचों में सलामी बल्लेबाज की भूमिका भी निभाई. पदार्पण टेस्ट में तीसरे नंबर पर खेलते हुए रमन ने दूसरी पारी में 83 रन बनाए थे. लेकिन उसी टेस्ट में नरेंद्र हिरवानी ने पदार्पण में करते हुए 136 रन पर 16 विकेट लेकर उनके प्रदर्शन को ढक दिया था. रमन का अंतरराष्ट्रीय करियर उस तरह नहीं चला जैसा होना चाहिए था.

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विनोद कांबली के आने के बाद डगमगा गया करियर

1993 में इंग्लैंड के भारत दौरे में विनोद कांबली को रमन पर तरजीह दी गई. विनोद कांबली ने ये मिला मौका भुना लिया. रमन का टेस्ट में सर्वाधिक स्कोर 96 रन है जो उन्होंने 1990 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया था. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने आखिरी टेस्ट दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1997 में केप टाउन में खेला था. उन्होंने टेस्ट में 24.88 की औसत से 448 रन बनाए. उन्होंने 27 वनडे मैचों में 23.73 की औसत से 617 रन बनाए थे. घरेलू क्रिकेट में रमन ने प्रथम श्रेणी मैचों में 7939 और लिस्ट ए मैचौं में 2892 रन बनाए थे. घरेलू क्रिकेट में उन्होंने 103 विकेट भी चटकाए.

 

 

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