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बर्थडे स्पेशल, विवियन रिचर्ड्स : स्वैग जिसका करता था स्वागत

सात मार्च 1952 को जन्मे थे सर इसाक विवियन एलेक्जेंडर रिचर्ड्स, जिनकी आक्रामक बल्लेबाजी की दुनिया हुई कायल

Neeraj Jha Updated On: Mar 07, 2018 11:39 AM IST

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बर्थडे स्पेशल, विवियन रिचर्ड्स : स्वैग जिसका करता था स्वागत

मेरी जेनरेशन के ज्यादातर पत्रकार 80 और 90 दशक के क्रिकेट को देखकर बड़े हुए होंगे. इनमें से अधिकतर लोग एक ऐसे खिलाड़ी के फैन होंगे, जो उस दशक में  हर देश के लिए चुनौती बना हुआ था.  हम बात कर रहे है - सर इसाक विवियन एलेक्जेंडर रिचर्ड्स की. एंटीगा में पैदा हुआ यह क्रिकेटर विवियन, विव और किंग विव के नाम से ज्यादा लोकप्रिय है.

विव का नाम लेते हैं, तो एक खास स्वैग याद आता है. सलमनान खान का स्वैग तो आज के जमाने के लोग जानते हैं. लेकिन 70 और 80 के दशक में जिन लोगों ने क्रिकेट मैच देखे हैं, उन्हें पता है कि स्वैग का नाम विव रिचर्ड्स था. उनकी वो खास चाल, मुंह में च्युइंगम... ये सब एक पहचान थी उनकी.

रिचर्ड्स दाएं हाथ के एक आक्रामक बल्लेबाज़ थे. जिस ताकत से वो गेंद पर प्रहार करते थे, वो सामने वाले को हैरानी में डाल देता था. इसके अलावा वे स्लिप के अच्छे फील्डर और ऑफ़ स्पिनर भी थे. क्रिकेट इतिहास में उन्हे असाधारण प्रतिभा वाला क्रिकेटर कहा जाता है, रिचर्ड्स की आक्रामकता का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि अपने सत्रह साल के लंबे कैरियर के दौरान उन्होने कभी भी बैटिंग करते हुए हेल्मेट का इस्तेमाल नहीं किया. रिचर्ड्स को 100 सदस्यों के विशेषज्ञ पैनल ने बीसवीं शताब्दी के पांच महान खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया.

फरवरी 2002 में क्रिकेट की बाइबल कही जाने वाली क्रिकेट पत्रिका विजडन द्वारा विवियन रिचर्ड्स की एक पारी को वन डे क्रिकेट की सर्वश्रेष्ठ इनिंग घोषित किया गया. इसी वर्ष दिसंबर में विज़डन ने उन्हे वन डे क्रिकेट का सर्वकालीन और टेस्ट क्रिकेट के तीन महान बल्लेबाज़ों में से एक घोषित किया. रिचर्ड्स ने 121 टेस्ट मैच और 187 वनडे मैच खेले. टेस्ट में 8,540 और वनडे 6,721 रन बनाए.

कौन भूल सकता है जब वो मैदान पर च्युइंगम चबाते हुए और दोनों बाजुओं को ठोक कर बड़े से बड़े गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा देते थे. जब मैंने खेल पत्रकारिता को चुना तब भी पता नहीं था की इस महान हस्ती से कभी मिलने का मौका भी मिलेगा. लेकिन यह मौका मिला.

किंग से पहली  मुलाक़ात

क्रिकेट के इस बादशाह से मिलने का सबसे पहला मौका करीब 2005 में मिला जब मुझे एक निजी चैनल के लिए उनका इंटरव्यू करना था.. हालांकि वहां वक़्त की कमी थी तो बस 4 -5 सवाल पूछ कर ही लौटना पड़ा क्योंकि कतार में करीब 10-15 और पत्रकार बंधु माइक लेकर पीछे खड़े थे. उनसे अकेले में बात करने का जो मन था, वो मन में ही रह गया. उसी साल मैंने न्यूज़ चैनल को छोड़कर दुबई में टेन स्पोर्ट्स की नौकरी पकड़ ली थी.

खैर, दूसरा मौका तो मिला, लेकिन उसके लिए करीब 9 साल इंतज़ार करना पड़ा. 2014 का वेस्टइंडीज और इंग्लैंड का वो सीरीज मैं कभी नहीं भूल सकता. बारबाडोस में हो रहे मैच में विव बीबीसी रेडियो के लिए कमेंटरी कर रहे थे. मैं टीवी के लिए लाइव मैच का प्रोड्यूसर था और वो बगल वाले कमरे में कमेंटरी कर रहे थे. ब्रेक के दौरान उनसे गुफ्तगू करने का मौका मिला. बातों बातों में मैंने उनसे कहा कि मुझे आपका ऑटोग्राफ चाहिए. बड़ी सहजता से उन्होंने बैट और फोटोज पर मेरा नाम लिखकर ऑटोग्राफ दिया. लेकिन यह मुलाकात भी औपचारिक जैसी थी. असली मौका उसके बाद आया.

विव के साथ काम करने का मौका

2016 का भारत का वेस्टइंडीज दौरा - इस दौरे के लिए हमने अपनी मैनेजमेंट टीम को विव रिचर्ड्स का नाम बतौर कमेंटेटर सुझाया, जिसपर मैनेजमेंट ने मुहर लगा दी. हालांकि वो पहली बार टीवी के लिए कमेंटरी कर रहे थे, ये हमारे और उनके -  दोनों के लिए एक चुनौती थी. लेकिन धीरे-धीरे वो लय में आ गए. इस दौरान उनको काफी करीब से जानने और समझने का मौका मिला.

63 साल की उम्र में हमारे मुल्क़ में लोग नौकरी और शायद ज़िंदगी दोनों से रिटायर हो जाते हैं. लेकिन इसी उम्र में विव की फिटनेस को देखकर हम उनके कायल हो गए. उनके चलने के स्टाइल में कोई बदलाव नहीं था. बिलकुल वही पुराना अंदाज़ - जंगल के शेर की तरह निर्भीक और निडर. मैंने सीरीज में उनका नाम शेर सिंह रख दिया - जो इतना लोकप्रिय रहा कि बाकी कमेंटेटर जैसे संजय मांजरेकर और सुनील गावस्कर भी हमारी आपसी बातचीत में इसी नाम का प्रयोग करने लगे. अभी हाल फिलहाल मांजरेकर से दिल्ली में मुलाक़ात हुई और उन्होंने यहां भी पूछ लिया कि तुम्हारे शेर सिंह के क्या हालचाल है.

लेखक नीरज के साथ सर विवियन रिचर्ड्स

लेखक नीरज के साथ सर विवियन रिचर्ड्स

ज़िन्दगी में अगर आप किसी के कायल हो और आपको उनके साथ महीने भर काम करने का मौका मिले, इस से बड़ी उपलब्धि कुछ हो नहीं सकती. विव से जो मेरे रिश्ते उस समय बने थे, वो आज भी बरकरार हैं. जब पिछले साल टेन स्पोर्ट्स का विलय सोनी से हुआ था, तो उस समय मैं अपने गांव में था. उन्होंने मुझे फ़ोन करके पूछा कि मेरे लिए ये अच्छा है या बुरा. बात सिर्फ फ़ोन की नहीं थी, ये इस महान आदमी का बड़प्पन था कि इस बदलाव के दौरान उन्होंने मुझ जैसे को याद किया. यह दिखाता है कि बेपरवाह दिखने वाले इस शख्स को लोगों की कितनी परवाह है.

विव, बिहार और लालू यादव

क्वींस ओवल पार्क में पानी के जमाव के कारण मैच नहीं हो पा रहा था और हम कुछ पत्रकार मित्र विव के साथ गप्पें लड़ा रहे थे. ऐसे में हमारे एक करीबी मित्र समीप ने विव को बताया कि मैं बिहार का रहने वाला हूं और लालू यादव वहां के लोकप्रिय नेता हैं और उनका क्रिकेट से भी नाता रहा था... हालांकि समीप ने मजाकिया तौर पर लालू का नाम लिया था. लेकिन लालू का नाम लेते ही विव की सारी पुरानी यादें ताज़ा हो गयी. उन्होंने हमें बताया कि वो लालू से मिल चुके हैं, जब वो बिहार क्रिकेट के अध्यक्ष हुआ करते थे. विव ने बताया कि वो लालू के बातचीत करने के अंदाज़ और उनके व्यक्तित्व के कायल हो गए थे. विव ने जिस विस्तार से हमें लालू से अपनी 15 साल पुरानी मुलाक़ात का विवरण दिया, उसके बाद तो सारे पत्रकार विवियन रिचर्ड्स के याददाश्त के फैन हो गए.

विव उन खिलाड़ियों में से एक है जिनके साथ आप बार बार काम करना चाहेंगे। उनकी सादगी और अनुशासन हम सबके लिए सबक है और इसका बेहतरीन उदाहरण हमने देखा, जब वो अपने नाम पर बने स्टेडियम में भी अपना पहचान पत्र लगाकर आते थे. आज किंग विव 66 साल के हो गए हैं... हैप्पी बर्थडे विव.. आप जैसा न कोई था, न होगा.

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